July 19, 2015 | aspundir | Leave a comment भगवान् श्री गणेश की साधनाएँ (१) श्री सिद्ध-विनायक-व्रत ‘श्री सिद्ध-विनायक-व्रत’ भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को करे। पहले निम्न-लिखित मन्त्र का १००० या अधिक ‘जप’ करे। यथा- “सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवन्ता हतः। सुकुमार कामरोदीस्तव ह्येषः स्यमन्तकः।।” फिर श्री गणेश जी का षोडशोपचार पूजन कर, २१ मोदकों का नैवेद्य रखे। तब २१ दूर्वा लेकर उन्हें गन्ध-युक्त करे और निम्न नामों से २-२ दूर्वा अक्षत-सहित श्री गणेश जी को अर्पित करे। १॰ गणाधिपाय नमः, २॰ उमा-पुत्राय नमः, ३॰ अघनाशाय नमः, ४॰ विनायकाय नमः, ५॰ ईश-पुत्राय नमः, ६॰ सर्व-सिद्धि-प्रदाय नमः, ७॰ एक-दन्ताय नमः, ८॰ ईभ-वक्त्राय नम, ९॰ मूषक-वाहनाय नमः तथा १०॰ कुमार-गुरवे नमः। उक्त १० नामों से २-२ दूर्वा तथा ‘गणाधिप नमस्तेऽस्तु उमापुत्राघनाशन । एकदन्तेभवक्त्रेति तथा मूषकवाहन । विनायकेशपुत्रेति सर्वसिद्धिप्रदायक । कुमारगुरवे तुभ्यं पूजयामि प्रयत्नतः।।’ इस मन्त्र से १ (२१ वीं) दूर्वा अर्पित करें। इसके पश्चात् २१ मोदक लेकर १ गणञ्जय, २ गणपति, ३ हेरम्ब, ४ धरणीधर, ५ महागणाधिपति, ६ यज्ञेश्वर, ७ शीघ्रप्रसाद, ८ अभङ्गसिद्धि, ९ अमृत्म १० मन्त्रज्ञ, ११ किन्नाम, १२ द्विपद, १३ सुमङ्गल, १४ बीज, १५ आशापूरक, १६ वरद, १७ शिव, १८ कश्यप, १९ नन्दन, २० सिद्धिनाथ और २१ ढुण्ढिराज – इन नामोंसे एक – एक मोदक अर्पण करे । उक्त २१ मोदकोंमे १ गणेशजीके लिये छोड़ दे, १० ब्राह्मणोंको दे और दस अपने लिये प्रसाद स्वरुप रखे । (२) श्री सिद्धि-विनायक-उपासना पहले उपासना हेतु ‘संकल्प’ करे। फिर ‘श्री-सिद्धि-विनायक श्री गणेश जी का पूजन कर श्रद्धा पूर्वक गुड़, शक्कर, मोदक, खडी शक्कर आदि उन्हें समर्पित करे। बाद में आरती करे व प्रसाद बाँटे। ऐसा करने से पुत्र-पौत्र, धन-सम्पत्ति की शीघ्र ही प्राप्ति होती है। श्रीब्रह्मणस्पति-सहस्त्र-नामों द्वारा उक्त हवि-द्रव्यों से ‘हवन’ भी किया जा सकता है। (३) सिद्ध गणेशोपासना यह साधना अत्यन्त प्रभावशाली है। पहले रविवार या मंगलवार को आक के पौधे की बड़ी जड़ ले आए। उस पर श्री गणेश जी की प्रतिमा खुदवा ले। फिर पूजन-स्थान में विधि-वत् प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करे। पहले संकल्प, षोडशोपचार पूजन आदि करे। अन्त में, श्री-सिद्धि-दाता श्री गणेश का आवाहन कर मन्त्र-सिद्धि हेतु प्रार्थना करे और ‘रुद्राक्ष-माला पर मन्त्र का जप शान्त चित्त से प्रारम्भ करे। मन्त्र इस प्रकार है- “ॐ ग्रीं ग्रूं गणपतये नमः स्वाहा” नित्य निश्चित समय पर निश्चित स्थान में निश्चित संख्या में जप करे। जप हेतु आसन लाल कम्बल का ले। कुल सवा लाख जप करे। साधना-काल में चटाई या लाल कम्बल पर भूमि-शयन करे। सवा लाख जप के बास पञ्चामृत (दही, दूध, धी, शहद व शक्कर) से होम करे। हवन के पश्चात् गणेश जी की मूर्ति को पवित्र नदी, जलाशय में विसर्जित करे अथवा ऐसे सुरक्षित स्थान पर रखें, जहाँ कोई छू न सके। नित्य १०८ बार जप करता रहे। १ ‘गणेशाय नमः’ से आवाहन, २ ‘विघ्रनाशिने नमः’ से आसन, ३ ‘लम्बोदराय नमः’ से पाद्य, ४ ‘चन्द्रार्घधारिणे नमः’ से अर्घ्य, ५ ‘विश्वाप्रियाय नमः’ से आचमन, ६ ‘ब्रह्मचारिणे नमः’ से स्त्रान, ७ ‘कुमारगुरवे नमः’ से वस्त्र, ८ ‘शिवात्मजाय नमः’ से यज्ञोपवीत, ९ ‘रुद्रपुत्राय नमः’ से गन्ध, १० ‘विघ्रहत्रें नमः’ से अक्षत, ११ ‘परशुधारिणे नमः’ से पुष्प, १२ ‘भवानीप्रीतिकत्रें नमः’ से धूप, १३ ‘गजकर्णाय नमः’ से दीपक, १४ ‘अघनाशिने नमः’ से नैवेद्य ( आचमन ), १५ ‘सिद्धिदाय नमः‘ से ताम्बूल और १६ ‘सर्वभोगदायिने नमः‘ से दक्षिणा अर्पण करके ‘ षोडशोपचारपूजन ‘ करे Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe