श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-26 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-26 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-षड्विंशोऽध्यायः छब्बीसवाँ अध्याय देवर्षि नारद और पर्वतमुनि का एक-दूसरे को शाप देना, राजकुमारी दमयन्ती का नारद से विवाह करने का निश्चय दमयन्तीविवाहप्रस्ताववर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन्!] तब परमार्थवेत्ता नारदजी मेरी बात सुनने के पश्चात् मोह का कारण पूछने… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-25 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-25 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-पञ्चविंशोऽध्यायः पचीसवाँ अध्याय पाण्डु और विदुर के जन्म की कथा, पाण्डवों का जन्म, पाण्डु की मृत्यु, द्रौपदी स्वयंवर, राजसूय यज्ञ, कपटद्यूत तथा वनवास और व्यासजी के मोह का वर्णन व्यासस्वकीयमोहवर्णनम् व्यासजी बोले — मेरी वह बात सुनकर वासवराजकुमारी सत्यवती चकित… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-24 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय धृतराष्ट्र के जन्म की कथा अम्बिकायाः नियोगात्पुत्रोत्पादनाय गर्भधारणवर्णनम् राजा बोले — हे भगवन्! आपके मुखारविन्द से निर्गत इस अमृततुल्य दिव्य कथारस का निरन्तर पान करते रहने पर भी मैं तृप्त नहीं हो पा रहा हूँ ॥ १… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-23 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय भगवती के सिद्धिप्रदायक मन्त्र से दीक्षित एकवीर द्वारा कालकेतु का वध, एकवीर और एकावली का विवाह तथा हैहयवंश की परम्परा एकवीरैकावल्योर्विवाहवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! उस यशोवती की बात सुनकर लक्ष्मीपुत्र प्रतापी एकवीर का मुखारविन्द… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-22 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय यशोवती का एकवीर से कालकेतु द्वारा एकावली के अपहृत होने की बात बताना हैहयैकवीराय यशोवत्यैकावलीमोचनाय देवीस्वप्नवर्णनम् यशोवती बोली — एक बार वह सुन्दरी एकावली प्रातः काल उठकर अपनी सखियों के साथ चल दी। वह बहुत-से रक्षकों से… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-21 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-21 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-एकविंशोऽध्यायः इक्कीसवाँ अध्याय आखेट के लिये वन में गये राजा से एकावली की सखी यशोवती की भेंट, एकावली के जन्म की कथा राजपुत्र्याः एकावल्याः वर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! तत्पश्चात् राजा हरिवर्मा ने बालक के जातकर्म आदि संस्कार… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-20 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-20 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-विंशोऽध्यायः बीसवाँ अध्याय राजा हरिवर्मा को भगवान् विष्णु द्वारा अपना हैहयसंज्ञक पुत्र देना, राजा द्वारा उसका ‘एकवीर’ नाम रखना एकवीराख्यानवर्णनम् जनमेजय बोले — [ हे मुनिवर ! ] मुझे इस विषय में यह महान् संशय हो रहा है कि भगवान्… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-19 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-19 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-एकोनविंशोऽध्यायः उन्नीसवाँ अध्याय भगवती लक्ष्मी को अश्वरूपधारी भगवान् विष्णु के दर्शन और उनका वैकुण्ठगमन पुत्रजन्मानन्तरं स्वस्वरूपेण वैकुण्ठगमनवर्णनम् व्यासजी बोले — उन लक्ष्मीजी को वरदान देकर भगवान् शंकर देवगणों से सेवित तथा अप्सराओं से सुशोभित रमणीक कैलास पर शीघ्र चले गये… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-18 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-18 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-अष्टादशोऽध्यायः अठारहवाँ अध्याय भगवती लक्ष्मी द्वारा घोड़ी का रूप धारणकर तपस्या करना शिवप्रसादेन लक्ष्मीद्वारा भगवत्याः समाराधनवर्णनम् जनमेजय बोले — [ हे मुने!] इस प्रकार कोप करके भगवान् के द्वारा शापित लक्ष्मीजी ने घोड़ी के रूप में किस प्रकार जन्म लिया… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-17 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-17 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-सप्तदशोऽध्यायः सत्रहवाँ अध्याय भगवती की कृपा से भार्गव ब्राह्मणी की जंघा से तेजस्वी बालक की उत्पत्ति, हैहयवंशी क्षत्रियों की उत्पत्ति की कथा हैहयैर्धनाहरणेन सह भृगूणां वधवर्णनम् जनमेजय बोले — भृगुवंश की स्त्रियों का पुनः दुःखरूप समुद्र से कैसे उद्धार हुआ… Read More