॥ शरभहृदय स्तोत्रम् ॥ किसी भी देवता का हृदय मित्र के समान कार्य करता है, शतनाम अंगरक्षक के समान एवं सहस्रनाम सेना के समान रखा करता है अत: इनका अलग-अलग महत्व है । भूमिका के अनुसार समुन्द्र मंथन के समय विष्णु ने शरभ हृदय की २१ आवृति ३ मास तक की तब शरभराज प्रकट ने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय दस प्रकार की सृष्टि का वर्णन विदुरजी ने कहा — मुनिवर ! भगवान् नारायण के अन्तर्धान हो जानेपर सम्पूर्ण लोकों के पितामह ब्रह्माजी ने अपने देह और मन से कितने प्रकार की सृष्टि उत्पन्न की ?… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय ब्रह्माजी द्वारा भगवान् की स्तुति ब्रह्माजी ने कहा — प्रभो ! आज बहुत समय के बाद मैं आपको जान सका हूँ । अहो ! कैसे दुर्भाग्य की बात है कि देहधारी जीव आपके स्वरूप को नहीं… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय ब्रह्माजी की उत्पत्ति श्रीमैत्रेयजी ने कहा — विदुरजी ! आप भगवद्भक्तों में प्रधान लोकपाल यमराज ही हैं; आपके पूरुवंश में जन्म लेने के कारण वह वंश साधुपुरुषों के लिये भी सेव्य हो गया है । धन्य… Read More


॥ श्रीआकाशभैरव चित्रमाला मंत्र ॥ आकाशभैरव से तात्पर्य रुद्रावतार भगवान् शरभ शालुव पक्षिराज से है । शत्रूनाश हेतु यह प्रयोग किया जाता है । गुरु स्मरण एवं इष्ट-देवता-पूजन कर निम्न मन्त्र का १०८ बार पाठ करें अथवा शरभ पूजन उपरांत एक बार पाठ करे । इससे सभी कार्य सिद्ध होते हैं । साधारण कार्यों हेतु… Read More


॥ अथ शरभ मालामन्त्रम् ॥ माला विनियोग मंत्रः- अस्य मंत्रस्य कालाग्नि रुद्र ऋषिः अति जगती छन्दः श्री शरभेश्वरो देवता, खं बीजं , स्वाहा शक्तिः:, फट् कीलकं चतुर्विध पुरूषार्थ सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ॥ ध्यानम् ॥ चन्द्रार्काग्निस्त्रिदृष्टि कुलिशवरनखश्चञ्चलोऽत्युग्र जिह्वः । काली दुर्गा च पक्षौ हृदय जठरगो भैरवो वाडवाग्निः ॥ ऊरूस्थौ-व्याधिमृत्युशरभवरखगरचश्चण्ड – वातातिवेगः । संहर्ता-सर्वशत्रून स जयति… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय विदुरजी के प्रश्न श्रीशुकदेवजी कहते हैं — मैत्रेयजी का यह भाषण सुनकर बुद्धिमान् व्यासनन्दन विदुरजी ने उन्हें अपनी वाणी से प्रसन्न करते हुए कहा ॥ १ ॥ विदुरजी ने पूछा — ब्रह्मन् ! भगवान् तो शुद्ध… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय विराट् शरीर की उत्पत्ति श्रीमैत्रेय ऋषि ने कहा — सर्वशक्तिमान् भगवान् ने जब देखा कि आपस में संगठित न होने के कारण ये मेरी महतत्त्व आदि शक्तियां विश्व-रचना के कार्य में असमर्थ हो रही हैं, तब… Read More


शत्रु को परास्त करने का मन्त्र विधिः- उक्त मन्त्र के दो प्रकार के अनुष्ठान हैं — १ छोटा, २ बड़ा । छोटा अनुष्ठान १० दिनों का है, बड़ा अनुष्ठान एक वर्ष का । इन अनुष्ठानों से शत्रु का पराभव होता है । शत्रु को परास्त करने और उस पर विजय प्राप्त करने के लिए यह… Read More


मामदा (महम्मदा) वीर की साधना – शत्रु को घोर कष्ट  विधिः- किसी भी ग्रहणकाल में मन्त्र को सिद्ध कर ले । बाद में जब मन्त्र से काम लेना हो, तब जल-नदी या तालाब के पास जाए । नागरबेल के बड़े ‘पान’ में, जो पूजा में प्रयोग किया जाता है । थोड़ा-सा ‘अबीर’ रखकर उसे ‘गूगल’… Read More