शत्रु-विनाशक आदित्य-हृदय July 31, 2015 | aspundir | Leave a comment शत्रु-विनाशक आदित्य-हृदय ॥ आदित्य हृदय स्तोत्रम् ॥ जब भगवान् राम रावण के साथ युद्ध करते-करते क्लान्त हो गए, तब तान्त्रिक अस्त्र-शस्त्रों के आविष्कारक ऋषि अगस्त्य ने आकर भगवान् राम से कहा कि ‘३ बार जल का आचमन कर, इस ‘आदित्य-हृदय’ का तीन बार पाठ कर रावण का वध करो ।’ राम ने इसी प्रकार किया,… Read More
चक्षुष्मती विद्या July 30, 2015 | aspundir | Leave a comment 1. चक्षुष्मती विद्या ॐ अस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बुध्न्य ऋषिः, गायत्री छन्दः, सूर्यो देवता, ॐ बीजम्, नमः शक्तिः, स्वाहा कीलकम्, चक्षूरोगनिवृत्तये जपे विनियोगः। ॐ चक्षुः चक्षुः चक्षुः तेजः स्थिरो भव। मां पाहि पाहि। त्वरितं चक्षुरोगान् शमय शमय। मम जातरूपं तेजो दर्शय दर्शय। यथाहम् अन्धो न स्यां तथा कल्पय कल्पय। कल्याणं कुरू कुरू। यानि मम पूर्वजन्मोपरर्जितानि चक्षुःप्रतिरोधकदुष्कृतानि सर्वाणि निर्मूलय… Read More
हनुमत साठिका July 30, 2015 | aspundir | Leave a comment ।। अथ श्री हनुमत साठिका ।। ।। चौपाईयाँ ।। जय जय जय हनुमान अडंगी, महावीर विक्रम बजरंगी । जय कपीश जय पवन कुमारा, जय जगवंदन शील आगारा ॥ जय आदित्य अमर अविकारी, अरि मर्दन जय जय गिरधारी । अंजनि उदर जन्म तुम लीन्हा, जय जयकार देवतन कीन्हा ॥ बाजै दुन्दुभि गगन गम्भीरा, सुर मन हर्ष… Read More
संकट मोचन हनुमान् स्तोत्रम् July 30, 2015 | aspundir | Leave a comment संकट मोचन हनुमान् स्तोत्रम् काहे विलम्ब करो अंजनी-सुत । संकट बेगि में होहु सहाई ।। नहिं जप जोग न ध्यान करो । तुम्हरे पद पंकज में सिर नाई ।। खेलत खात अचेत फिरौं । ममता-मद-लोभ रहे तन छाई ।। हेरत पन्थ रहो निसि वासर । कारण कौन विलम्बु लगाई ।। काहे विलम्ब करो अंजनी सुत… Read More
भूतनाथ जी की महिमा July 30, 2015 | aspundir | Leave a comment भूतनाथ जी की महिमा सम्राट् अकबर के समय की घटना है । उस समय से पहले मुर्शिदाबाद और मालदा का प्रान्त गौड़ देश के अन्तर्गत था और गौड़ देश के हिन्दू राजाओं के शासन में था । यह प्रसिद्ध ही है कि अकबर गुण-ग्राही सम्राट् था और हिन्दू-मुसलमान दोनों का, गुणों के अनुसार, समान रुप… Read More
देवी भ्रमर-वासिनी July 30, 2015 | aspundir | Leave a comment देवी भ्रमर-वासिनी (‘दुर्गा-सप्तशती’ के ग्यारहवें अध्याय में महा-माया ने अपने अवतारों की सूचना दी है, उनमें से “भ्रामरी-देवी” सर्व-शेष अवतार है । देवी का कहना है कि वे शेष-अवतार के रुप में षष्टि-तम महायुग में आविर्भूत होंगी । जिस समय अरुण नामक महाऽसुर तीनों लोकों का उत्पीड़न करेगा, उस समय वे जगज्जननी भ्रामरी-रुप से प्रकट… Read More
हनुमान् ज्योतिष July 28, 2015 | aspundir | Leave a comment हनुमान् ज्योतिष विधिः- जिज्ञासु को स्नानादि से शुद्ध होकर “ॐ रां रामाय नमः” मन्त्र का ११ बार जप कर “ॐ हनुमते नमः” का जप करना चाहिए । उसके बाद सम्पूर्ण राम दरबार का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर तर्जनी अंगुली घुमाते एवं मन-ही-मन अपने प्रश्न को दोहराते हुए किसी एक कोष्ठक पर अंगुली रोक… Read More
हनुमान् वडवानल स्तोत्र July 28, 2015 | aspundir | Leave a comment हनुमान् वडवानल स्तोत्र यह स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, शत्रुनाश, दूसरों के द्वारा किये गये पीड़ा कारक कृत्या अभिचार के निवारण, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है । विधिः- सरसों के तेल का दीपक जलाकर १०८ पाठ नित्य ४१ दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट कार्य की… Read More
हनुमत्-मन्त्र-चमत्कार-अनुष्ठान July 28, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीहनुमत्-मन्त्र-चमत्कार-अनुष्ठान (प्रस्तुत विधान के प्रत्येक मन्त्र के ११००० ‘जप‘ एवं दशांश ‘हवन’ से सिद्धि होती है। हनुमान जी के मन्दिर में, ‘रुद्राक्ष’ की माला से, ब्रह्मचर्य-पूर्वक ‘जप करें। नमक न खाए तो उत्तम है। कठिन-से-कठिन कार्य इन मन्त्रों की सिद्धि से सुचारु रुप से होते हैं।) १॰ ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय, वायु-सुताय, अञ्जनी-गर्भ-सम्भूताय, अखण्ड-ब्रह्मचर्य-व्रत-पालन-तत्पराय, धवली-कृत-जगत्-त्रितयाय,… Read More
हनुमान सिद्धि मन्त्र July 28, 2015 | aspundir | 1 Comment हनुमान सिद्धि मन्त्र मन्त्रः- “अजरंग पहनूं, बजरंग पहनूं, सबरंग रक्खू पास । दांये चले भीम सेन, बांये हनुमन्त, आगे चले काजी साहब, पीछे कुल बलारद । आतर चौकी कच्छ कुरान । आगे पीछे तूं रहमान । धड़ खुदा, सिर राखे । सुलेमान, लोहे का कोट, तांबे का ताला, करला । हंसा बीरा । करतल बसे… Read More