शाबर मन्त्र के प्रयोग १. झाड़-फूँक के मन्त्र – (१) जै जगत्-जननी माता झाल देवी ! वीर बजरङ्ग बली की दुहाई । दुई पद और आधा, सब काम किताब से ज्यादा । पार्वती माता के अढ़ी पद-विद्या । आज मेरा फूके, मेरे गुरू जी का फूको । जब फूकू, तब जागे ।” (२) हंस गुरू… Read More


शिव-साबर १. सर्प-विष-हरण मन्त्र “गौरा खेती, शिव की बारी । महादेव तेरी रखवारी । दाव चलावे, दाव बाँधे । पाव चलावें, पाव बाँधे । तलवार चलावे, धार बाँधे । अखाड चलाये, जवान बाँधे । मेरी भक्ति, गुरू की शक्ति । दोहाई नरसिंह, दोहाई गौरा पार्वती की, लाख दोहाई, हो गुरु बङ्गाली !”… Read More


भगवान् श्रीराम के राज्यकाल में अयोध्या का वैभव भगवान् श्रीराम की चरणरज से पवित्रता को प्राप्त श्रीअयोध्यापुरी, जहाँ चारों ओर प्राकृतिक सौन्दर्य अपनी चरम सीमा तक फैला पड़ा है, जिसे निहारकर ऐसा लगता है, जैसे कामदेव और रति ने इसे अपने हाथों से सजाया है । ऐसी परमपावन अयोध्यापुरी जहाँ प्रभु श्रीराम अपनी जीवन-सहचरी श्रीजानकीजी… Read More


शिशु-रोग-निवारक ‘श्रीराम-रक्षा झारा’ मन्त्र :- ‘ॐ रोम-रोम की रक्षा राम जी करें । हाडन की रक्षा हर जी करें । टकान की रक्षा टीकम जी करें । पिण्डरी की रक्षा मोहन जी करें । गोड़न की रक्षा गोवर्धन जी करें । जाँघन की रक्षा जनार्दन जी करें । इन्द्री की रक्षा इन्द्र जी करें ।… Read More


नजर, बुखार में राम-बाण : शाबर मन्त्र :- ‘लोहार, लोहरवा की बेटी ! तोर बाप का करत हय ?’ ‘कोइला काटत हय ।’ ‘ओ कोइला का करी ?’ ‘छप्पन छुरा गढ़ी ।’ ‘ओ छुरा का करी ?’ ‘डीठ काटी, टोना काटी और काटी टापर ।’ दोहाई गुरु धनन्तर की । लोना चमारिन की दोहाई ।… Read More


हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग ब्राह्म-मुहूर्त में उठकर, ‘सन्ध्या-वन्दनादि’ नित्य क्रिया करने के उपरान्त साधक नदी किनारे जाए। नदी में स्नान करके, ‘तीर्थ-आवाहन’ कर आठ बार मूल-मन्त्र का जप करे। फिर मूल-मन्त्र जपते हुए बारह बार अपने मस्तक पर जल के द्वारा ‘अभिषेक’ करे। अभिषेक करने के बाद वस्त्र धारण कर नदी के किनारे बैठ- ‘ह्रां… Read More


श्रीगायत्री-मन्त्र से रोग-ग्रह-शान्ति १॰ क्रूर से क्रूर ग्रह-शान्ति में, शमी-वृक्ष की लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े कर, गूलर-पाकर-पीपर-बरगद की समिधा के साथ ‘गायत्री-मन्त्र से १०८ आहुतियाँ देने से शान्ति मिलती है। २॰ महान प्राण-संकट में कण्ठ-भर या जाँघ-भर जल में खड़े होकर नित्य १०८ बार गायत्री मन्त्र जपने से प्राण-रक्षा होती है। ३॰ घर के आँगन… Read More


श्री परशुराम प्रयोग भगवान् परशुराम की उपासना के फल-स्वरुप साधक अपनी विविध कामनाओं की पूर्ति करते है। यथा-सन्तान, विवाह, कृषि, वर्षा, ऐश्वर्य, वाक्-सिद्धि, स`र्व-शत्रुओं का नाश, रोगों का निवारण आदि।… Read More