श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय कामदेव द्वारा नर-नारायण के समीप वसन्त ऋतु की सृष्टि, नारायण द्वारा उर्वशी की उत्पत्ति, अप्सराओं द्वारा नारायण से स्वयं को अंगीकार करने की प्रार्थना अप्सरां नारायणसमीपे प्रार्थनाकरणम् व्यासजी बोले — सर्वप्रथम उस पर्वत श्रेष्ठ गन्धमादन पर वसन्त… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय नर-नारायण की तपस्या से चिन्तित होकर इन्द्र का उनके पास जाना और मोहिनी माया प्रकट करना तथा उससे भी अप्रभावित रहने पर कामदेव, वसन्त और अप्सराओं को भेजना नरनारायणकथावर्णनम् व्यासजी बोले — हे नृपोत्तम! अब अधिक कहने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय व्यासजी द्वारा जनमेजय को माया की प्रबलता समझाना अधमजगतः स्थितिवर्णनम् राजा बोले — हे महाभाग ! इस आख्यान को सुनकर मैं बड़े आश्चर्य में पड़ गया हूँ। हे महामते ! यह संसार पाप का मूर्तरूप है। इसके… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय वसुदेव और देवकी के पूर्वजन्म की कथा दित्या अदित्यै शापदानम् व्यासजी बोले — [ हे राजन्!] भगवान् विष्णु के विभिन्न अवतार ग्रहण करने तथा इसी प्रकार सभी देवताओं के भी अंशावतार ग्रहण करने के बहुत से कारण… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय व्यासजी का जनमेजय को कर्म की प्रधानता समझाना कर्मणो जन्मादिकारणत्वनिरूपणम् सूतजी बोले — हे मुनियो ! ऐसा पूछे जाने पर पुराणवेत्ता, वाणीविशारद सत्यवती – पुत्र महर्षि व्यास ने शान्त स्वभाव वाले परीक्षित् – पुत्र जनमेजय से उनके… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय वसुदेव, देवकी आदि के कष्टों के कारण के सम्बन्ध में जनमेजय का प्रश्न जनमेजयप्रश्नाः जनमेजय बोले — हे वासवेय! हे मुनिवर ! हे सर्वज्ञाननिधे! हे अनघ ! हमारे कुल की वृद्धि करने वाले हे स्वामिन्! मैं [… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय श्रीराम और लक्ष्मण के पास नारदजी का आना और उन्हें नवरात्रव्रत करने का परामर्श देना, श्रीराम के पूछने पर नारदजी का उनसे देवी की महिमा और नवरात्रव्रत की विधि बतलाना, श्रीराम द्वारा देवी का पूजन और देवी… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उनतीसवाँ अध्याय सीताहरण, राम का शोक और लक्ष्मण द्वारा उन्हें सान्त्वना देना लक्ष्मणकृतरामशोकसान्त्वनम् व्यासजी बोले — रावण का कुविचारपूर्ण वचन सुनकर सीता भय से व्याकुल होकर काँप उठीं । पुनः मन को स्थिर करके उन्होंने कहा — हे पुलस्त्य… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अट्ठाईसवाँ अध्याय श्रीरामचरित्रवर्णन रामचरित्रवर्णनम् जनमेजय बोले — श्रीराम ने भगवती जगदम्बा के इस सुखप्रदायक व्रत का अनुष्ठान किस प्रकार किया, वे राज्यच्युत कैसे हुए और फिर सीता हरण किस प्रकार हुआ ? ॥ १ ॥ व्यासजी बोले — पूर्वकाल… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सत्ताईसवाँ अध्याय कुमारीपूजा में निषिद्ध कन्याओं का वर्णन, नवरात्रव्रत के माहात्म्य के प्रसंग में सुशील नामक वणिक् की कथा देवीपूजामहत्त्ववर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन्!] जो कन्या किसी अंग से हीन हो, कोढ़ तथा घावयुक्त हो, जिसके शरीर… Read More