दिशा, स्थान बाँधने का मन्त्र दिशा, स्थान बाँधने का मन्त्र मन्त्र :- “काला गुरू, धर धतूर तै । जान बास – बसेरु, अमली खेरु । वन देउता आकासे लाग, दशो दिशा दशो देउता । मोरे गुरू, तोर गुरू । मै जानो शपथ साँची । कहु राख धरू मार, बन्धान पर ओर – छोर । मोर देउता, गौरा पार्वती, महादेव की… Read More
स्थान बाँधने का मन्त्र स्थान बाँधने का मन्त्र मन्त्र :- “उतरे पाँव परन्ते जी, सुमिरन सुग्रीव लाभा होय । चौगुना सान्से परे न जीव, धरती करो बिछौना । तम्बू तनू आकाश, सूर्य – चन्द्रमा दीपक-सुख, सोमै हरी के दास । पाँच पुतरी के रखवार, भाग-भाग रे दुष्ट ! हनुमन्त बिराजे आय । जहाँ बजी हनु- मन्त की ताली, तहाँ… Read More
आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत गणेश मन्त्र सिद्ध शाबर मन्त्र-कल्पतरु आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र मन्त्र :- “ॐ गुरू जी गनेपाइयाँ, रिद्धि-सिद्धि आइयाँ । रिद्धि-सिद्धि भरै भण्डार, कमी कछू की नाहीं । पीर-पैगम्बर औलिया- सबको राह बताई । हाथा तो हनुमन्त बसे, भैरो बसे कपाल । दो नैनन बिच, नाहर सिंह, मोह लीन संसार । बिन्द्रा लाव, सिन्दूर का सोहै माँग लिलार… Read More
आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र सिद्ध शाबर मन्त्र-कल्पतरु आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र मन्त्र :- (१) “ॐ गुरू जी काल-भैरव ! काली लट हाथ, फरसी साथ, नगरी करहुँ प्रवेश । नगरी की करो बकरी । राजा को करो बिलाई । जो कोई मेरा जोग भङ्ग करै, बाबा कृष्णनाथ की दुहाई ।”… Read More
भैरव जी का शाबर मन्त्र भैरव जी का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “भैरों उचके, भैरों कूदे । भैरों सोर (शोर) मचावै । मेरा कहना ना करे, तो कालिका को (का) पूत न कहावै । शब्द साँचा, फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।”… Read More
काली के प्रत्यक्ष दर्शन का मन्त्र काली के प्रत्यक्ष दर्शन का मन्त्र मन्त्रः- “काली-काली, महा-काली । इन्द्र की बेटी, ब्रह्मा की साली । हरी गोट, पीरी सारी । माँयके को (का) बाँध, सासरे (ससुराल) को (का) बाँध । औघट को (का) बाँध, गैल ( गली) को ( का) बाँध । बार-बार (बाल-बाल) में से, सोत-सोत (स्रोत-स्रोत) में से, बत्तीसउ दाँत में… Read More
सर्व-कार्य-कारी सिद्ध मन्त्र सर्व-कार्य-कारी सिद्ध मन्त्र (१) ”ॐ पीर बजरङ्गी, राम – लक्ष्मण के सङ्गी, जहाँ-जहाँ जाए, फतह के डङ्के बजाए, दुहाई माता अञ्जनि की आन ।” (२) “ॐ नमो महा – शाबरी शक्ति ! मम अनिष्ट निवारय-निवारय । मम कार्य-सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ।”… Read More
गुड़-मोहन मन्त्र गुड़-मोहन मन्त्र मन्त्रः- ”बन में उपजे बन की घास, जिसके रस में भारी मिठास ।। पी-पी पथिक मिटाए प्यास । घास पुराए सबकी आश ।। रस से गुड़, गुड़ से बन शक्कर । मोहे सुर-नृप-योगी-फक्कर ।। दोहाई कामाक्षा देवी की, गुड़ में कर दे माया । जिस-जिसके मुख में पड़े, मोहे मन-काया ।। मन्त्र फुरो,… Read More
मोहन मन्त्र फकीरी मोहन मन्त्र फकीरी मन्त्रः- (१) ”नबी का है यह फरमान, खुदा का रूप है इन्सान । इसकी ताकत है ईमान, जिससे चलता है जहान ।। जहान में खुदा का टोना है, आस्मान मे आफताब की शान । चाँद नूर बरसाता है, चलाता है जादू का बान ।। चल – चल बिहिश्त की हूर, फैला दे… Read More
शत्रु-मोहन मन्त्र शत्रु-मोहन मन्त्र – मन्त्रः- ”चन्द्र-शत्रु राहू पर, विष्णु का चले चक्र । भागे भयभीत शत्रु, देखे जब चन्द्र वक्र । दोहाई कामाक्षा देवी की, फूँक-फूँक मोहन-मन्त्र । मोह-मोह शत्रु मोह, सत्य तन्त्र-मन्त्र-यन्त्र ।। तुझे शङ्कर की आन, सत-गुरु का कहना मान । ॐ नम: कामाक्षाय अं कं बं टं तं पं वं शं हीं क्रीं… Read More