ध्यान का महत्त्व आप सभी ने प्रायः देखा होगा की मन्त्र जप करने से पूर्व शास्त्रों में विनियोग, न्यास, ध्यान आदि का वर्णन होता है। इनका क्या प्रयोजन है? ध्यान- स्थूल ध्यान द्वारा सूक्ष्म का बोध होता है। ‘कुलार्णव तन्त्र’ में स्पष्ट कहा गया है कि -‘जिस प्रकार गायों के सारे शरीर में व्याप्त दूध… Read More


तिलक महिमा स्नान एवं धौत वस्त्र धारण करने के उपरान्त वैष्णव ललाट पर ऊर्ध्वपुण्ड्र, शैव त्रिपुण्ड, गाणपत्य रोली या सिन्दूर का तिलक शाक्त एवं जैन क्रमशः लाल और केसरिया बिन्दु लगाते हैं। दिगम्बर जैन सम्प्रदाय में केसरिया तिलक तथा बौद्धों में श्वेताम्बर मतावलम्बियों के समान ही बिन्दु मस्तक पर धारण करते हैं। नारद पुराण में… Read More


तन्त्र शब्द के अर्थ बहुत विस्तृत हैं। यह शब्द ‘तन्’ और ‘त्र’ (ष्ट्रन) इन दो धातुओं से बना है, अतः “विस्तारपूर्वक तत्त्व को अपने अधीन करना”- यह अर्थ व्याकरण की दृष्टि से स्पष्ट होता है, जबकि ‘तन्’ पद से प्रकृति और परमात्मा तथा ‘त्र’ से स्वाधीन बनाने के भाव को ध्यान में रखकर ‘तन्त्र’ का… Read More


हिन्दू-धर्म का आधार हिन्दू धर्म व्यक्ति प्रवर्तित धर्म नहीं है। इसका आधार वेदादि धर्मग्रन्थ है, जिनकी संख्या बहुत बड़ी है। ये सब दो विभागों में विभक्त है। 1॰ इस श्रेणी के ग्रन्थ “श्रुति´´ कहलाते हैं। ये अपौरषेय माने जाते हैं। इसमें वेद की चार संहिताओं, ब्राह्मणों, आरण्यकों, उपनिषदों, वेदांग, सूत्र आदि ग्रन्थों की गणना की… Read More