राधा यंत्रावरण पूजनम् ॥ अथ राधा यंत्रावरण पूजनम् ॥ राधा यंत्र के निर्माण में प्रचलित तंत्रग्रंथों, राधारहस्य, राधातंत्रादि में अलग से कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है । परन्तु राधातंत्र कवचादि में वर्णित नायिकायें सहित तथा अन्य दृष्टान्तों के आधार पर राधायंत्र की परिकल्पना कर यंत्र की रचना की गई है । उक्त यंत्र पर राधा एवं कृष्ण दोनों… Read More
श्रीराधा-माधव यन्त्र श्रीराधा-माधव यन्त्र श्रीराधिकाजी का यह यन्त्र राधिका-पंचदशी-यन्त्र कहलाता है । इसका राधाष्टमी (भाद्रपद शु० ८)-के दिन, दीपावली (कार्तिक अमावस्या)-या होलिका पर्व (फाल्गुन पूर्णिमा)-में ताम्र, स्वर्ण, रजत पत्रपर खुदवाकर अथवा भोजपत्रपर अष्टगन्ध से रचनाकर अभिषेक करना चाहिये । पंचगव्य, पंचामृत, गंगाजल अथवा यमुनाजल से स्नान कराने के पश्चात् रक्तवस्त्र या पीतवस्त्र पर यन्त्र को रखकर पंचोपचार,… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 33 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 33 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तैंतीसवाँ अध्याय गणोंसहित वीरभद्र और महाकाली का दक्षयज्ञ-विध्वंस के लिये प्रस्थान ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] महेश्वर के कहे गये इस वचन को आदरपूर्वक सुनकर वीरभद्र बहुत सन्तुष्ट हुए । उन्होंने महेश्वर को प्रणाम किया ॥ १ ॥ तत्पश्चात् त्रिशूलधारी उन… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 32 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 32 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बत्तीसवाँ अध्याय सती के दग्ध होने का समाचार सुनकर कुपित हुए शिव का अपनी जटा से वीरभद्र और महाकाली को प्रकट करके उन्हें यज्ञ-विध्वंस करने की आज्ञा देना नारदजी बोले — [हे ब्रह्मन् !] आकाशवाणी को सुनकर अज्ञानी दक्ष ने क्या… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 31 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 31 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इकतीसवाँ अध्याय यज्ञमण्डप में आकाशवाणी द्वारा दक्ष को फटकारना तथा देवताओं को सावधान करना ब्रह्माजी बोले — हे मुनीश्वर ! इसी बीच वहाँ दक्ष तथा देवता आदिको सुनाते हुए आकाशवाणी ने यथार्थ बात कही ॥ १ ॥ आकाशवाणी बोली — हे… Read More
श्रीकृष्ण – दशाक्षर मन्त्र प्रयोगः ॥ श्रीकृष्ण – दशाक्षर मन्त्र प्रयोगः ॥ दशाक्षर मन्त्र – “गोपीजन वल्लभाय स्वाहा ।” श्रीकृष्णमन्त्र – गोपीजनवल्लभाय स्वाहा — यह श्रीकृष्ण का दशाक्षर मन्त्र है । इससे दृष्टादृष्ट सभी प्रकार के फल प्राप्त होते हैं । ऐहिक और पारलौकिक दोनों ही शुभ फल प्राप्त होते हैं । इस मन्त्र के पहले ‘क्लीं’ बीज लगाकर ‘क्लीं… Read More
श्रीकृष्ण – अष्टाक्षर मन्त्र ॥ श्रीकृष्ण – अष्टाक्षर मन्त्र ॥ 1. मन्त्रः- क्लीं हृषीकेशाय नमः । हृषिकेश-पद डेऽन्त नमोऽन्त काम-पूर्वक अष्टाक्षरो मनु प्रोक्त समस्त पुरुषार्थद – (बृहद् तन्त्रसार, मन्त्र महोदधि) विनियोग- अस्य श्रीगोविन्दमन्त्रस्य त्रैलोक्यमोहनाख्य ऋषिर्गायत्री छन्दः त्रैलोक्यमोहनो देवताऽभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- श्रीगोविन्दमन्त्रस्य त्रैलोक्यमोहनाख्य ऋषये नमः शिरसि । गायत्री छन्दसे नमः मुखे । त्रैलोक्यमोहनो देवताय नमः हृदि । विनियोगाय… Read More
चतुर्विंशति-मूर्तिस्तोत्र एवं द्वादशाक्षर स्तोत्र ॥ चतुर्विंशति-मूर्तिस्तोत्र एवं द्वादशाक्षर स्तोत्र ॥ ॥ श्रीभगवानुवाच ॥ ॐरूपः केशवः पद्मशङ्खचक्रगदाधरः । नारायणः शङ्खपद्मगदाचक्री प्रदक्षिणम् ॥ १ ॥ नतो गदो माधवोरिशङ्खपद्मी नमामि तम् । चक्रकौमोदकीपद्मशङ्खी गोविन्द ऊर्जितः ॥ २ ॥… Read More
श्रीकृष्णजन्माष्टमी – व्रत की विधि श्रीकृष्णजन्माष्टमी – व्रत की विधि ( शिवपुराण, विष्णपुराणु, ब्रह्मवैवर्त, अग्निपुराण, भविष्यादि पुराणों में जन्माष्टमी व्रत का उल्लेख है ।) -यह व्रत भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को किया जाता है । भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय वृष राशि के चन्द्रमा में हुआ था । अतः अधिकांश उपासक… Read More
जन्माष्टमी व्रत के पूजन, उपवास और महत्त्व आदि का निरूपण जन्माष्टमी व्रत के पूजन, उपवास और महत्त्व आदि का निरूपण (ब्रह्म वैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्ड: अध्याय 8) नारद जी बोले– भगवन! जन्माष्टमी-व्रत समस्त व्रतों में उत्तम कहा गया है। अतः आप उसका वर्णन कीजिये। जिस जन्माष्टमी-व्रत में जयन्ती नामक योग प्राप्त होता है, उसका फल क्या है? तथा सामान्यतः जन्माष्टमी-व्रत का अनुष्ठान करने से किस फल… Read More