॥ श्रीजानकीजीवनाष्टकम् ॥ [‘श्रीजानकीजीवनाष्टकम्’ अज्ञातकर्तृक एक अत्यन्त भावपूर्ण प्राचीन स्तोत्र है । वस्तुतः अध्यात्मरामायण की विषयवस्तु पर आधारित इस स्तोत्र के प्रारम्भिक सात श्लोक क्रमशः उसके सात काण्ड का साररूप हैं तथा अन्तिम श्लोक उपसंहाररूप है । इस स्तोत्र का पाठ करने से अध्यात्मरामायण की सम्पूर्ण विषयवस्तु का साररूप पुण्यस्मरण मानसपटल पर सहज अंकित हो… Read More


दारुब्रह्म (भगवान् जगन्नाथ )-का प्राकट्य-रहस्य एक समय श्रीधाम द्वारका में भगवान् श्रीकृष्णचन्द्र रात्रिकाल में श्रीरुक्मिणी, सत्यभामा प्रभृति प्रधान अष्ट-राजमहिषियों के मध्य शयन कर रहे थे । स्वप्नावस्था में आप अकस्मात् ‘हा राधे! हा राधे !’ उच्चारण करते हुए क्रन्दन करने लगे । जब अन्य किसी प्रकार प्रभु का क्रन्दन नहीं रुका, तब बाध्य होकर महारानी… Read More


॥ अथर्ववेदीया श्रीराधिकातापनीयोपनिषत् ॥ [ श्रुतियों द्वारा श्रीराधिकाजी की अपरिमित महिमा की प्रतिपादक स्तुति] “ब्रह्मवादिनो वदन्ति, कस्माद्राधिकामुपासते आदित्योऽभ्यद्रवत् ॥ १ ॥ श्रुतय ऊचुः— सर्वाणि राधिकाया दैवतानि सर्वाणि भूतानि राधिकायास्तां नमामः ॥ २ ॥ देवतायतनानि कम्पन्ते राधाया हसन्ति नृत्यन्ति च सर्वाणि राधादैवतानि । सर्वपापक्षयायेति व्याहृतिभिर्हुत्वाथ राधिकायै नमामः ॥ ३ ॥ भासा यस्याः कृष्णदेहोऽपि गौरो जायते देवस्येन्द्रनीलप्रभस्य… Read More


॥ ऋग्वेदीया श्रीराधोपनिषत् ॥ [ भगवत्स्वरूपा श्रीराधिकाजी की महिमा तथा उनका स्वरूप ] “ओमथोर्ध्व मन्थिन ऋषयः सनकाद्या भगवन्तं हिरण्यगर्भमुपासित्वोचुः देव कः परमो देवः, का वा तच्छक्तयः, तासु च का वरीयसी भवतीति सृष्टिहेतुभूता च केति । स होवाच — हे पुत्रकाः शृणुतेदं ह वाव गुह्याद् गुह्यतरमप्रकाश्यं यस्मै कस्मै न देयम् । स्निग्धाय ब्रह्मवादिने गुरुभक्ताय देयमन्यथा दातुर्महदघम्भवतीति… Read More


॥ राधोपनिषत् ॥ प्रथमः प्रपाठकः ॐ अथ सुषुप्तौ रामः स्वबोधमाधायेव किं मे देवः ? क्वासौ कृष्णो योऽयं मम भ्रातेति ? तस्य का निष्ठा ब्रूहीति । सा वै ह्युवाच । राम शृणु-भूर्भुवः स्वर्महर्जनस्तपः सत्यं तलं वितलं सुतलं रसातलं तलातलं महातलं पातालं एवं पञ्चाशत्कोटियोजनं बहुलं स्वर्णाण्डं ब्रह्माण्डमिति अनन्तकोटिब्रह्माण्डानामुपरि कारणजलोपरि महाविष्णोर्नित्यं स्थानं वैकुण्ठः ।… Read More


श्रीराधामाधव एवं उनके परिकरों आदि का परिचय (व्रज-लीला के सन्दर्भ में) श्रीकृष्ण एवं उनके लीला—सहचर पितामह — पर्जन्य। पितामही – वरीयसी। मातामह — सुमुख। मातामही – पाटला। ताऊ — उपनन्द एवं अभिनन्द। ताई — तुंगी (उपनन्द की पत्नी), पीवरी (अभिनन्द की पत्नी)। चाचा — सन्नन्द (सुनन्द) एवं नन्दन । चाची — कुवलया (सन्नन्द की पत्नी),… Read More


शाबर साधना रक्षा यदि ‘शरीर रक्षा’ का मन्त्र पढ़कर पहले से ही अपने शरीर को सुरक्षित कर लिया जाए, तो किसी मन्त्र-तंत्र का कोई प्रभाव शरीर पर नहीं होगा । यहां शरीर रक्षा, स्थान (आसन बंधन) एवं दिग बंधन से सम्बंधित मंत्रों का वर्णन है — प्रयोग 1 — नीचे लिखे मन्त्र को सबसे पहले… Read More


दरगाह-सिद्धि का शाबर मन्त्र विधि — आपत्ति, कष्ट, आपदा, विपदा, उपद्रव, बाधा, पीड़ा, तनाव – पूर्ण – स्थिति या धर्म-सङ्कट से बचने का कोई मार्ग न मिल रहा हो, तब इस ‘प्रयोग’ से ईप्सित शान्ति प्राप्त होती है । कई लोगों ने इस प्रयोग से अपने कष्टों का निवारण किया है । किसी भी पाक-साफ… Read More


शत्रु को परास्त करने का मुस्लिम शाबर मन्त्र Shabar Mantra For Enemy Overthrown विधि — निम्न मन्त्र के रिक्त स्थानों (—–) पर शत्रु का नाम लेवें । शत्रु के नाम के साथ उसकी माँ का नाम भी । उदाहरणार्थ, सलीम सलमा का बेटा या बेटी या सलमा का बेटा या बेटी सलीम, इस्लामी ‘मन्त्र’ का… Read More


संत श्री जलाराम बापा संत श्री जलाराम बापा एक हिन्दु संत थे । वे राम-भक्त थे । वे ‘बापा’ के नाम से प्रसिद्ध हैं । जलाराम बापा का जन्म सन्‌ 1799 (4 नवम्बर 1799 विक्रम सम्वत 1856, वीरपुर-(खेरडी राज्य) में गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव में हुआ था । ये लोहाणा क्षत्रियकुल में… Read More