मिट्टी वशीकरण शाबर मन्त्र मन्त्रः- “काला कलुवा चौसठ बीर ॥ ताल भागी तोर ॥ जहां को भेजू ॥ वहीं को जाए। मांस मज्जा को ॥ शब्द बन जाए । अपना मारा । आप दिखावे ॥ चलत वाण मा। उलट मूठ मारूँ ॥ मार-मार कलवा। तेरी आस चार । चौमुख दीया ॥ मार बांदी की छाती… Read More


मुट्ठी पीर सिद्धि शाबर मन्त्र विधि – यह मंत्र किसी भी गुरुवार की रात्रि मे बबूल वृक्ष के नीचे बैठकर 41 दिन तक प्रतिदिन 2100 की संख्या में जपें । आसन पश्चिम की ओर मुख करके लगायें और सामने सरसों के तेल का दीपक जलायें। बयालीसवें दिन उक्त मंत्र से 108 बार आहूति देकर मंत्र… Read More


संतान प्राप्ति मन्त्र विधिः- सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण पर इस मन्त्र को सिद्ध किया जाता है। मन्त्र सिद्धि काल में माँ कामाख्या के प्रति भक्ति भाव होना चाहिए। ग्रहण काल के पश्चात् स्नानादि से निवृत होकर कन्या पूजन और कन्या भोजन कराना चाहिए। साथ ही भोजन वस्त्र आदि प्रदान करना चाहिए ! रजस्वला होने… Read More


सिन्दूर मोहन शाबर मन्त्र विधि – सर्वप्रथम एक चाँदी की डिब्बी में “कामिया सिन्दूर” लेकर छत पर या किसी खुले स्थान में पूर्णमासी की सारी रात्रि में छोड़ दें। यह इस प्रकार से डिब्बी को खुली रखें कि इस पर सारी रात चाँदनी पड़ती रहें । सूर्योदय से पूर्व ही इसे उठा लायें और सिरहाने… Read More


वीर सिद्धि शाबर मन्त्र विधिः- किसी भी शनिवार की रात्रि से सरसों के तेल का दीपक जलाकर इस मंत्र को दक्षिण की ओर मुख करके जपा जाता है। लोबान जलाकर रखें और इस मंत्र का प्रति रात 1008 बार जाप करें। यह प्रयोग 41 रात्रि तक करें तो सिद्धि मिलती है। मंत्र सिद्ध हो जाने… Read More


व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र विधिः- व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व यदि इस मंत्र का 108 बार उच्चारण करके दुकान खोलें और व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करें तो उस दिन ब्रिकी बढ़ती है और किसी प्रकार का कोई उपद्रव या परेशानी नहीं आती। इस मंत्र को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं… Read More


शाबर तंत्र साधना से पूर्व आवश्यक निर्देश किसी भी साधक को कोई भी तांत्रिक प्रयोग अथवा तंत्र-मंत्र-यंत्र साधना करने से पूर्व अपने इष्टदेव का स्मरण तथा अपने पूज्य गुरूदेव का आशीर्वाद व मार्गदर्शन तथा निम्नांकित आवश्यक निर्देशों एवं सावधानियों का पालन करना अत्यावश्यक होता है- * मंत्रतंत्र का जप अंग-शुद्धि, सरलीकरण एवं विधि-विधान पूर्वक करना… Read More


|| गोरक्ष गायत्री || ॐ गुरुजी! सत् नम: आदेश ! गुरूजी को आदेश। ओऽमकारो शिव रुपी, मध्याह्ने हंसरुपी सन्ध्याया साधु रुपी, परमहंस दो अक्षर, गुरू तो गोरख काया तो गायत्री ॐ ब्रह्म, सोहम् शक्ति, शून्य माला अवगत पिता, विहंगम जात, अभय पन्थ, सूक्ष्म वेद, असंख्य शाखा, हरमुख प्रवर, निरंजन गौत्र, त्रिकुटी क्षैत्र, जुगति जोत, जल… Read More


गर्भ-स्तम्भन मन्त्रः- “शुद्ध बुद्ध को ठकुरा बाँधो, गर्भ रहे जी ठहर पाके फूटे बीज गिरे । श्री रामचन्द्र जी, हत्या तोहे परे । ईश्वर तेरी साख, गौरा गाँडा बाँध के नौ महीना राख । ताला झिन्ना न झरै, पट-पट बीधे ताल । लोहू जामुन दे गए, ब्रह्मा और मुरार । ऊँचे चढ़े न नीचे धँसे,… Read More


रोगों की झाड़नी मन्त्रः- “खेरे पै की आमली, अगल-बगल की डार । ऊपर मोती गा गहे, तर भैंसा रखवार । वा भैंसा न जानिए, पालै तेली कलार । नौ गगरा मद के पिए, नौ सौ बकरा खाय । सांझी बाबा को चीर-फार, शिव बाबा की जटा उखार । छत्तीस रोग हांक के न आवे, तो… Read More