रामकथा साहित्य का पर्यवेक्षण रामकथा साहित्य का पर्यवेक्षण रामयुग के सम्बन्ध में जानकारी का आधिकारिक स्रोत यद्यपि “वाल्मीकि रामायण” है, तथापि रामकथा का वर्णन न केवल संस्कृत साहित्य, वरन् भारत की अन्य भाषाओं के साहित्य में भी हुआ है, साथ ही अन्य देशों में भी रामकथा का प्रचलन मिलता है ।… Read More
पवनपुत्र प्रश्नावली पवनपुत्र प्रश्नावली इच्छुक मनुष्य इस प्रश्नावली के माध्यम से अपने प्रश्न का फल जानना चाहे तो केवल “मंगलवार” या “शनिवार” के दिन ही इस प्रश्नावली का प्रयोग करें । प्रयोग से पूर्व श्रीहनुमानजी का स्मरण करते हुए निम्न दोहे का उच्चारण करें “विघ्न हरण मंगल करन, पूरन पुण्य प्रकाशि । नाम लेत हनुमंत को, सभी… Read More
पितृ-आकर्षण मन्त्र पितृ-आकर्षण मन्त्र (कभी-कभी पितृ-पीड़ा से मनुष्य का जीवन दुःख-मय हो जाता है। निर्धारित कार्यों में बाधा, विफलता की प्राप्ति होती है। आकस्मिक दुर्घटनाएँ घटती है। पूरा कुटुम्ब दुःखी रहता है। ऐसी दशा में निम्नलिखित ‘प्रयोग’ करे। यह ‘प्रयोग’ निर्दोष है। पितृ-पीड़ा हो या न हो, सभी प्रकार की बाधाएँ नष्ट हो जाती है और सुख-शान्ति… Read More
पितृ-स्तोत्रम् पितृ-स्तोत्रम् रूचिरूवाच नमस्येऽहं पितृन् श्राद्धे ये वसन्त्यधिदेवताः । देवैरपि हि तर्प्यंते ये च श्राद्धैः स्वधोत्तरैः ।।1।। नमस्येऽहं पितृन्स्वर्गे ये तर्प्यन्ते महर्षिभिः । श्राद्धेर्मनोमयैर्भक्तया भुक्ति-मुक्तिमभीप्सुभिः ।।2।। नमस्येऽहं पितृन्स्वर्गे सिद्धाः संतर्पयन्ति यान् । श्राद्धेषु दिव्यैः सकलै रूपहारैरनुत्तमैः ।।3।।… Read More
पितृ-यज्ञः वार्षिक श्राद्ध पितृ-यज्ञः वार्षिक श्राद्ध हिन्दू धर्म-ग्रन्थों के अनुसार प्रत्येक गृहस्थ हिन्दू को पाँच यज्ञों को अवश्य करना चाहिए- १॰ ब्रह्म-यज्ञ – प्रतिदिन अध्ययन और अध्यापन करना ही ब्रह्म-यज्ञ है। २॰ पितृ-यज्ञ – ‘श्राद्ध’ और ‘तर्पण’ करना ही पितृ-यज्ञ है। ३॰ देव-यज्ञ – देवताओं की प्रसन्नता हेतु पूजन-हवन आदि करना। ४॰ भूत-यज्ञ – ‘बलि’ और ‘वैश्व देव’… Read More
स्वास्थ्य के लिये टोटके स्वास्थ्य के लिये टोटके 1॰ सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती… Read More
ज्येष्ठा देवी (द्ररिद्रा देवी) का अवतरण ज्येष्ठा देवी (द्ररिद्रा देवी) का अवतरण सनत्कुमार-संहिता के कार्तिक माहात्म्य में भगवान सूर्य ने बताया है कि जब द्वापर के अन्त में देवता और दानवों ने भगवान विष्णु और राजा बलि आदि के साथ समुद्र-मन्थन किया तो उस समय मन्दराचल को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया। पाँच वर्षों तक मन्थन किया गया… Read More
प्रभु श्रीराम की अनुकम्पा पाने का मन्त्र मन्त्र रामायण प्रभु श्रीराम की अनुकम्पा पाने का मन्त्र ” बन्दउँ नाम राम रघुबर को । हेतु कृसानु भानु हिमकर को ।।”… Read More
प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र मन्त्र रामायण प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र “मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ई गिरिवर गहन । जासु कृपा सो दयाल, द्रवहु सकल कलिमल-दहन ।।”… Read More
माँ बगलामुखी माँ बगलामुखी हेम रुचिर पट पीत सरोवर, प्रकटित धन्य स्व-नाम । मन्त्र-मयी बगलामुखि वैष्णवि, शक्ति सबल बल-धाम ।। ऊपर गगन हकार धराधर, धरणी बीज ललाम । बिन्दु-मयी बगला पीठेश्वरि, ह्रींकारेश्वरि-धाम ।।… Read More