शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 23 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तेईसवाँ अध्याय काशीविश्वेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्यके प्रसंगमें काशीमें मुक्तिक्रमका वर्णन ऋषि बोले— हे प्रभो ! हे सूतजी ! यदि वाराणसी महापुरी इतनी पवित्र है, तो आप उसका एवं अविमुक्त [ज्योतिर्लिंग]-का प्रभाव हमलोगोंसे कहिये ॥ १ ॥ सूतजी बोले— हे मुनीश्वरो… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 22 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इक्कीसवाँ अध्याय बाईसवाँ अध्याय परब्रह्म परमात्माका शिव-शक्तिरूपमें प्राकट्य, पंचक्रोशात्मिका काशीका अवतरण, शिवद्वारा अविमुक्त लिंगकी स्थापना, काशीकी महिमा तथा काशीमें रुद्रके आगमनका वर्णन सूतजी बोले— हे श्रेष्ठ ऋषिगण ! अब विश्वेश्वरके महापापनाशक माहात्म्यका वर्णन करूँगा, आपलोग सुनें । संसारमें यह… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 21 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इक्कीसवाँ अध्याय भीमशंकर ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति तथा उसके माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले — [ उसके बाद ] शिवजी भी अपने गणोंको साथ लेकर राजाके कल्याणकी कामनासे आदरपूर्वक वहाँ गये और उसकी रक्षाके लिये गुप्तरूपसे स्थित हो गये ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 20 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता बीसवाँ अध्याय भीमशंकर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य वर्णन-प्रसंग में भीमासुरके उपद्रवका वर्णन सूतजी बोल— [हे महर्षियो !] अब मैं भीमशंकरके माहात्म्यको कह रहा हूँ, जिसके सुननेमात्रसे मनुष्य सभी प्रकारके अभीष्टको प्राप्त कर लेता है ॥ १ ॥ कामरूप नामक देशमें लोकहितकी… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 19 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता उन्नीसवाँ अध्याय केदारेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्य एवं माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले- हे द्विजो ! विष्णुके नर-नारायण नामक जिन दो अवतारोंने भारत [ वर्षके अन्तर्गत भरत] खण्डमें स्थित बदरिकाश्रममें तप किया था, उनके द्वारा पूजनहेतु प्रार्थना किये जानेपर भक्तके वशीभूत होनेके… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 18 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता अठारहवाँ अध्याय ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन ऋषि बोले— हे महाभाग सूतजी ! आपने अपने भक्तजनोंकी रक्षा करनेवाले महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगकी अद्भुत कथा सुनायी ॥ १ ॥ हे ज्ञानियोंमें श्रेष्ठ ! अब कृपा करके ओंकारमें विद्यमान, समस्त पापोंको… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 17 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता सत्रहवाँ अध्याय महाकाल ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य—वर्णनके क्रममें राजा चन्द्रसेन तथा श्रीकर गोपका वृत्तान्त ऋषि बोले— हे महामते ! भक्तजनोंकी रक्षा करनेवाले महाकाल नामसे विराजमान ज्योतिर्लिंगके माहात्म्यका पुनः वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ सूतजी बोले – हे ब्राह्मणो ! भक्तोंकी रक्षा… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 16 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता सोलहवाँ अध्याय महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्यका वर्णन ऋषि बोले — हे सूतजी ! आप व्यासजीकी कृपासे सब कुछ जानते हैं; इन ज्योतिर्लिंगोंकी कथा सुनकर हमें तृप्ति नहीं हो रही है । अतः हे प्रभो ! हमलोगोंपर विशेषरूपसे अतुलनीय कृपा करके… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 15 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता पन्द्रहवाँ अध्याय मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति – कथा सूतजी बोले – [ हे ऋषियो ! ] इसके बाद मैं मल्लिकार्जुनकी उत्पत्तिका वर्णन करूँगा, जिसे सुनकर बुद्धिमान् भक्त सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त हो जाता है ॥ १ ॥ पहले मैंने कार्तिकेयके जिस… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 14 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता चौदहवाँ अध्याय सोमनाथ ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्तिका वृत्तान्त ऋषि बोले— [ हे सूतजी !] अब आप ज्योतिर्लिंगोंके माहात्म्य तथा उनकी उत्पत्तिका वर्णन कीजिये: जैसा आपने सुना है, वह सब बताइये ॥ १ ॥ सूतजी बोले – हे ब्राह्मणो ! मैं उनके… Read More