शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग शत्रु-बाधा निवारक ‘दारूण-सप्तक’ जब हिरण्यकश्यप को भगवान् नृसिंह ने अपनी गोद में रखकर अपने खर-तर नखों से उसके उदर को सर्वथा विदीर्ण कर चीर दिया और प्रह्लाद का दुःख दूर हो गया । तदनन्तर श्री भगवान् नृसिंह का वह क्रोध शान्त न हुआ, तब भगवान् विष्णु के आग्रह पर भगवान् रुद्र… Read More


अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्र-साधना भगवान् अर्द्ध-नारीश्वर के “चिन्ता-मणि” नामक मन्त्र की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियाँ मिलती है । इसकी साधना विधि निम्न प्रकार है – विनियोगः- ॐ अस्य अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, अर्द्ध-नारीश्वर देवता, सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- शिरसि कश्यप ऋषये नमः, मुखे अनुष्टुप छन्दसे नमः, हृदि अर्द्ध-नारीश्वर देवतायै नमः, अञ्जलौ सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय… Read More


रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग ।। श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्र प्रयोग ।। किसी प्राचीन शिवालय में जाकर गणेश जी की “ॐ गं गणपतये नमः” मन्त्र से षोडशोपचार पूजन करे । तदनन्तर “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र से महा-देव जी की पूजा कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्रस्य श्री कहोल ऋषिः, विराट् छन्दः,… Read More


अमोघ शिव कवच भगवान् शङ्कर का नाम लेने से ही प्राणियों के सब दुःख दूर हो जाते हैं, फिर उनकी विधिवत् उपासना करने से क्या नहीं हो सकता ! निश्चय ही भगवान् शिव की पूजा करके लोग अपना सभी प्रकार का हित साधन कर सकते हैं । यहाँ श्रीस्कन्द-पुराण के ब्रह्मोत्तर खण्ड में ‘भद्रायु’ को… Read More


विंशोत्तर-शत-महा-देव-‘मकारादि’-शत-नाम-स्तोत्र महादेवो महाकल्पो, महा-वेशो महा-बलः । महोद्योगो महोत्कर्ष, महा-भीमो महोक्षजः ।।१ महा-कालो महोत्सर्गो, महा-नागो महोत्सुकः । मोघो मोघ-बलो मेघो, मेघदो मेघ-वाहनः ।।२ मन्द-हासो महा-सेनो, मन्दाकिनि-शिरो-धरः । मुक्तिदो मोक्षमानन्दो, मोक्षो मोक्ष-प्रदो मनः ।।३… Read More