श्रीराधास्तोत्रं ब्रह्मेशशेषादिकृतम् ॥ श्रीराधास्तोत्रं ब्रह्मेशशेषादिकृतम् ॥ ॥ अथ ब्रह्मेशशेषादिकृतम् श्रीराधास्तोत्रम् ॥ ॥ ब्राह्मोवाच ॥ षष्टिवर्षसहस्राणि दिव्यानि परमेश्वरि । पुष्करे च तपस्तप्तं पुण्यक्षेत्रे च भारते ॥ १ ॥ त्वत्पादपद्ममधुरमधुलुब्धेन चेतसा । मधुव्रतेन लोभेन प्रेरितेन मया सति ॥ २ ॥ तथापि न मया लब्धं त्वद्पादपदमीप्सितम् । न दृष्टमपि स्वप्नेऽपि जाता वागशरीरिणी ॥ ३ ॥… Read More
श्रीराधिका जगन्मङ्गलकवचम् ॥ श्रीराधिका जगन्मङ्गलकवचम् ॥ विनियोगः- “ॐ अस्य श्रीजगन्मङ्गलकवचस्य प्रजापतिऋषिर्गायत्री छन्दः स्वयं रासेश्वरी देवता श्रीकृष्णभक्तिसम्प्राप्तौ विनियोगः ॥ ॥ महेश्वर उवाच ॥ श्रीजगन्मङ्गलस्यास्य कवचस्य प्रजापतिः ॥ १ ॥ ऋषिश्छन्दोऽस्य गायत्री देवी रासेश्वरी स्वयम् । श्रीकृष्णभक्तिसम्प्राप्तौ विनियोगः प्रकीर्तितः ॥ २ ॥ शिष्याय कृष्णभक्ताय ब्राह्मणाय प्रकाशयेत् । शठाय परशिष्याय दत्त्वा मृत्युमवाप्नुयात् ॥ ३ ॥ राज्यं देयं शिरो देयं न… Read More
श्रीकृष्णकृतं श्रीराधास्तोत्रम् ॥ श्रीकृष्णकृतं श्रीराधास्तोत्रम् ॥ एक बार श्रीराधाजी मान करके श्रीकृष्ण के समीप से अन्तर्धान हो गयीं । तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव आदि सब देवता ऐश्वर्यभ्रष्ट, श्रीहीन, भार्यारहित तथा उपद्रवग्रस्त हो गये । इस परिस्थिति पर विचार करके उन सबने भगवान् भीकृष्ण की शरण ली । उनके स्तोत्र से संतुष्ट हुए सबके परमात्मा श्रीकृष्ण ने… Read More
श्रीराधायाः परिहार स्तोत्रम् ॥ श्रीराधायाः परिहार स्तोत्रम् ॥ श्री राधा का षडक्षर मन्त्र इस प्रकार है — “ॐ राधायै स्वाहा ॥” ॥ श्रीराधाजी का सामवेदोक्त ध्यान ॥ “श्वेतचम्पकवर्णाभां कोटिचन्द्रसमप्रभाम् । शरत्पार्वणचन्द्रास्यां शरत्पङ्कजलोचनाम् ॥ सुश्रोणीं सुनितम्बां च पक्वबिम्बाधरां वराम् ॥ मुक्तापङक्तिविनिन्द्यैकदन्तपङक्तिमनोहराम् । ईषद्धास्यप्रसन्नास्या भक्तानुग्रहकातराम् । वह्निशुद्धाशुकाधानां रत्नमालाविभूषिताम् ॥… Read More
भक्त गोस्वामी रघुनाथदास भक्त गोस्वामी रघुनाथदास श्रीरघुनाथदास का जन्म आज से लगभग चार सौ वर्ष पूर्वबंगाल में तीस बीघा के पास पहले एक सप्तग्राम नामक महासमृद्धि शाली प्रसिद्ध नगर था। इस नगर में हिरण्यदास और गोवर्धनदास- ये दो प्रसिद्ध धनी महाजन रहते थे। दोनों भाई-भाई ही थे। ये लोग गौड़ के तत्कालीन अधिपति सैयद हुसैनशाह का ठेके पर… Read More
शिवजी का राधावतार शिवजी का राधावतार एक बार परमकौतुकी लीलामय भगवान् श्रीशिवजी ने पार्वतीजी से कहा — ‘देवि ! यदि मुझपर तुम प्रसन्न हो तो तुम पृथिवीतल पर कहीं पुरुषरूप से अवतार लो और मैं स्त्रीरूप धारण करूँगा । यहाँ जैसे मैं तुम्हारा प्रियतम स्वामी और तुम मेरी प्राणप्यारी भार्या हो, उसी प्रकार वहाँ तुम मेरे स्वामी तथा… Read More
श्रीराधाजी का ‘आनन्दचन्द्रिका’ नामक स्तोत्र ॥ श्रीराधाजी का ‘आनन्दचन्द्रिका’ नामक स्तोत्र ॥ राधा दामोदरप्रेष्ठा राधिका वार्षभानवी । समस्तवल्लवीवृन्दधम्मिल्लोत्तंसमल्लिका ॥ १ ॥ कृष्णप्रियावलीमुख्या गान्धर्वा ललितासखी । विशाखासख्यसुखिनी हरिहृद्भृंगमञ्जरी ॥ २ ॥ इमां वृन्दावनेश्वर्या दशनाममनोरमाम् । आनन्दचन्द्रिकां नाम यो रहस्यां स्तुतिं पठेत् ॥ ३ ॥ स क्लेशरहितो भूत्वा भूरिसौभाग्यभूषितः । त्वरितं करुणापात्रं राधामाधवयोर्भवेत् ॥ ४ ॥… Read More
श्रीराधा अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ श्रीराधा अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ ॥ ईश्वर उवाच ॥ अथास्याः सम्प्रवक्ष्यामि नाम्नामष्टोत्तरं शतम् । यस्य सङ्कीर्तनादेव श्रीकृष्णं वशयेद् ध्रुवम् ॥ १ ॥ राधिका सुन्दरी गोपी कृष्णसङ्गमकारिणी । चञ्चलाक्षी कुरङ्गाक्षी गान्धर्वी वृषभानुजा ॥ २ ॥ वीणापाणिः स्मितमुखी रक्ताशोकलतालया । गोवर्धनचरी गोप्या गोपीवेषमनोहरा ॥ ३ ॥… Read More
श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ विनियोगः- “ॐ अस्य श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रस्य श्रीशेष ऋषिः, अनुष्टुप्-छन्दः, श्रीकृष्णो देवता, श्रीकृष्णप्रीत्यर्थे श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामजपे विनियोगः ॥” ॥ पूर्व-पीठिका ॥ ॥ श्रीशेष उवाच ॥ वसुंधरे वरारोहे जनानामस्ति मुक्तिदम् ॥ 1 ॥ सर्वमङ्गलमूर्द्धन्यमणिमाद्यष्टसिद्धिदम् । महापातककोटिघ्न सर्वतीर्थफलप्रदम् ॥ 2 ॥ समस्तजपयज्ञानां फलदं पापनाशनम् । शृणु देवि प्रवक्ष्यामि नाम्नामष्टोतरं शतम् ॥ 3 ॥ महस्रनाम्नां पुण्यानां… Read More
महापुरुषों के अपमान से विपत्ति महापुरुषों के अपमान से विपत्ति प्राचीनकाल की बात है, दम्भोद्भव नाम का एक सार्वभौम राजा था। वह महारथी सम्राट् नित्यप्रति प्रात:काल उठकर ब्राह्मण और क्षत्रियों से पूछा करता था कि ‘क्या ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों में कोई ऐसा शस्त्रधारी है, जो युद्ध में मेरे समान अथवा मुझसे बढ़कर हो ?’ इस प्रकार कहते हुए… Read More