June 17, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 110 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ दसवाँ अध्याय गङ्गाजी की महिमा गङ्गामाहात्म्यं अग्निदेव कहते हैं — अब गङ्गा का माहात्म्य बतलाता हूँ। गङ्गा का सदा सेवन करना चाहिये । वह भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। जिनके बीच से गङ्गा बहती हैं, वे सभी देश श्रेष्ठ तथा पावन हैं। उत्तम गति की खोज करने वाले प्राणियों के लिये गङ्गा ही सर्वोत्तम गति है। गङ्गा का सेवन करने पर वह माता और पिता- दोनों के कुलों का उद्धार करती है। एक हजार चान्द्रायण अपेक्षा गङ्गाजी के जल का पीना उत्तम है। एक मास गङ्गाजी का सेवन करनेवाला मनुष्य सब यज्ञों का फल पाता है ॥ १-३ ॥’ गङ्गादेवी सब पापों को दूर करने वाली तथा स्वर्गलोक देने वाली हैं। गङ्गा के जल में जबतक हड्डी पड़ी रहती है, तबतक वह जीव स्वर्ग में निवास करता है। अंधे आदि भी गङ्गाजी का सेवन करके देवताओं के समान हो जाते हैं। गङ्गा- तीर्थ से निकली हुई मिट्टी धारण करने वाला मनुष्य सूर्य के समान पापों का नाशक होता है। जो मानव गङ्गा का दर्शन, स्पर्श, जलपान अथवा ‘गङ्गा’ इस नाम का कीर्तन करता है, वह अपनी सैकड़ों-हजारों पीढ़ियों के पुरुषों को पवित्र कर देता है ॥ ४-६ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘गङ्गाजी की महिमा’ नामक एक सौ दसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ११० ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe