श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-01 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय व्यासजी द्वारा त्रिदेवों की तुलना में भगवती की उत्तमता का वर्णन योगमायाप्रभाववर्णनम् ऋषिगण बोले — हे सूतजी ! आपने यह बहुत ही उत्तम कथा कही, जिसमें भगवान् श्रीकृष्ण के सर्वपापविनाशक तथा अलौकिक चरित्र का वर्णन है ॥… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-25 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-25 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-पञ्चविंशोऽध्यायः पचीसवाँ अध्याय व्यासजी द्वारा शाम्भवी माया की बलवत्ता का वर्णन, श्रीकृष्ण द्वारा शिवजी की प्रसन्नता के लिये तप करना और शिवजी द्वारा उन्हें वरदान देना पराशक्तेः सर्वज्ञत्वकथनम् राजा बोले — हे मुनिवर ! आपकी इस बात से तथा साक्षात्… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-24 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय श्रीकृष्णावतार की संक्षिप्त कथा, कृष्णपुत्र का प्रसूतिगृह से हरण, कृष्ण द्वारा भगवती की स्तुति, भगवती चण्डिका द्वारा सोलह वर्ष के बाद पुनः पुत्रप्राप्ति का वर देना देव्या कृष्णशोकायनोदनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन् ! ] प्रातः… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-23 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय कंस के कारागार में भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार, वसुदेवजी का उन्हें गोकुल पहुँचाना और वहाँ से योगमायास्वरूपा कन्या को लेकर आना, कंस द्वारा कन्या के वध का प्रयास, योगमाया द्वारा आकाशवाणी करने पर कंस का अपने सेवकों… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-22 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय देवकी के छः पुत्रों के पूर्वजन्म की कथा, सातवें पुत्र के रूप में भगवान् संकर्षण का अवतार, देवताओं तथा दानवों के अंशावतारों का वर्णन देवदानवानामंशावतरणवर्णनम् जनमेजय बोले — हे पितामह! उस बालक ने ऐसा कौन-सा पापकर्म किया… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-21 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-21 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-एकविंशोऽध्यायः इक्कीसवाँ अध्याय देवकी के प्रथम पुत्र का जन्म, वसुदेव द्वारा प्रतिज्ञानुसार उसे कंस को अर्पित करना और कंस द्वारा उस नवजात शिशु का वध कंसेन देवकीप्रथमपुत्रवधवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! इसके बाद समय आनेपर देवस्वरूपिणी देवकी ने… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-20 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-20 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-विंशोऽध्यायः बीसवाँ अध्याय व्यासजी द्वारा जनमेजय को भगवती की महिमा सुनाना तथा कृष्णावतार की कथा का उपक्रम कृष्णावतारकथोपक्रमवर्णनम् व्यासजी बोले — हे भारत ! सुनिये, अब मैं आपको पृथ्वी का भार उतारने और कुरुक्षेत्र तथा प्रभासक्षेत्र में योगमाया के द्वारा… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-19 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-19 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-एकोनविंशोऽध्यायः उन्नीसवाँ अध्याय देवताओं द्वारा भगवती का स्तवन, भगवती द्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुन को निमित्त बनाकर अपनी शक्ति से पृथ्वी का भार दूर करने का आश्वासन देना देवान् प्रति देवीवाक्यवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन्!] ऐसा कहने के उपरान्त… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-18 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-18 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-अष्टादशोऽध्यायः अठारहवाँ अध्याय पापभार से व्यथित पृथ्वी का देवलोक जाना, इन्द्र का देवताओं और पृथ्वी के साथ ब्रह्मलोक जाना, ब्रह्माजी का पृथ्वी तथा इन्द्रादि देवताओं सहित विष्णुलोक जाकर विष्णु की स्तुति करना, विष्णु द्वारा अपने को भगवती के अधीन बताना… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-17 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-चतुर्थ स्कन्धः-अध्याय-17 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-चतुर्थ: स्कन्धः-सप्तदशोऽध्यायः सत्रहवाँ अध्याय श्रीनारायण द्वारा अप्सराओं को वरदान देना, राजा जनमेजय द्वारा व्यासजी से श्रीकृष्णावतार का चरित सुनाने का निवेदन करना नारायणवरदानम् जनमेजय बोले — हे मुने! आप नर नारायण के आश्रम में आयी हुई अप्सराओं की चर्चा पहले ही… Read More