सभा-मोहन मन्त्र सभा-मोहन मन्त्र मन्त्रः- ”गङ्गा किनार की पीली – पीली माटी । चन्दन के रूप में बिके हाटी-हाटी ।। तुझे गङ्गा की कसम, तुझे कामाक्षा की दोहाई । मान ले सत-गुरु की बात, दिखा दे करामात । खींच जादू का कमान चला दे मोहन बान । मोह जन-जन के प्राण, तुझे गङ्गा की आन । ॐ… Read More
ग्राम-मोहन-मन्त्र ग्राम-मोहन-मन्त्र – मन्त्रः- ”जल – जल – जीवन – दाता जल । जल के राजा कूप, जहाँ बसे वरुण भूप ।। दोहाई कामाख्या की, मोहनी चला दे । भूप को फँसा कूप में, माया फैला दे ।। तेरी महिमा महान, रख ले सतगुरु की आन ।। ॐ नमः कामाक्षाय अं कं बं टं तं पं… Read More
अधिकारी-मोहन-मन्त्र अधिकारी-मोहन-मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो प्रजापत्यै नृपति-मन मोहय सर्व सेद्धय नम. । कामाक्षात अं कं बं टं तं पं वं शं हीं क्रीं श्रीं फट् स्वाहा ।।”… Read More
नारी-मोहन मन्त्र नारी-मोहन मन्त्र – मन्त्रः- ”आ चन्दा की चांदनी, होकर उन्मादिनी । सतगुरु की है पुकार । मान-मान मानिनी ।। तुझे कामाक्षा की आन, छोड़ हठ: चीर घटा-पट । आ जा नदी के किनार, गा ले प्रीति रागिनी ।। ॐ नमः कामा-क्षाय अं कं बं टं तं पं वं शं हीं क्रीं श्रीं फट् स्वाहा ।।”… Read More
गृह-बाधा-निवारक मन्त्र गृह-बाधा-निवारक मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ह्रीं चामुण्ड-भृकुटि अट्टहासे भीम-दर्शने ! रक्ष: रक्ष: चौरेभ्य वजुर्वेभ्यः अग्निभ्यः श्वापदेभ्यः दुष्ट-जनेभ्यः सर्वेभ्यः सर्वोपद्रवेभ्यः गण्डी ह्रीं ह्रों ठः ठः ।”… Read More
सर्व-विघ्न-हरण मन्त्र सर्व-विघ्न-हरण मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो शान्ते ! प्रशान्ते ! ह्रीं ह्रां सर्व-क्रोधोपशमनी ! स्वाहा ।”… Read More
रोग-आपत्ति-निवारक मन्त्र रोग-आपत्ति-निवारक मन्त्र मन्त्रः- “ॐ शान्ते ! शान्ते ! सर्वारिष्ट-नाशिनी ! स्वाहा ।” अथवा “ॐ नमो शान्ते ! प्रशान्ते ! सर्व-क्रोधोपशमनी ! स्वाहा ।”… Read More
मुकदमों में विजय-प्राप्ति का मन्त्र मुकदमों में विजय-प्राप्ति का मन्त्र मन्त्रः- “ॐ वट वरदाय विजय गणपतये नमः ।” विधि : जिस मन्दिर में ‘गणपति’ स्थापित हों, वहां ‘प्रयोग’ करे । विधि-वत् पूजन करके प्रयोगारम्भ करे । अथवा, निवास-स्थान में गणपति जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर ‘प्रयोग’ करे ।… Read More
धन-प्राप्ति के लिए प्रभावी ‘शाबर’-मन्त्र धन-प्राप्ति के लिए प्रभावी ‘शाबर’-मन्त्र ‘शाबर-मन्त्र-साधना’ में धन – प्राप्ति के लिए प्रभावी मन्त्र इस प्रकार है – १॰ “ॐ श्रैं ह्रीं श्रीं श्रिये नमो भनवलि ! मम समृध्यौ जवल जवल, मा सर्व सम्पद देहि, ममालक्ष्मी नाशय नाराय, हुँ फट्र स्वाहा” विधि : उक्त मन्त्र को उपयुंक्त विधि से २१ माला २१ दिनों तक नित्य… Read More