लाङ्गूलास्त्र शत्रुञ्जय हनुमत् स्तोत्र ॐ हनुमन्तमहावीर वायुतुल्यपराक्रमम् । मम कार्यार्थमागच्छ प्रणमाणि मुहुर्मुहुः ।। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीहनुमच्छत्रुञ्जयस्तोत्रमालामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, नानाच्छन्दांसि श्री महावीरो हनुमान् देवता मारुतात्मज इति ह्सौं बीजम्, अञ्जनीसूनुरिति ह्फ्रें शक्तिः, ॐ हा हा हा इति कीलकम् श्री राम-भक्ति इति ह्वां प्राणः, श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर इति ह्वां ह्वीं ह्वूं जीव, ममाऽरातिपराजय-निमित्त-शत्रुञ्जय-स्तोत्र-मन्त्र-जपे विनियोगः ।… Read More


नवरात्र में करें शत्रु-शमन नवरात्रों में माँ दुर्गा की उपासना प्रायः सभी हिन्दुधर्मावलम्बी करते हैं, लेकिन उस उपासना को विशेष विधि के अनुसार किया जाए तो, उपासना के साथ-साथ मनोकामना की भी पूर्ति की जा सकती है। आधुनिक प्रतिस्पर्द्धी युग में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष शत्रु होना स्वाभाविक है। शत्रुओं के भय से मुक्ति तथा शत्रुओं से पीड़ित… Read More


त्रिविध फल-दायक शाबर मन्त्र मन्त्रः- १॰ “या भुज ते महिषासुर मारि, औ शुम्भ-निशुम्भ दोऊ दल थम्बा । आरत हेतु पुकारत हौं, जाइ कहाँ बैठी जगदम्बा ?।। खड्ग टूटो कि खप्पर फूटो कि सिंह थको, तुमरो जगदम्बा ! आज तोहे माता भक्त शपथ, बिनु शान्ति दिए जनि सोवहु अम्बा ! ।।”… Read More


श्री वीर भैरों शाबर मन्त्र ‘स्व-रक्षा’ और ‘शत्रु-त्रासन हेतु श्री वीर भैरों मन्त्र “हमें जो सतावै, सुख न पावै सातों जन्म । इतनी अरज सुन लीजै, वीर भैरों ! आज तुम ।। जितने होंय सत्रु मेरे, और जो सताय मुझे ।… Read More


समृद्धिदायक अचूक प्रयोग > १॰ अकस्मात् धन लाभ के लिए सफेद कपड़े की ध्वजा को पीपल वृक्ष पर लगाना चाहिए । यदि व्यवसाय में आकस्मिक व्यवधान एवं पतन की सम्भावना प्रबल हो रही हो, तो यह प्रयोग करने से स्थिरता आती है तथा व्यावसायिक बाधाएँ दूर होती हैं ।… Read More


धन-दायक तांत्रिक सामग्री – गोमती चक्र १॰ सात गोमती चक्रों को शुक्ल पक्ष के प्रथम अथवा दीपावली पर लाल वस्त्र में अभिमंत्रित कर पोटली बना कर धन स्थान पर रखें । २॰ यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो, तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल… Read More


उलटने का मन्त्र “ॐ उलटत नरसिंह, पलटत काया। ऐही ले नरसिंह तोहे बुलाया। जो मोर नाम करत, सो मरत-परत। भैरो चक्कर में, उलटी वेद उसी को लागे। कार दुहाई, बड़े वीर नरसिहं की दुहाई। कामरु कामाख्या देवी की दुहाई। अष्ट-भुजी देवी कालिका की दुहाई। शिव सत्-गुरु के वन्दे पायो।”… Read More


हनुमान जी का शत्रु-नाशक मन्त्र “ॐ हनुमान वीर नमः। ॐ नमो वीर, हनुमत वीर, शूर वीर, धाय-धाय चलै वीर। मूठी भर चलावै तीर। मूठी मार, कलेजा काढ़ै। क्रोध करता, हियरा काढ़ै। मेरा वैरी, तेरे वश होवै। धर्म की दुहाई। राजा रामचन्द्र की दोहाई। मेरा वैरी न पछाड़ मारै तो माता अञ्जनी की दोहाई।”… Read More


बैरि-नाशक हनुमान ग्यारहवाँ विधिः- दूसरे से माँगे हुए मकान में, रक्षा-विधान, कलश-स्थापन, गणपत्यादि लोकपालों का पूजन कर हनुमान जी की प्रतिमा-प्रतिष्ठा करे। नित्य ११ या १२१ पाठ, ११ दिन तक करे। ‘प्रयोग’ भौमवार से प्रारम्भ करे। ‘प्रयोग’-कर्त्ता रक्त-वस्त्र धारण करे और किसी के साथ अन्न-जल न ग्रहण करे।… Read More


श्रीविचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र प्रस्तुत ‘विचित्र-वीर-हनुमन्-माला-मन्त्र’ दिव्य प्रभाव से परिपूर्ण है। इससे सभी प्रकार की बाधा, पीड़ा, दुःख का निवारण हो जाता है। शत्रु-विजय हेतु यह अनुपम अमोघ शस्त्र है। पहले प्रतिदिन इस माला मन्त्र के ११०० पाठ १० दिनों तक कर, दशांश गुग्गुल से ‘हवन’ करके सिद्ध कर ले। फिर आवश्यकतानुसार एक बार पाठ करने पर ‘श्रीहनुमानजी’… Read More