श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय बलि का बन्धन से छूटकर सुतल लोक को जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — जन्म सनातन पुरुष भगवान् ने इस प्रकार कहा, तो साधुओं के आदरणीय महानुभाव दैत्यराज के नेत्रों में आँसू छलक आये । प्रेम के… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय बलि के द्वारा भगवान् की स्तुति और भगवान् को उस पर प्रसन्न होना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इस प्रकार भगवान् ने असुरराज बलि का बड़ा तिरस्कार किया और उन्हें धैर्य से विचलित करना चाहा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय बलि का बाँधा जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् का चरणकमल सत्यलोक में पहुँच गया । उसके नखचन्द्र की छटा से सत्यलोक की आभा फीकी पड़ गयी । स्वयं ब्रह्मा भी उसके प्रकाश में… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय भगवान् वामनजी का विराट् रूप होकर दो ही पग से पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लेना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! जब कुलगुरु शुक्राचार्य ने इस प्रकार कहा, तब आदर्श गृहस्थ राजा बलि ने एक… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय भगवान् वामन का बलि से तीन पग पृथ्वी माँगना, बलि का वचन देना और शुक्राचार्यजी का उन्हें रोकना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजा बलि के ये वचन धर्मभाव से भरे और बड़े मधुर थे । उन्हें… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय वामन भगवान् का प्रकट होकर राजा बलि की यज्ञशाला में पधारना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इस प्रकार जब ब्रह्माजी ने भगवान् की शक्ति और लीला की स्तुति की, तब जन्म-मृत्युरहित भगवान् अदिति के सामने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय भगवान् का प्रकट होकर अदिति को वर देना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अपने पतिदेव महर्षि कश्यपजी का उपदेश प्राप्त करके अदिति ने बड़ी सावधानी से बारह दिन तक इस व्रत का अनुष्ठान किया ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय कश्यपजी के द्वारा अदिति को पयोव्रत का उपदेश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवता इस प्रकार भागकर छिप गये और दैत्यों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया; तब देवमाता अदिति को बड़ा दुःख हुआ… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय राजा बलि की स्वर्ग पर विजय राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! श्रीहरि स्वयं ही सबके स्वामी हैं । फिर उन्होंने दीन-हीन की भाँति राजा बलि से तीन पग पृथ्वी क्यों माँगी ? तथा जो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय मनु आदि के पृथक्-पृथक् कर्मों का निरूपण राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आपके द्वारा वर्णित ये मनु, मनुपुत्र, सप्तर्षि आदि अपने-अपने मन्वन्तर में किसके द्वारा नियुक्त होकर कौन-कौन-सा काम किस प्रकार करते हैं यह… Read More