ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 77 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 77 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) सतहत्तरवाँ अध्याय सुस्वप्न-दर्शन के फल का विचार नन्दजी ने पूछा — प्रभो ! किस स्वप्न से कौन-सा पुण्य होता है और किससे मोक्ष एवं सुख की सूचना मिलती है ? कौन-कौनसा स्वप्न शुभ बताया गया है ? श्रीभगवान् बोले — तात !… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 76 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 76 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) छिहत्तरवाँ अध्याय जिनके दर्शन से पुण्यलाभ और जिनके अनुष्ठान से पुनर्जन्म का निवारण होता है, वस्तुओं और सत्कर्मों का वर्णन तथा विविध दानों के पुण्यफल का कथन श्रीनन्द ने कहा — सर्वेश्वर ! जिनके दर्शन से पुण्य और जिन्हें देखने से पाप… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 75 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 75 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) पचहत्तरवाँ अध्याय लोकनीति, लोकमर्यादा तथा लौकिक सदाचार से सम्बन्ध रखने वाले विविध विधि-निषेधों का वर्णन, कुसङ्ग और कुलटा की निन्दा, सती और भक्त की प्रशंसा, शिवलिङ्ग-पूजन एवं शिव की महत्ता नन्दजी की यह बात सुनकर सर्वज्ञ भगवान् श्रीकृष्ण ने उन्हें श्रुति-दुर्लभ आह्निक-कृत्य-सम्बन्धी… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 74 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 74 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) चौहतरवाँ अध्याय श्रीकृष्ण द्वारा नन्दजी को ज्ञानोपदेश श्रीनारायण कहते हैं — नारद! भगवान् श्रीकृष्ण परमानन्दमय परिपूर्णतम प्रभु हैं। भक्तों पर अनुग्र हके लिये व्याकुल रहने वाले परम परमात्मा हैं। पृथ्वी का भार उतारने के लिये अवतीर्ण हुए वे भगवान् निर्गुण, प्रकृति से… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 73 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 73 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) तिहतरवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का नन्द को अपना स्वरूप और प्रभाव बताना; गोलोक, रासमण्डल और राधा-सदन का वर्णन; श्रीराधा के महत्त्व का प्रतिपादन तथा उनके साथ अपने नित्य सम्बन्ध का कथन और दिव्य विभूतियों का वर्णन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर शोक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 72 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 72 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) बहतरवाँ अध्याय पुरी की शोभा का वर्णन, कुब्जा पर कृपा, माली को वरदान, धोबी का उद्धार, कुब्जा का गोलोकगमन, कंस का दुःस्वप्न, रङ्गभूमि में कंस का पधारना, धनुर्भङ्ग, हाथी का वध, कंस का उद्धार, उग्रसेन को राज्यदान, माता-पिता के बन्धन काटना, वसुदेवजी… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 71 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 71 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) इकहतरवाँ अध्याय शुभ लग्न में यात्रासम्बन्धी मङ्गलकृत्य करके श्रीकृष्ण का मथुरापुरी को प्रस्थान श्रीनारायण कहते हैं — नारद! जब वायु से सुवासित, चन्दननिर्मित और फूलों से बिछी हुई शय्या पर राधिकाजी सो गयीं तथा गोपिकाएँ भी गाढ़ निद्रा में निमग्न हो गयीं,… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 70 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 70 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) सतरवाँ अध्याय अक्रूरजी के शुभ स्वप्न तथा मङ्गलसूचक शकुन का वर्णन, उनका रासमण्डल और वृन्दावन का दर्शन करते हुए नन्दभवन में जाना, नन्द द्वारा उनका स्वागत-सत्कार, उन्हें श्रीकृष्ण के विविध रूपों में दर्शन, उनके द्वारा श्रीकृष्ण की स्तुति तथा श्रीकृष्ण को मथुरा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 69 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 69 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) उनहत्तरवाँ अध्याय श्रीराधा के सो जाने पर ब्रह्मा आदि देवताओं का आना और स्तुति करके श्रीकृष्ण को मथुरा जाने के लिये प्रेरित करना, श्रीकृष्ण का जाना, श्रीराधा का उठना और प्रियतम के लिये विलाप करके मूर्च्छित होना, श्रीकृष्ण का लौटकर आना, रत्नमाला… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 68 ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 68 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) अड़सठवाँ अध्याय श्रीकृष्ण को व्रज में जाते देख राधा का विलाप एवं मूर्च्छा, श्रीहरि का उन्हें समझाना श्रीनारायण कहते हैं — नारद! पुरातन परमेश्वर श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण ने पुष्प-शय्या से उठकर निद्रा में निमग्न हुई अपनी प्राणोपमा प्रियतमा श्रीराधा को तत्काल ही जगाया… Read More