June 9, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 047 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय शालग्राम-विग्रहों की पूजा का वर्णन शालग्रामादिपूजाकथनम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं तुम्हारे सम्मुख पूर्वोक्त चक्राङ्कित शालग्राम-विग्रहों की पूजा का वर्णन करता हूँ, जो सिद्धि प्रदान करने वाली है। श्रीहरि की पूजा तीन प्रकार की होती है — काम्या, अकाम्या और उभयात्मिका । मत्स्य आदि पाँच विग्रहों की पूजा काम्या अथवा उभयात्मिका हो सकती है। पूर्वोक्त चक्रादि से सुशोभित वराह, नृसिंह और वामन — इन तीनों की पूजा मुक्ति के लिये करनी चाहिये। अब शालग्राम- पूजन के विषय में सुनो, जो तीन प्रकार की होती है। इनमें निष्कला पूजा उत्तम, सकला पूजा कनिष्ठ और मूर्तिपूजा को मध्यम माना गया है। चौकोर मण्डल में स्थित कमल पर पूजा की विधि इस प्रकार है — हृदय में प्रणव का न्यास करते हुए षडङ्गन्यास करे। फिर करन्यास और व्यापक न्यास करके तीन मुद्राओं का प्रदर्शन करे। तत्पश्चात् चक्र के बाह्यभाग में पूर्व दिशा की ओर गुरुदेव का पूजन करे। पश्चिम दिशा में गण का, वायव्यकोण में धाता का एवं नैर्ऋत्यकोण में विधाता का पूजन करे। दक्षिण और उत्तर दिशा में क्रमशः कर्ता और हर्ता की पूजा करे। इसी प्रकार ईशानकोण में विष्वक्सेन और अग्निकोण में क्षेत्रपाल की पूजा करे। फिर पूर्वादि दिशाओं में ऋग्वेद आदि चारों वेदों की पूजा करके आधारशक्ति, अनन्त, पृथिवी, योगपीठ, पद्म तथा सूर्य, चन्द्र और ब्रह्मात्मक अग्नि-इन तीनों के मण्डलों का यजन करे। तदनन्तर द्वादशाक्षर मन्त्र से आसन पर शिला की स्थापना करके पूजन करे। फिर मूल मन्त्र के विभाग करके एवं सम्पूर्ण मन्त्र से क्रमपूर्वक पूजन करे। फिर प्रणव से पूजन करने के पश्चात् तीन मुद्राओं का प्रदर्शन करे ॥ १-९ ॥ ‘ इस प्रकार यह शालग्राम की प्रथम पूजा निष्कला कही जाती है। पूर्ववत् षोडशदलकमल से युक्त मण्डल को अङ्कित करे। उसमें शङ्ख, चक्र, गदा और खड्ग — इन आयुधों की तथा गुरु आदि की पहले की भाँति पूजा करे। पूर्व और उत्तर दिशाओं में क्रमशः धनुष और बाण की पूजा करे। प्रणवमन्त्र से आसन समर्पण करे और द्वादशाक्षर मन्त्र से शिला का न्यास करना चाहिये। अब तीसरे प्रकार की कनिष्ठ पूजा का वर्णन करता हूँ सुनो। अष्टदलकमल अङ्कित करके उस पर पहले के समान गुरु आदि की पूजा करे। फिर अष्टाक्षर मन्त्र से आसन देकर उसी से शिला का न्यास करे ॥ १०-१३१/२ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘शालग्राम आदि की पूजा का वर्णन’ विषयक सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ४७ ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe