स्वर विज्ञान प्राण वायु मनुष्य के शरीर में श्वास लेने पर नासिका के माध्यम से प्रवेश करती है। नासिका में दो छिद्र होते हैं, जो बीच में एक पतली हड्डी के कारण एक दूसरे से अलग रहते हैं। मनुष्य कभी दाहिने छिद्र से और कभी बाँएँ छिद्र से श्वास लेता है। दाहिने छिद्र से श्वास… Read More


रमल से जानें अपने अभीष्ट प्रश्नों का हल स्नानादि से निवृत्त होकर अपने इष्टदेव का ध्यान करें तथा निम्न मन्त्र का यथासंभव या १०८ बार जप करें- “ॐ नमो भगवति देवी कूष्माण्डिनि सर्वकार्यप्रसाधिनि सर्वनिमित्तप्रकाशिनि एहि एहि त्वर त्वर वरं देहि लिहि मातंगिनि लिहि सत्यं ब्रूहि ब्रूहि स्वाहा।।” मन्त्र जप के पश्चात अपने अभीष्ट प्रश्न का… Read More


टोटके 1. जन्मकुंडली में यदि ग्यारहवें घर में शनि हो, तो मुख्य द्वार की चौखट बनाने से पहले उसके नीचे चन्दन दबा दें, सुख-समृद्धि से घर सुशोभित रहेगा। 2. भवन निर्माण से पहले भूखंड पर पांच ब्राह्मणों को भोजन करना बहुत शुभ होता है। इससे घर में धन, ऐश्वर्य व सुखों का वास होता है।… Read More


सिद्ध बीसा-यन्त्र प्रयोग विधि “बीसा-यन्त्र” अष्ट-गन्ध (सफेद चन्दन, रक्त चन्दन, अगर काष्ठ, कपूर, केसर, शुद्ध कस्तूरी, कुष्ठ, गोरोचन) से तैयार मसी (स्याही) से लिखा जाता है। यन्त्र लिखने के लिए शुभ (गुरु-पुष्य या रविपुष्य) योग में विधिवत तैयार अनार की कलम से भोजपत्र या रेशमी वस्त्र पर लिखें। बीसा यन्त्र लिखने के बाद बची स्याही… Read More


देवी कवच विनियोग – ॐ अस्य श्रीदेव्या: कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी: देवता, ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं अंग-न्यस्ता देव्य: शक्तय:, ऐं ह्स्रीं ह्रक्लीं श्रीं ह्वर्युं क्ष्म्रौं स्फ्रें बीजानि, श्रीमहालक्ष्मी-प्रीतये सर्व रक्षार्थे च पाठे विनियोग:।… Read More


श्रीनायिका कवचम् ।। श्री उन्मत्त-भैरव उवाच ।। श्रृणु कल्याणि ! मद्-वाक्यं, कवचं देव-दुर्लभं । यक्षिणी-नायिकानां तु, संक्षेपात् सिद्धि-दायकं ।। हे कल्याणि ! देवताओं को दुर्लभ, संक्षेप (शीघ्र) में सिद्धि देने वाले, यक्षिणी आदि नायिकाओं के कवच को सुनो –… Read More


श्रीदुर्गा आसुरी-कल्प विनियोगः- ॐ आसुरी-मन्त्रस्य, अंगिरा ऋषिः, विराट् छन्दः, श्रीदुर्गा आसुरी देवता, ॐ वीजं, स्वाहा शक्तिः, वशीकरणे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- अंगिरा ऋषये नमः शिरसि, विराट् छन्दसे नमः मुखे, श्रीदुर्गा आसुरी देवतायै नमः हृदि, ॐ वीजाय नमः गुह्ये, स्वाहा शक्तये नमः पादयो, वशीकरणे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।… Read More


अत्यधिक कष्ट-शान्ति के लिए श्रीवन-दुर्गा मन्त्र-विधान सङ्कल्पः- देश-कालौ स्मृत्वा अमुक-गोत्रोऽमुक-शर्माहं अमुक-कार्य-सिद्धयर्थे (मनोऽभिलषित-कार्य-सिद्धयर्थे वा) श्रीवन-दुर्गा-मन्त्रस्य एकादश-शत-संख्यक-जपं करिष्ये । विनियोगः- ॐ अस्य श्रीवन-दुर्गा-देवता-मन्त्रस्य श्रीआरण्यक ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीवन-दुर्गा देवता, ॐ वीजं, स्वाहा शक्तिः, सङ्कल्पोद्दिष्ट-कार्य-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More


श्री वाराही कवचम् विनियोगः- ॐ अस्य श्रीवाराही-कवच-मन्त्रस्य श्रीत्रिलोचन-ऋषिः, अनुष्टुप्-छन्दः, श्रीआदि-वाराही-देवता, ग्लैं वीजं, स्वाहा शक्तिः, ऐं कीलकं, अभीष्ट-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- श्रीत्रिलोचन-ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप्-छन्दसे नमः मुखे, श्रीआदि-वाराही-देवतायै नमः हृदि, ग्लैं वीजाय नमः गुह्ये, स्वाहा शक्तये नमः नाभौ, ऐं कीलकाय नमः पादयो, अभीष्ट-सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।… Read More


श्री वाराही मन्त्र प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीवाराही मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, सकल-वशीकरणार्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- ब्रह्मा ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, सकल-वशीकरणार्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।… Read More