श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय ययाति का गृहत्याग श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! राजा ययाति इस प्रकार स्त्री के वश में होकर विषयों का उपभोग करते रहे । एक दिन जब अपने अधःपतन पर दृष्टि गयी तब उन्हें बड़ा वैराग्य… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय ययाति-चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जैसे शरीरधारियों के छः इन्द्रियाँ होती हैं, वैसे ही नहुष के छः पुत्र थे । उनके नाम थे — यति, ययाति, संयाति, आयति, वियति और कृति ॥ १ ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय क्षत्रवृद्ध, रजि आदि राजाओं के वंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! राजेन्द्र पुरूरवा का एक पुत्र था आयु । उसके पाँच लड़के हुए — नहुष, क्षत्रवृद्ध, रजि, शक्तिशाली रम्भ और अनेना । अब… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय परशुरामजी के द्वारा क्षत्रियसंहार और विश्वामित्रजी के वंश की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अपने पिता की यह शिक्षा भगवान् परशुराम ने ‘जो आज्ञा’ कहकर स्वीकार की । इसके बाद वे एक वर्ष तक… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय ऋचीक, जमदग्नि और परशुरामजी का चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! उर्वशी के गर्भ से पुरूरवा के छः पुत्र हुए — आयु, श्रुतायु, सत्यायु, रय, विजय और जय ॥ १ ॥ श्रुतायु का पुत्र था… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय चन्द्रवंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब मैं तुम्हें क्न्द्रमा के पावन वंश का वर्णन सुनाता हूँ । इस वंश में पुरूरवा आदि बड़े-बड़े पवित्रकीर्ति राजाओं का कीर्तन किया जाता है ॥ १… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय राजा निमि के वंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इक्ष्वाकु के पुत्र थे निमि । उन्होंने यज्ञ आरम्भ करके महर्षि वसिष्ठ को ऋत्विज् के रूप में वरण किया । वसिष्ठजी ने कहा कि… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय इक्ष्वाकुवंश के शेष राजाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! कुश का पुत्र हुआ अतिथि, उसका निषध, निषध के नभ, नभ का पुण्डरीक और पुण्डरीक का क्षेमधन्वा ॥ १ ॥ क्षेमधन्वा का देवानीक, देवानीक… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ११ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय भगवान् श्रीराम की शेष लीलाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीराम ने गुरु वसिष्ठजी को अपना आचार्य बनाकर उत्तम सामग्रियों से युक्त यज्ञों के द्वारा अपने-आप ही अपने सर्वदेवस्वरूप स्वयंप्रकाश आत्मा का… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय भगवान् श्रीराम की लीलाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! खट्वाङ्ग के पुत्र दीर्घबाहु और दीर्घबाहु के परम यशस्वी पुत्र रघु हुए । रघु के अज़ और अज के पुत्र महाराज दशरथ हुए ॥… Read More