ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 30 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः तीसवाँ अध्याय नारायण के द्वारा परमपुरुष परमात्मा श्रीकृष्ण तथा प्रकृतिदेवी की महिमा का प्रतिपादन श्रीनारायण बोले — गणेश, विष्णु, शिव, रुद्र, शेष, ब्रह्मा आदि देवता, मनु, मुनीन्द्रगण, सरस्वती, पार्वती, गङ्गा और लक्ष्मी आदि देवियाँ भी जिनका सेवन करती हैं, उन भगवान् गोविन्द के… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 29 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः उनतीसवाँ अध्याय बदरिकाश्रम में नारायण के प्रति नारदजी का प्रश्न सौति कहते हैं — शौनक ! देवर्षि नारद ने नारायण ऋषि के आश्चर्यमय आश्रम को देखा, जो बेर के वनों से सुशोभित था । नाना प्रकार के वृक्षों और फलों से भरे हुए… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 28 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः अट्ठाइसवाँ अध्याय परब्रह्म परमात्मा के स्वरूप का निरूपण नारदजी ने पूछा — जगन्नाथ ! जगद्गुरो ! आपकी कृपा से मैंने सब कुछ सुन लिया। अब आप ब्रह्म के स्वरूप का वर्णन – ब्रह्मतत्त्व का निरूपण कीजिये । प्रभो ! सर्वेश्वर ! ब्रह्म साकार… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 27 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः सत्ताईसवाँ अध्याय ब्राह्मणों के लिये भक्ष्याभक्ष्य तथा कर्तव्याकर्तव्य का निरूपण नारदजी ने पूछा — प्रभो ! गृहस्थ ब्राह्मणों, यतियों, वैष्णवों, विधवा स्त्रियों और ब्रह्मचारियों के लिये क्या भक्ष्य है और क्या अभक्ष्य ? क्या कर्तव्य है और क्या अकर्तव्य ? अथवा उनके लिये… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 26 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः छब्बीसवाँ अध्याय ब्राह्मणों के आह्निक आचार तथा भगवान्‌ के पूजन की विधि का वर्णन सौति कहते हैं — शौनकजी ! देवर्षि नारद ने भगवान् शंकर से श्रीहरि के स्तोत्र, कवच, मन्त्र, उत्तम पूजाविधान, ध्यान तथा उनके तत्त्वज्ञान की याचना की । महेश्वर ने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 25 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः पच्चीसवाँ अध्याय नारदजी को भगवान् शिव का दर्शन, शिव द्वारा नारदजी का सत्कार तथा उनकी मनोवाञ्छापूर्ति के लिये आश्वासन सौति कहते हैं — शौनक ! तदनन्तर विप्रवर नारद क्षण-भर में बड़ी प्रसन्नता के साथ शिव के मनोहर धाम में जा पहुँचे । भगवान्… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 24 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः चौबीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का नारद को गृहस्थ-धर्म का महत्त्व बताते हुए विवाह के लिये राजी करना और नारद का पिता की आज्ञा ले शिवलोक को जाना सौति कहते हैं — नारद को इस प्रकार जाते देख ब्रह्माजी उदास हो गये और इस प्रकार… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 23 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः तेईसवाँ अध्याय ब्रह्माजी से सृष्टि के लिये दार-परिग्रह की प्रेरणा पाकर डरे हुए नारद का स्त्री-संग्रह के दोष बताकर तप के लिये जाने की आज्ञा माँगना सौति कहते हैं — सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने अपने सब बालकों को सृष्टि के कार्य में लगाकर नारदजी… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 22 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः बाईसवाँ अध्याय ब्रह्मा जी के पुत्रों के नामों की व्युत्पत्ति सौति कहते हैं — शौनक जी! तदनन्तर कुछ कल्प व्यतीत होने पर जब ब्रह्मा जी पुनः सृष्टि-कार्य में संलग्न हुए, तब उनके ‘नरद’ नामक कण्ठ देश से मरीचि आदि मुनियों के साथ वे… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 21 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः इक्कीसवाँ अध्याय शूद्रयोनि में उत्पन्न बालक नारद की जीवनचर्या, नाम की व्युत्पत्ति, उसके द्वारा संतों की सेवा, सनत्कुमार द्वारा उसे उपदेश की प्राप्ति, उसके द्वारा श्रीहरि के स्वरूप का ध्यान, आकाशवाणी तथा उस बालक के देह-त्याग का वर्णन सौति कहते हैं — शौनक… Read More