मेधा सूक्त ॥ मेधा सूक्त ॥ यजुर्वेद के ३२वें अध्याय में मेधा-प्राप्ति के कुछ मन्त्र पठित हैं, जो मेधा-परक होने से ‘मेधा-सूक्त’ कहलाते हैं । ‘मेधा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है – धारणा शक्ति (Judgeent Power), प्रज्ञा (WisefulL, Intellect), बुद्धि आदि । मेधा-शक्ति-सम्पन्न व्यक्ति ही ‘मेधावी’ (Intelligent, Brilliant) कहलाता है । ‘मेधा’ बुद्धि की एक शक्ति-विशेष है… Read More
लक्ष्मी – नाम मन्त्र द्वारा हवन ‘श्रीलक्ष्मी’- नाम मन्त्र द्वारा हवन – पूर्व-मुख होकर आसन पर बैठे और अपने पास गन्ध, पुष्प, अक्षत, समानान्यार्घ्य-जल, कुश, काष्ठ आदि पूजन सामग्री रखें । – कुश से काष्ठ आदि सकल सामग्री का मार्जन करें । – भूमि को गो-मय और जल से लीपे । – तीन बार ‘मूल-मन्त्र’ अथवा “श्रीं” – एकाक्षर बीज का… Read More
श्रीललिता-महा-लक्ष्म्याः स्तोत्रम् श्रीललिता-महा-लक्ष्म्याः स्तोत्रम् वैष्णव-सम्प्रदाय के प्रसिद्ध ग्रन्थ “लक्ष्मी-नारायण-संहिता” से उद्धृत निम्न स्तोत्र शक्ति-साधना से सम्बन्धित है । वैष्णव ग्रन्थ होने के कारण इनकी साधना-प्रणाली ‘वैष्णवाचार’-परक है ।… Read More
श्री महा-नवार्ण-मन्त्र साधन-विधि श्री महा-नवार्ण-मन्त्र साधन-विधि गायत्रीः- “ॐ हूं घोर-रावायै विद्महे मुण्ड-मालिन्यै धीमहि तन्नो चामुण्डा प्रचोदयात् ।” विनियोगः- ॐ अस्य श्रीमहा-नवार्ण-मन्त्रस्य श्रीत्रिशिरात्मक ऋषिः, गायत्र्युष्णिगनुष्टुभः छन्दांसि, श्रीमहाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती-त्रिशक्ति-चामुण्डा देवता, ऐं बीजं, ह्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकं, मोक्षार्थे विनियोगः।… Read More
नव-ग्रह यन्त्र नव-ग्रह यन्त्र १५ सूर्य-यन्त्र १८ चन्द्र-यन्त्र २१ मंगल-यन्त्र ६ १ ८ ७ २ ९ ८ ३ १० ७ ५ ३ ८ ६ ४ ९ ७ ५ २ ९ ४ ३ १० ५ ४ ११ ६ २४ बुध-यन्त्र २७ गुरु-यन्त्र ३० शुक्र-यन्त्र ९ ४ ११ १० ५ १२ ११ ६ १३ १० ८ ६ ११ ९… Read More
नवग्रह शांतिदायक टोटके नवग्रह शांतिदायक टोटके सूर्यः- १॰ सूर्यदेव के दोष के लिए खीर का भोजन बनाओ और रोजाना चींटी के बिलों पर रखकर आवो और केले को छील कर रखो । २॰ जब वापस आवो तभी गाय को खीर और केला खिलाओ । ३॰ जल और गाय का दूध मिलाकर सूर्यदेव को चढ़ावो। जब जल चढ़ाओ, तो… Read More
कीड़े से महर्षि मैत्रेय कीड़े से महर्षि मैत्रेय भगवान् व्यास सभी जीवों की गति तथा भाषा को समझते थे । एक बार जब वे कहीं जा रहे थे, तब रास्ते में उन्होंने एक कीड़े को बड़े वेग से भागते हुए देखा । उन्होंने कृपा करके कीड़े की बोली में ही उससे इस प्रकार भागने का कारण पूछा । कीड़े… Read More
माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र १॰ यह साधना अर्द्ध-रात्रि में, पश्चिम-दिशा की ओर मुख कर, कुशासन के ऊपर रक्त-कम्बल तथा उसके ऊपर पीत रेशमी वस्त्र बिछाकर, उस पर बैठकर करनी चाहिए । पहले आचमन-पूर्वक आसन-शुद्धि-मन्त्र द्वारा आसन शुद्ध करे ।… Read More
लक्ष्मी-नारायण-वज्र-पञ्जर-कवच श्रीलक्ष्मी-नारायण-वज्र-पञ्जर-कवच ।।पूर्व-पीठिका-श्रीभैरव उवाच।। अधुना देवि ! वक्ष्यामि, लक्ष्मी-नारायणस्य ते । कवचं मन्त्र-गर्भं च, वज्र-पञ्जरकाख्यया ।।१ श्रीवज्र-पञ्जरं नाम, कवचं परमाद्भुतम । रहस्यं सर्व-देवानां, साधकानां विशेषतः ।।२ यं धृत्वा भगवान् देवः, प्रसीदति परः पुमान् । यस्य धारण-मात्रेण, ब्रह्मा लोक-पितामहः ।।३ ईश्वरोऽहं शिवो भीमो, वासवोऽपि दिवस्पतिः । सूर्यस्तेजो-निधिर्देवि ! चन्द्रमास्तारकेश्वरः ।।४ वायुश्च बलवांल्लोके, वरुणो यादसांपतिः । कुबेरोऽपि धनाध्यक्षो,… Read More
श्रीमहागणपति-वज्रपञ्जर-कवच श्रीमहागणपति-वज्रपञ्जर-कवच ॥ पूर्व-पीठिका-श्रीभैरव उवाच ॥ महा-देवि गणेशस्य, वरदस्य महात्मनः । कवचं ते प्रवक्ष्यामि, वज्र-पञ्जरकाभिधम् ॥ विनियोगः- अस्य श्रीमहा-गणपति-वज्र-पञ्जर-कवचस्य शऽरीभैरव ऋषिः, गायत्र्यं छन्दः, श्रीमहा-गणपतिः देवता, गं बीजं, ह्रीं शक्तिः, कुरु-कुरु कीलकं, वज्र-विद्यादि-सिद्धयर्थे महा-गणपति-वज्र-पञ्जर-कवच-पाठे-विनियोगः।… Read More