विघ्नों का निवारण मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश । गुरु जी को आदेश । पहिला गण गणपती । चौदा विद्यांचा सारथी । जती सती कैलास- पती । बल भीम मारुती । आले विघ्न निवारी । साईं गोरखनाथ की द्वाही । गुरू की शक्ति – मेरी भक्ति । चले मन्त्र, ईश्वरी वाचा । पिण्ड कच्चा, गुरू गोरखनाथ… Read More


धन-धान्य की समृद्धि के लिए मन्त्रः- “ॐ ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी, मम गृहे धन पुरे । चिन्ता दूरे दूरे स्वाहा ।”… Read More


पागल कुत्ते का विष-निवारण मन्त्रः- “ॐ कामरू देश, कामाक्षा देवी । जहाँ बसै इस्मायल जोगी । इस्मायल जोगी का झामरा कुत्ता । सोना डाढ़, रूपा का कुण्डा । बन्दर नाचे, रीछ बजावे । सीता बैठी, औषध बांटे । कूकर का विष भाजे । शब्द सांचा, पिण्ड कांचा । फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।”… Read More


चोर-भय का निवारण मन्त्रः- “ॐ करालिनी स्वाहा । ॐ कपालिनी स्वाहा । ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं चोर बन्ध ठं ठं ठं ।”… Read More


किसान बन्धुओं के लिए मन्त्र सर्प-भय का निवारण मन्त्रः- “मुनि-राज आस्तक नमः ।” विधि – घर मे सर्प हो और उससे भय हो, तो या सर्प के कभी- कभी दिखाई देने से डर लग रहा हो, तो अथवा खेत में सर्प भय अधिक हो, तो या रात्रि में घर से खेत तक जाने के मार्ग… Read More


किसान बन्धुओं के लिए मन्त्र गाय की चोरी होने पर मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश । गुरु जी को आदेश । गुरू की क्रिया भण्डारी । धनञ्जय देवेन्द्रनाथ उतारी । बाबा हमदे । गाय गुरु के परि सुखे । नदी को चलवे तीर । गाय गोरख की । बखरी मच्छिन्द्र की । भय से राजा बारसव… Read More


छत्तीसगढ़ के अनुभूत शाबर मन्त्र प्रस्तुत शाबर मन्त्र अनुभूत हैं और अल्प मात्रा में जपने पर ही सिद्ध हो जाते हैं । इन मन्त्रों को सिद्ध करने के लिए नव-रात्रि, दीपा-वली, होली, ग्रहण, अमावस्या आदि पर्व उपयुक्त माने गए हैं । इन मन्त्रों को सिद्ध करने के पहले ‘गुरु – सर्वार्थ साधन मन्त्र’ और ‘शरीर-… Read More


टोना झारने के मन्त्र (१) “मन्त्रा-तन्त्रा की ऐसी – तैसी, पारबती के मन्त्रा वैसी । जिहाँ पठाऊँ, तिहाँ तैं जाय, फोर करेजा भीतर खाय । काली कमाख्या का नाम है, पार्वती का काम है । आ रे ! टोनही के टोना जादू पाँगन होखे तो फिर जाबे । मोर फूकें, मोर गुरू के फूकें ।… Read More


गर्भ-स्तम्भन मन्त्र मन्त्रः- “गौरी गण्डा दे गई, ईश्वर दे गया वाचा । महा – देव थापा घर गया, शब्द भया साँचा । दथ त्रिया की चिन्ता, मेरी दश मांस । बाँधु बीस पाख, बाँधु उसका पैर । गर्भ खिसके, तो गुरू गोरखनाथ की दुहाई । मेरी शक्ति, गुरू की शक्ति, सत्-नाम आदेश गुरू की ।”… Read More


भूत-प्रेत बाँधने के मन्त्र (१) “बडका ताल के पेड़ माँ बँधाय जञ्जीरा । खाले माँ बाजे झाँझ-मँजीरा और बाजे तबला निशान । भाग-भाग रे भूत – मसान, पहुँचत है पञ्च-मुखा हनुमान । मोर फूँकें, मोर गुरू के फूँकें । गौरा महा-देव के फूँकें । जा रे, भूत बँधा जा ।… Read More