रोग-पीड़ा निवारक टोटके रोग-पीड़ा निवारक टोटके १॰ यदि पर्याप्त उपचार करने पर भी रोग-पीड़ा शांत नहीं हो रही हो अथवा बार-बार एक ही रोग प्रकट होकर पीड़ित कर रहा हो तथा उपचार करने पर शांत हो जाता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने वजन के बराबर गेहूँ का दान रविवार के दिन करना चाहिए। गेहूँ का दान जरुरतमंद एवं… Read More
हनुमान लहरी श्री हनुमान लहरी दोहा गुरु पद पंकज धारि उर , सुर नर शीश नवाय । मारूत सुत बलवीर कहं , ध्यावत चित मन लाय ॥ प्रथम वन्दि सियराम पद , अवध नारि नर संग । वन्दौ चरण सुध्यान धरि , हनुमत कंचन रंग ॥ मन चित देइ सुनौ विनै , हौं तुम दीन दयाल ।… Read More
परीक्षा में सफलता, स्मरण-शक्ति-वर्द्धन प्रयोग परिक्षा में सफलता, स्मरण-शक्ति-वर्द्धन प्रयोग “एक-दन्त महा-बुद्धिः, सर्व-सौभाग्य-दायक। सर्व-सिद्धि-करो देवो, गौरी-पुत्र विनायकः।।” १॰ उक्त मन्त्र का जप ‘परीक्षा’ आरम्भ होने के १५ दिन पहले जो बुधवार हो, उस दिन से आरम्भ करे तथा परीक्षा का परिणाम निकलने तक नियमित करे।… Read More
श्रीवगला सिद्ध शाबर मन्त्र श्रीवगला सिद्ध शाबर मन्त्र (१) श्री वगलामुखी के निम्न मन्त्र का अयुत (दस सहस्त्र) जप करने से सिद्धि मिलती है। हल्दी, हड़ताल, मालकांगनी (ज्योतिष्मती) को कूट कर कटु-तैलाक्त निम्ब-काष्ठ, बदरी-काष्ठ या खदिर-काष्ठ की समिधा द्वारा नित्य अष्टोत्तर-शत हवन करें। अर्थात् दस माला मन्त्र-जप और एक माला से हवन किया करे। दस दिनों में अभीष्ट सिद्धि… Read More
आर्थिक समृद्धि के लिए अनुभूत प्रयोग आर्थिक समृद्धि के लिए अनुभूत प्रयोग १॰ सोमवार के दिन या दीपावली के दिन अशोक वृक्ष के पत्ता तोड़कर “ॐ नमो नारायणाय” जपते रहें। अशोक के पत्ते को गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी दही मिलाकर अनामिका अंगुली से वर्ग बनाकर वर्ग के बीच में “ह्रीं” लिखें। अगले सोमवार को पत्ता किसी पवित्र जगह पर… Read More
दया धर्म का मूल दया धर्म का मूल एक फ्रेंच लड़का रोलफेनस् जंगली जानवरों से, खास करके पक्षियों से बहुत प्रेम करता था । उसका सबसे अधिक प्यार था, आकाश में गाती हुई उड़ने वाली लवा (Skylark) नामक चिड़िया से । एक दिन वह रास्ते से जा रहा था, उसको लार्क का संगीत सुनाई पड़ा । उसने आस-पास देखा,… Read More
आत्म-ज्योति-साधना आत्म-ज्योति-साधना श्रीमद्-भगवद्-गीता में व्यवहार और अध्यात्म के प्रत्येक पक्ष का वर्णन है। दैनन्दिन जीवन में गीता उपयोगी मार्ग-दर्शन करती है। साधना-क्षेत्र में गीता सहज ही अग्रसर करती है। मन्त्र-शास्त्र की दृष्टि से गीता का प्रत्येक श्लोक दिव्य मन्त्र है। साहित्य तथा तत्त्व-ज्ञान में गीता श्रेष्ठ है। यहाँ मुमुक्षु जनों के लिए अति गोपनीय साधना पहली… Read More
मृत्य्वष्टकम् मृत्य्वष्टकम् ।। मार्कण्डेय उवाच ।। नारायणं सहस्राक्षं पद्मनाभं पुरातनम् । प्रणतोऽस्मि हृषीकेशं किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। १ गोविन्दं पुण्डरीकाक्षमनन्तमजमव्ययम् । केशवं च प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। २ वासुदेवं जगद्योनिं भानुवर्णमतीन्द्रियम् । दामोदरं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ३… Read More
मृत्युञ्जय कवच मृत्युञ्जय-कवच विनियोगः ॐ अस्य मृत्युञ्जयकवचस्य वामदेव ऋषिः गायत्रीछन्दः मृत्युञ्जयो देवता साधकाभीष्टसिद्धयर्थं जपे विनियोग। ऋष्यादि-न्यासः वामदेव ऋषये नमः शिरसि, गायत्रीछन्दसे नमः मुखे, मृत्युञ्जयो देवतायै नमः हृदि, साधकाभीष्टसिद्धयर्थं जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे। करहृदयादि-न्यासः- ॐ जूं सः (इस मन्त्र से सभी न्यास करें) ध्यानः हस्ताभ्यां कलश-द्वयामृत-रसैराप्लावयन्तं शिरो, द्वाभ्यां तौ दधतं मृगाक्ष-वलये द्वाभ्यां वहन्तं परम्। अङ्क-न्यस्त-कर-द्वयामृत-घटं कैकाश-कान्तं शिवम्, स्वच्छाम्भोज-गतं… Read More
मृत-सञ्जीवनी-कवचम् श्रीमहादेव-प्रोक्तं-मृत-सञ्जीवनी-कवचम् ।। पूर्व-पीठिका ।। एवमाराध्य गौरीशं देवं मृत्युञ्जयमहेश्वरं । मृतसञ्जीवनं नाम्ना कवचं प्रजपेत् सदा ॥१॥ सारात् सार-तरं पुण्यं गुह्याद्गुह्यतरं शुभं । महादेवस्य कवचं मृतसञ्जीवनामकं ॥ २॥ समाहित-मना भूत्वा श्रृणुष्व कवचं शुभं । श्रृत्वैतद्दिव्य कवचं रहस्यं कुरु सर्वदा ॥३॥ विनियोगः- ॐ अस्य श्रीमृतसञ्जीवनीकवचस्य श्री महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमृत्युञ्जयरुद्रो देवता ॐ बीजं, जूं शक्तिः, सः कीलकम्… Read More