नाथ सम्प्रदाय नाथ शब्द अति प्राचीन है । अनेक अर्थों में इसका प्रयोग वैदिक काल से ही होता रहा है । नाथ शब्द नाथृ धातु से बना है, जिसके याचना, उपताप, ऐश्वर्य, आशीर्वाद आदि अर्थ हैं – “नाथृ नाथृ याचञोपता-पैश्वर्याशीः इति पाणिनी” । अतः जिसमें ऐश्वर्य, आशीर्वाद, कल्याण मिलता है वह “नाथ” है । ‘नाथ’… Read More


श्री नवनाथ वन्दनाष्टकम् वन्दे श्री आदिनाथं शिव गुरु मुदयाख्योमया युक्तमादौ । ब्राह्मण सत्यनाथं तदनु दनुकुलध्वंसि सन्तोषनाथम् ।।… Read More


श्रीनव-नाथ साम्प्रदायिक पूजा-विधान यह पूजा किसी भी गुरुवार या पूर्णिमा को की जा सकती है। इसके लिए ‘वरुथिनी एकादशी, का दिन अत्यन्त शुभ है। इसी दिन भगवान् गोरखनाथ का जन्म हुआ था। पहले प्रातः शीघ्र उठकर स्नान करें। फिर बरगद, उदुम्बर व पीपल वृक्षों की उत्तर दिशा की १-१ डाली (८-९ इंच लम्बी) ले आएँ।… Read More


श्रीनाथजी बालाष्टक ॐ गुरुजी । प्रथमं सुमिरण गुरुजी का करलो हृदय में ज्ञान प्रकाशितं, श्री आदि योग युगादि ब्रह्म सवेते शिव शंकर, श्री बाले गोरक्ष चरण नमाम्यहम् । जियो जति गोरक्ष चरण प्रणाम्यहम् । ॐ गुरुजी । बालयति गुरु ब्रह्मज्ञानी घट ही में ज्योति प्रकाशितम् । उदत भानु हसंत कमला, श्री बाले गोरक्ष चरणं प्रणाम्यहम्… Read More


शाबर-मन्त्र-साधना में गुरु-तत्त्व आदि-गुरु तो भगवान् सदाशिव ही हैं। उन्हीं के अवतार-स्वरुप ‘नव-नाथ’ ही ‘शाबर-मन्त्र-विज्ञान’ के प्रचारक लौकिक गुरु माने गये हैं। इन नाथों के सम्बन्ध में निम्न पद्यात्मक साहित्य का मनन अपेक्षित है। १॰ नव-नाथ-माला ‘आदि-नाथ’ महेश आकाश-रुप छाय रहे । ‘उदय-नाथ’ पार्वती पृथ्वी-रुप भाए हैं । ‘सत्य-नाथ’ ब्रह्मा जी जिनका है जल-रुप ।… Read More


श्री-बृहत्-महा-सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्रम् ॥शिव उवाच॥ शृणु देवि! प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिका-स्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्र-प्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत् ॥ 1 ॥ न कवचं नार्गला तु, कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं नापि ध्यानं च, न न्यासो न च वाऽर्चनम् ॥ 2 ॥ कुञ्जिका-पाठ-मात्रेण, दुर्गा-पाठ-फलं लभेत्। अति गुह्यतरं देवि! देवानामपि दुर्लभम् ॥ 3 ॥ गोपनीयं प्रयत्‍‌नेन, स्वयोनिरिव पार्वति! मारणं मोहनं वश्यं, स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।… Read More


ब्रह्म-गीता ।।चौपाई।। सर्वात्मा रुप जो जाना। है सोई ब्रह्म-देव कर ध्याना।। बाहर भीतर पूरण देखै। सोइ आवाहन तासु विशेषै।। सर्वाधार जानिवो जोई। ब्रह्म-देव हित आसन सोई।। स्वच्छ जानिबो अर्ध अनूपा। जानै शुद्ध आचमन-रुपा।। निर्मल जानब सोइ अस्नाना। चिश्वात्मा वसन परिधाना।। है निर्गन्ध सुगन्ध सुहाई। निर्वासना सुमन सुख-दाई।। निर्गुण जानब धूप समीपा। स्वयं प्रकाश-मान सोइ दीपा।।… Read More


शाबर मन्त्र विज्ञान शाबर मन्त्रों का आशयः- स्व॰ वामन शिवराम आप्टे ने सन् १९४२ ई॰ में अपने ‘संस्कृत-कोष’ में ‘शाबर’ शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रकार दी है; ‘शब (व)-र-अण्-शाबरः, शावरः, शाबरी।’ अर्थ में ‘जंगली जाति’ या ‘पर्वतीय’ लोगों द्वारा बोली जानीवाली ‘भाषा’ बताया गया है। वह एक प्रकार का मन्त्र भी है, इसका वहाँ कोई… Read More


बन्दी-मोचन-मन्त्र-प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य बन्दी-मोचन-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीकण्व ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, श्रीबन्दी-देवी देवता, ह्रीं वीजं, हूं कीलकं, मम-बन्दी-मोचनार्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- श्रीकण्व ऋषये नमः शिरसि, त्रिष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीबन्दी-देवी देवतायै नमः हृदि, ह्रीं वीजाय नमः गुह्ये, हूं कीलकाय नमः नाभौ, मम-बन्दी-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे । मन्त्रः-… Read More


अक्ष-मालिकोपनिषद् ‘अक्ष-माला’ के भेद, लक्षण, सूत्र एवं प्रतिष्ठा विधिः शान्ति पाठः ॐ । ‘वाक्’ मेरे मन में प्रतिष्ठित हो। ‘मन’ मेरी वाणी में प्रतिष्ठित हो। हे स्वयं-प्रकाश ‘आत्मा’ ! मेरे सम्मुख तुम प्रकट हो। हे ‘वाक्’ और ‘मन’ तुम दोनों ही वेद-ज्ञान के लिए मेरे आधार बनो। तुम मेरे वेदाभ्यास का नाश न करो। मैं… Read More