श्रीदुर्गा-अष्टोत्तर-शत-नाम-साधना श्रीदुर्गा-अष्टोत्तर-शत-नाम-साधना संकल्पः- ॐ तत्सत् अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्नि-द्वितीय-प्रहरार्द्धे श्वेत-वराह-कल्पे जम्बू-द्वीपे भरत-खण्डे आर्यावर्त-देशे अमुक-पुण्य-क्षेत्रे-कलियुगे कलि-प्रथम-चरणे अमुक-सम्वत्सरे अमुक-मासे अमुक-पक्षे अमुक-तिथौ अमुक-वासरे अमुक-गोत्रो अमुक-(शर्मा, वर्मा, गुप्तो, दासो वा) अहं श्रीदुर्गा-प्रीत्यर्थं अष्टोत्तर-शत-नाम-मन्त्रैः यथा-शक्ति यजनं करिष्ये। विशेषः- अष्टोत्तर-शत-नामावली के नाम-मन्त्रों से पूजन करते समय विनियोग करना चाहिए। यदि नाम-मन्त्रों के द्वारा जप करना हो, तो ‘पूजने विनियोगः’ के स्थान पर ‘जपे विनियोगः’… Read More
श्रीदुर्गा-कवचेश्वरम् श्री दुर्गा कवचम् (रुद्रयामलोक्त) पाठान्तर के साथ ।। श्रीदुर्गा-कवचेश्वरम् ।। ।। पूर्व-पीठिका – श्रीभैरव उवाच ।। अधुना देवि ! वक्ष्येऽहं कवचं मन्त्र-गर्भकम् । दुर्गायाः सार-सर्वस्वं कवचेश्वरसञ्ज्ञकम् ।।१ परमार्थ-प्रदं नित्यं महा-पातक-नाशनम् । योगि-प्रियं योगी-गम्यं देवानामपि दुर्लभम् ।।२ विना दानेन मन्त्रस्य सिद्धिर्देवि ! कलौ भवेत् । धारणादस्य देवेशि शिवस्त्रैलोक्य-नायकः ।।३… Read More
श्री दुर्गा कवचम् (रुद्रयामलोक्त) श्री दुर्गा कवचम् (रुद्रयामलोक्त) ।।श्री भैरव उवाच।। अधुना देवि वक्ष्येऽहं कवचं मन्त्रगर्भकम् । दुर्गायाः सारसर्वस्वं कवचेश्वरसञ्ज्ञकम् ।।१ परमार्थप्रदं नित्यं महापातकनाशनम् । योगिप्रियं योगीगम्यं देवानामपि दुर्लभम् ।।२ विना दानेन मन्त्रस्य सिद्धिर्देवि कलौ भवेत् । धारणादस्य देवेशि शिवस्त्रैलोक्यनायकः ।।३… Read More
देवी-नैवेद्य चैत्रादि मासों, प्रतिपदादि-तिथियों एवं रवि-वारादि दिनों में देवी-नैवेद्य किस तिथि में, किस वार में, कौन-सा नैवेद्य लगाना चाहिए, इसका विवरण यहाँ दिया जा रहा है, जो ‘श्रीमद्-देवी-भागवत’ के आधार पर है। श्रद्धालु-जन इनके अनुसार यथा-सम्भव पूजन कर विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।… Read More
श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र प्रस्तुत मन्त्रात्मक-श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र का सविधि तीनों सन्ध्याओं में पाठ करने से पाठ करने वाले व्यक्ति की सभी कामनाएँ पूर्ण होती है । प्रति सन्ध्या-काल में इस स्तोत्र का पाठ २१-२१ बार करना चाहिए । केवल पहले पाठ में विनियोग से ध्यान तक की प्रारम्भिक क्रिया और अन्तिम पाठ में फल-श्रुति का पाठ करना चाहिए ।… Read More
श्रीचामुण्डा-कवच-स्तोत्रम् श्रीचामुण्डा-कवच-स्तोत्रम् विनियोगः- ॐ अस्य श्रीदेवी-चामुण्डा-कवच-स्तोत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीचामुण्डा देवता, ऐं बीजं, ह्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकं, श्रीचण्डिका-चामुण्डा-प्रीत्यर्थे पाठे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्रीब्रह्मर्षये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीचामुण्डा देवतायै नमः हृदि, ऐं बीजाय नमः गुह्ये, ह्रीं शक्तये नमः पादयो, क्लीं कीलकाय नमः नाभौ, श्रीचण्डिका-चामुण्डा-प्रीत्यर्थे पाठे विनियोगाय नमः सर्वांगे। “ऐं” – बीज से षडङ्ग-न्यास कर… Read More
ब्रह्माण्डविजयं नाम दुर्गाकवचम् ब्रह्माण्डविजयं नाम दुर्गाकवचम् नारायण उवाच श्रृणु नारद वक्ष्यामि दुर्गायाः कवचं शुभम् । श्रीकृष्णेनैव यद् दत्तं गोलोके ब्रह्मणे पुरा ।।१ ब्रह्मा त्रिपुर-संग्रामे शंकराय ददौ पुरा । जघान त्रिपुरं रुद्रो यद् धृत्वा भक्तिपूर्वकम् ।।२ हरो ददौ गौतमाय पद्माक्षाय च गौतमः । यतो बभूव पद्माक्षः सप्तद्वीपेश्वरो जयी ।।३ यद् धृत्वा पठनाद् ब्रह्मा ज्ञानवाञ्छक्तिमान् भुवि । शिवो बभूव सर्वज्ञो… Read More
प्रकृतेर्ब्रह्माण्ड-मोहन-कवचम् प्रकृतेर्ब्रह्माण्ड-मोहन-कवचम् ।। नारद उवाच ।। भगवन् सर्वधर्मज्ञ सर्वज्ञानविशारद । ब्रह्माण्डमोहनं नाम प्रकृतेः कवचं वद ।।१ ।। नारायण उवाच ।। श्रृणु वक्ष्यामि हे वत्स कवचं च सुदुर्लभम् । श्रीकृष्णेनैव कथितं कृपया ब्रह्मणे पुरा ।।२… Read More
श्रीमद्-देवी-भगवत की ज्ञान-दायिनी सिद्ध देवी-स्तुति श्रीमद्-देवी-भगवत की ज्ञान-दायिनी सिद्ध देवी-स्तुति नमो देव्यै प्रकृत्यै च, विधात्र्यै सततं नमः । कल्याण्यै कामदायै च, वृद्ध्यै सिद्ध्यै नमो नमः ।।१ सच्चिदानन्द-रुपिण्यै, संसारारणये नमः । पञ्च-कृत्य-विधात्र्यै ते, भुवनेश्यै नमो नमः ।।२ सर्वाधिष्ठान-रुपायै, कूटस्थायै नमो नमः । अर्ध-मात्रार्थ-भूतायै, हृल्लेखायै नमो नमः ।।३… Read More
श्रीदुर्गे स्मृतेति – मन्त्र की साधना ‘श्रीदुर्गे स्मृतेति’ – मन्त्र की साधना सभी प्रकार के कष्ट-निवारण, आर्थिक-संकट-निवारण हेतुः शुद्ध होकर आसन पर बैठे। आसन-शोधन, आत्म-शोधन की प्रारम्भिक क्रियाएँ कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्रीदुर्गे स्मृतेति मन्त्रस्य विष्णुः ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहा-लक्ष्मी देवता, शाकम्भरी शक्तिः, वायु कीलकं, सकल-संकेत-कष्ट-दारिद्र्य-परिहारार्थं जपे विनियोगः।… Read More