ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 10 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दसवाँ अध्याय गङ्गा की उत्पत्ति का विस्तृत प्रसङ्ग नारदजी ने कहा — वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ भगवन्! पृथ्वी का यह परम मनोहर उपाख्यान सुन चुका । अब आप गङ्गा का विशद प्रसङ्ग सुनाने की कृपा कीजिये। प्रभो! सुरेश्वरी, विष्णुस्वरूपा एवं… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 09 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ नौवाँ अध्याय पृथ्वी के प्रति शास्त्र विपरीत व्यवहार करने पर नरकों की प्राप्ति का वर्णन नारदजी बोले — भगवन्! पृथ्वी का दान करने से जो पुण्य तथा उसे छीनने, दूसरे की भूमि का हरण करने, अम्बुवाची में पृथ्वी का… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 08 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ आठवाँ अध्याय पृथ्वी की उत्पत्ति का प्रसङ्ग, ध्यान और पूजन का प्रकार तथा स्तुति नारदजी ने कहा — भगवन् ! आपने बतलाया है कि श्रीकृष्ण के निमेषमात्र में ब्रह्मा की आयु पूरी हो जाती है। उन का सत्ता-शून्य हो… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 07 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सातवाँ अध्याय कलियुग के भावी चरित्र का, कालमान का तथा गोलोक की श्रीकृष्ण-लीला का वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! तदनन्तर सरस्वती अपनी एक कला से तो पुण्यक्षेत्र भारतवर्ष में पधारीं तथा पूर्ण अंश से उन्हें भगवान्… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 06 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छठा अध्याय विष्णुपत्नी लक्ष्मी, सरस्वती एवं गङ्गा का परस्पर शापवश भारतवर्ष में पधारना भगवान् नारायण कहते हैं —  नारद! वे भगवती सरस्वती स्वयं वैकुण्ठ में भगवान् श्रीहरि के पास रहती हैं। पारस्परिक कलह के कारण गङ्गा ने इन्हें शाप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 05 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय याज्ञवल्क्य द्वारा भगवती सरस्वती की स्तुति [ ऋषिप्रवर ] भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! सरस्वती देवीका स्तोत्र सुनो, जिससे सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं । प्राचीन समय की बात है — याज्ञवल्क्य नाम से प्रसिद्ध… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 04 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौथा अध्याय सरस्वती की पूजा का विधान तथा कवच नारदजी ने कहा — भगवन्! आपके कृपा-प्रसाद से यह अमृतमयी सम्पूर्ण कथा मुझे सुनने को मिली है। अब आप इन प्रकृति-संज्ञक देवियों के पूजन का प्रसंग विस्तार के साथ बताने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 03 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसरा अध्याय परिपूर्णतम श्रीकृष्ण और चिन्मयी श्रीराधा से प्रकट विराट्स्वरूप बालक का वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! तदनन्तर वह बालक जो केवल अण्डाकार था, ब्रह्माकी आयुपर्यन्त ब्रह्माण्ड-गोलक के जल में रहा। फिर समय पूरा हो जाने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 02 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दूसरा अध्याय परब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराधा से प्रकट चिन्मय देवी और देवताओं के चरित्र नारदजी ने कहा — प्रभो ! देवियों के सम्पूर्ण चरित्र को मैंने संक्षेप से सुन लिया। अब सम्यक् प्रकार से बोध होने के लिये आप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 01 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पहला अध्याय पञ्चदेवीरूपा प्रकृति का तथा उनके अंश, कला एवं कलांश का विशद वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं —  नारद ! गणेशजननी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, सावित्री और राधा – ये पाँच देवियाँ प्रकृति कहलाती हैं । इन्हीं पर सृष्टि… Read More