प्राणेश्वर श्रीकृष्ण मंत्र- “ॐ ऐं श्रीं क्लीं प्राण-वल्लभाय सौः सौभाग्यदाय श्रीकृष्णाय स्वाहा।” (22) विनियोगः- ॐ अस्य श्रीप्राणेश्वर-श्रीकृष्ण-मंन्त्रस्य भगवान् श्रीवेदव्यास ऋषिः, गायत्री छंदः, श्रीकृष्ण-परमात्मा देवता, क्लीं बीजं, श्रीं शक्तिः, ऐं कीलकं, ॐ व्यापकः, मम समस्त-क्लेश-परिहार्थं, चतुर्वर्ग-प्राप्तये, सौभाग्य-वृद्धयर्थं च जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्रीवेदव्यास ऋषये नमः शिरसि, गायत्री छंदसे नमः मुखे, श्रीकृष्ण-परमात्मा देवतायै नमः हृदि, क्लीं बीजाय नमः… Read More


सीता स्वयंवर में अयोध्या नरेश को आमंत्रण क्यों नहीं? राजा जनक के शासनकाल में एक व्यक्ति का विवाह हुआ। जब वह पहली बार सज-सँवरकर ससुराल के लिए चला, तो रास्ते में चलते-चलते एक जगह उसको दलदल मिला, जिसमें एक गाय फँसी हुई थी, जो लगभग मरने के कगार पर थी। उसने विचार किया कि गाय… Read More


कन्या विवाह हेतु प्रार्थना प्रस्तुत प्रार्थना माँ सीता ने भगवान् राम को पति रुप में पाने हेतु माँ पार्वती से किया था। पहले शुद्ध होकर दुर्गाजी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठे। फिर दुर्गा जी का भक्ति-भाव से अधीर होकर ‘पञ्चोपचार पूजन’ करे। पूजन के बाद प्रणाम करे- “ॐ श्रीदुर्गायै सर्व-विघ्न-विनाशिन्यै नमः।” पुनः हाथ… Read More


गण्डा देने का मन्त्र  “बन्ध तो बन्ध, मौला मुर्त्तजा अली का बन्ध, कीड़े और मकोड़े का बन्ध, ताप और तिजारी का बन्ध, जड़ी और बुखार का बन्ध, नजर और गुजर का बन्ध, दीठ और मूठ का बन्ध, कीए और कराए का बन्ध, भेजे और भीजाएका बन्ध, पैरों और हाथन का बन्ध, बन्ध तो बन्ध, मौला… Read More


परीक्षा में सफलता हेतु टोटके १॰ ब्राह्मी बूटी को गले में धारण करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा शिक्षा के प्रति एकाग्रता में भी वृद्धि होती है। २॰ विद्यार्थी को ऐसे स्थान पर बैठकर नहीं पढ़ना चाहिए, जहाँ पर बाहर की वायु का प्रवाह सीधे विद्यार्थी तक पहुँचता हो, अर्थात् द्वार एवं खिड़की के… Read More


भैरव वशीकरण मन्त्र १॰ “ॐ नमो रुद्राय, कपिलाय, भैरवाय, त्रिलोक-नाथाय, ॐ ह्रीं फट् स्वाहा।” विधिः- सर्व-प्रथम किसी रविवार को गुग्गुल, धूप, दीपक सहित उपर्युक्त मन्त्र का पन्द्रह हजार जप कर उसे सिद्ध करे। फिर आवश्यकतानुसार इस मन्त्र का १०८ बार जप कर एक लौंग को अभिमन्त्रित लौंग को, जिसे वशीभूत करना हो, उसे खिलाए।… Read More


तिलक महिमा स्नान एवं धौत वस्त्र धारण करने के उपरान्त वैष्णव ललाट पर ऊर्ध्वपुण्ड्र, शैव त्रिपुण्ड, गाणपत्य रोली या सिन्दूर का तिलक शाक्त एवं जैन क्रमशः लाल और केसरिया बिन्दु लगाते हैं। दिगम्बर जैन सम्प्रदाय में केसरिया तिलक तथा बौद्धों में श्वेताम्बर मतावलम्बियों के समान ही बिन्दु मस्तक पर धारण करते हैं। नारद पुराण में… Read More


तन्त्र शब्द के अर्थ बहुत विस्तृत हैं। यह शब्द ‘तन्’ और ‘त्र’ (ष्ट्रन) इन दो धातुओं से बना है, अतः “विस्तारपूर्वक तत्त्व को अपने अधीन करना”- यह अर्थ व्याकरण की दृष्टि से स्पष्ट होता है, जबकि ‘तन्’ पद से प्रकृति और परमात्मा तथा ‘त्र’ से स्वाधीन बनाने के भाव को ध्यान में रखकर ‘तन्त्र’ का… Read More


ॐ सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र ॐ गं गणपतये नमः। सर्व-विघ्न-विनाशनाय, सर्वारिष्ट निवारणाय, सर्व-सौख्य-प्रदाय, बालानां बुद्धि-प्रदाय, नाना-प्रकार-धन-वाहन-भूमि-प्रदाय, मनोवांछित-फल-प्रदाय रक्षां कुरू कुरू स्वाहा।। ॐ गुरवे नमः, ॐ श्रीकृष्णाय नमः, ॐ बलभद्राय नमः, ॐ श्रीरामाय नमः, ॐ हनुमते नमः, ॐ शिवाय नमः, ॐ जगन्नाथाय नमः, ॐ बदरीनारायणाय नमः, ॐ श्री दुर्गा-देव्यै नमः।। ॐ सूर्याय नमः, ॐ चन्द्राय नमः, ॐ… Read More


।। त्रैलोक्य मंगल सूर्य कवच।। ।।पूर्व पीठीका: श्री सूर्योवाच।। साम्ब साम्ब महाबाहो ! श्रृणु मे कवचं शुभम्। त्रैलोक्य मंगलं नाम, कवचं परमाद्भुतम्।। यद् ज्ञात्वा मन्त्र वित् सम्यक्, फलं निश्चितम्। यद् धृत्वा च महा देवो, गणानामधिपोऽभवत्।। पठनाद्धारणाद्विष्णुः, सर्वेषां पालकः सदा। एवमिन्द्रादयः सर्वे, सर्वैश्वर्यमवाप्रुवन्।। विनियोग:- ॐ अस्य श्रीसूर्य कवस्य ब्रह्मा ऋषि, अनुष्टुप छन्दः, सर्वदेव नमस्कृत श्रीसूर्योदेवता, यशारोग्य… Read More