साधना सफलता का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ इक ओंकार, सत नाम करता पुरुष निर्मै निर्वैर अकाल मूर्ति अजूनि सैभं गुर प्रसादि जप आदि सच, जुगादि सच है भी सच, नानक होसी भी सच – मन की जै जहाँ लागे अख, तहाँ-तहाँ सत नाम की रख । चिन्तामणि कल्पतरु आए कामधेनु को संग ले आए, आए… Read More


दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो भगवती पुर-पुर देशनि पुराधिपतये सर्व जगद-भयंकरिच्छीमै ॐ रांग र रीं क्ला वालो सल्पञ्च काम-बाण सर्वश्री समस्त नर-नारी-गणं मम वशमानय मानय स्वाहा ।”… Read More


फूल-मोहिनी-मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरु को । एक फूल, फूल भर दोना, चौंसठ जोगनी ने मिल किया टोना । फूल-फूल वह फूल न जानी, हनुमन्त वीर घेर-घेर दे आनी । जो सूँघे इस फूल की बास, उसका जी प्राण रहे हमारी पास । सूती होय, तो जगाइ लाव, बैठी होय, तो उठाइ लाव ।… Read More


अर्श (बवासीर) नाशक शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरु को । खुरासान सूं आया वीर, छप्पन सूर संग में तीर । सीस कटै और खून न आवै, टपका एक पड़न नहिं पावै ।। खूनी बादी कैसी होय, करो दूर पीड़ा कम होय । शब्द साँचा पिण्ड काँचा, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।।”… Read More


त्रिविध फल-दायक शाबर मन्त्र मन्त्रः- १॰ “या भुज ते महिषासुर मारि, औ शुम्भ-निशुम्भ दोऊ दल थम्बा । आरत हेतु पुकारत हौं, जाइ कहाँ बैठी जगदम्बा ?।। खड्ग टूटो कि खप्पर फूटो कि सिंह थको, तुमरो जगदम्बा ! आज तोहे माता भक्त शपथ, बिनु शान्ति दिए जनि सोवहु अम्बा ! ।।”… Read More


शाबर मन्त्र साधना के महत्त्वपूर्ण तथ्य १॰ इस साधना को किसी भी जाति, वर्ण, आयु का पुरुष या स्त्री कर सकती है । २॰ इन मन्त्रों की साधना में गुरु की इतनी आवश्यकता नहीं रहती, क्योंकि इनके प्रवर्तक स्वयं सिद्ध-साधक रहे हैं । इतने पर भी कोई निष्ठा-वान् साधक गुरु बन जाए, तो कोई आपत्ति… Read More


रक्षा-विधानः शाबर मन्त्र विविध-रक्षा-कारक-मन्त्र “श्रीरामचन्द्र-दूत हनुमान ! तेरी चोकी – लोहे का खीला, भूत का मारूँ पूत । डाकिन का करु दाण्डीया । हम हनुमान साध्या । मुडदां बाँधु । मसाण बाँधु । बाँधु नगर की नाई । भूत बाँधु । पलित बाँधु । उघ मतवा ताव से तप । घाट पन्थ की रक्षा –… Read More


शीघ्र फल-दायक सिद्ध शाबर मन्त्र Quick remedy shabar mantra ‘साबर’ का प्रतीक अर्थ होता है ग्राम्य, अपरिष्कृत । ‘साबर-तन्त्र’ – तन्त्र की ग्राम्य-शाखा है । इसके प्रवर्तक भगवान् शंकर प्रत्यक्ष-तया नहीं है, किन्तु जिन सिद्धों ने इसका आविष्कार किया, वे परम-शिव-भक्त अवश्य थे । गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ ‘साबर-मन्त्र’ के जनक माने जाते… Read More


मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “हेरो सरसुआ फेरो बहिनी, जब देखों तो बाँस के रहनी, नथे बैल बनियन बँधो, परके तेल माथे पे लगाऊ रहिया, मोहिनी धुँआ धरनी, जरवा जोहिनी भैया मोहिनी, कहाँ की मोहिनी, भेड़ा-घाट की मोहिनी, लग जाय री मोहिनी, उस्ताज मोहिनी, चल रे मोहनिया । फिर जहाँ फटकारों, तहाँ वचन न परै खाली… Read More


मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “कहे कमिख्या सुनहु ललजार जर ! पेड़ पात सब तुमरो मलिनौ, पाल पात जराय के भस्मत कीनो । पुन वह क्षार महा-देव ने लई । अब तुमको प्रतिष्ठा भई । ग्रह विचार बेगे तुम आए, जिमि क्षार लगावो धाए । छिन इक में बस होय हमारे, तन-मन ते पग परत विचारे… Read More