बवासीर नाशक मन्त्र मन्त्रः- “ओम नमो नमो सिद्ध नमो चौरासी उदर जड़ी रक्त सड़ी चूवे मत खड़ी पड़ी तोहे देखे लोना चमारिन धूप गुगल की दी अग्यारी जो रहे बवासीर तो हजार हराम गुरू गोरख की शक्ति आन गौरी माई की।”… Read More


बालज्वर नाशक मन्त्र प्रयोगः— शिशु यंत्र (जो कि ताबीज की तरह होता है) पर केशर का तिलक लगाकर नित्य एक हजार मन्त्र जप करें । इस प्रकार तीन दिन करने पर वह यन्त्र विशेष प्रभावशाली हो जाता है, इसके बाद वह यन्त्र जिस बालक के गले में काले धागे में पहनाया जाय तो बालक का… Read More


दृष्टि मोहन मंत्र विधि – इस मंत्र का 108 बार जाप करते हुए यदि किसी स्त्री से नजर मिलायी जाये तो वह वशीभूत हो जाती है। मंत्र का प्रयोग करने से पूर्व किसी भी शुभ मुर्हत में इस मंत्र को विधिपूर्वक सिद्ध अवश्य कर लेना चाहिए।… Read More


हाजरात का सिद्धि मन्त्र विधिः- इस प्रयोग में बालक/बालिका ही का भी प्रयोग किया जा सकता। काजल को हथेली में वृत्ताकर एक रुपये के सिक्के के बराबर गोलाई में लगाया जा सकता है अथवा नाखून पर भी लगाया जा सकता है। आरम्भ में कज्जल वृत्त में प्रकाश की किरणें फूटती हैं फिर नाग के दर्शन… Read More


जैन वशीकरण मन्त्र विधिः- किसी भी शुभ मुहूर्त में एक काष्ठ पात्र पर यह मंत्र लिखें तथा शुभ मुहूर्त में ही उस काष्ठ-पात्र की स्थापना एक अलग कमरे में करें तथा इसके बायें तरफ पार्श्व-नाथ की प्रतिमा स्थापित करें और मयूर-शिखा का मूल काष्ठपात्र के आगे रखें।… Read More


जल आकर्षण मन्त्र विधिः- इस मन्त्र को ग्रहण के समय 2100 बार जाप करके सिद्ध कर लें, तत्पश्चात् थोड़ा-सा जल लेकर इस मंत्र से 108 बार अभिमन्त्रित कर सोते समय अपने सिरहाने के नीचे रख दें और मध्य रात्रि को उठकर इस जल को पी जाएं । इस तरह 41 दिन तक प्रयोग करने से… Read More


जप द्वारा वशीकरण मन्त्र मन्त्रः- “ऐं सहवल्लरि॥ क्लीं कर ॥ क्लीं काम पिशाच ॥ ‘अमुकी’ काम ग्राह्य॥ स्वप्ने मन रूपे॥ नरवैर्विदारय ॥ नरवैर्विदारय॥ द्रावय-द्रावय ॥ रद महेन॥ बन्धय-बन्धय। श्री फट ॥”… Read More


मिट्टी वशीकरण शाबर मन्त्र मन्त्रः- “काला कलुवा चौसठ बीर ॥ ताल भागी तोर ॥ जहां को भेजू ॥ वहीं को जाए। मांस मज्जा को ॥ शब्द बन जाए । अपना मारा । आप दिखावे ॥ चलत वाण मा। उलट मूठ मारूँ ॥ मार-मार कलवा। तेरी आस चार । चौमुख दीया ॥ मार बांदी की छाती… Read More


मुट्ठी पीर सिद्धि शाबर मन्त्र विधि – यह मंत्र किसी भी गुरुवार की रात्रि मे बबूल वृक्ष के नीचे बैठकर 41 दिन तक प्रतिदिन 2100 की संख्या में जपें । आसन पश्चिम की ओर मुख करके लगायें और सामने सरसों के तेल का दीपक जलायें। बयालीसवें दिन उक्त मंत्र से 108 बार आहूति देकर मंत्र… Read More