कुलगुरु January 27, 2016 | aspundir | Leave a comment ।। श्री क्रम के कुलगुरु ।। श्रीकुल साधकों के कुल गुरु इस प्रकार है- दिव्यौघगुरु – १. परप्रकाशानंदनाथ २. परशिवानंदनाथ ३. पराशक्त्यम्ब ४. कौलेश्वरानंदनाथ ५. शुक्लदेव्यम्ब ६. कुलेश्वरानंदनाथ ७. कामेश्वर्यम्बा ।… Read More
श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः January 27, 2016 | aspundir | Leave a comment ।। श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादिगुरुत्रयं गणपतिं पीठत्रयं भैरवं, सिद्धौघं वटुकत्रयं पदयुगं दूतीक्रमं मण्डलम् । वीरानष्टचतुकषष्टिनवकं वीरावलीपञ्चकं, श्रीमन्मालिनि मन्त्रराजसहितं वन्दे गुरोर्मण्डलम् ।। (उपर्युक्त ‘ श्रीनाथादिगुरुत्रय० ‘ गुरुमण्डल के अर्चन का रहस्यमय ‘ मन्त्र ‘ है ।)… Read More
विविध कीलन January 27, 2016 | aspundir | Leave a comment विविध कीलन मन्त्रः- “भय कीलूँ, भैसासुर कीलूँ । कीलूँ अपनी काया । जागता मसान कीलूँ, जिसकी बैठूँ छाया । बलिहारी मुहम्मदा बीर की, कीलूँ पवन बावरी, मन चाहे जहाँ डोलूँ, दुष्ट की मुष्ट कीलूँ । मेरे कीले न कीलै, तो अपनी माँ के सङ्ग हराम करे, दुहाई मुहम्मदा वीर की ।।”… Read More
भूत-प्रेतादि बाँधना तथा झाड़ना January 27, 2016 | aspundir | Leave a comment शाबर-मन्त्र-वल्लरी भूत-प्रेतादि बाँधना तथा झाड़ना मन्त्रः- “बाद करत बादी चले, नौ सौ ढाल मढाय । जाते मारै बादिया औ करै बदिनियाँ राँड़ ।। पाँच बरस का बालक मारे, गर्भै करै अहार । देव को बाँध, देवी को बाँध, भूत को बाँध, चुड़ैल को बाँध ।। किए-कराए को बाँध, गली-घाट को बाँध । कब्जे मे कर… Read More
भूत-प्रेत पकड़ना तथा झाड़ना January 27, 2016 | aspundir | Leave a comment शाबर-मन्त्र-वल्लरी भूत-प्रेत पकड़ना तथा झाड़ना मन्त्रः- “जभी बुलाए, तब न आए और आए आधी रात, लौंग सुपाड़ी नारियल । बीरा लेत अकास, धाय बीर आकास जाय और धाय बीर पाताल, धाय बीर चोटी गहै, भूत पकड़, देव पकड़, देवी पकड़, चड़ैल पकड़, किए कराए को पकड़, जादू – टोना को पकड़, मरही मसान को पकड़,… Read More
देवर्षि नारद January 26, 2016 | aspundir | Leave a comment देवर्षि नारद मङ्ल-मूर्ति नारदजी श्रीभगवान् के मन के अवतार हैं । कृपा-मय प्रभु जो कुछ करना चाहते हैं, सर्वज्ञ और सर्वदर्शी वीणा-पाणि नारदजी के द्वारा वैसी ही चेष्टा होती है । श्रीमद्भागवतमें कहा गया है – तृतीयमृषिसर्गं च देवर्षित्वमुपेत्य स: । तन्त्रं सात्वतमाचष्ट नैष्कर्म्यं कर्मणां यत: ।। (१ । ३ । ८)… Read More
सिर-दर्द-नाशक मन्त्र January 26, 2016 | aspundir | Leave a comment सिर-दर्द-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “लङ्का में बैठ के माथ हिलावै हनुमन्त, सो देखि के राक्षस-गण पराय तुरन्त । बैठी सीता देवी अशोक वन में, देखि हनुमान को आनन्द भई मन में । गई उर विषाद, देवी स्थिर दरशाय । अमुक के नहिं कछु पीर, नहिं कछु भार । आदेश कामाख्या हरिदासी चण्डी की दुहाई ।।”… Read More
देह बाँधना January 26, 2016 | aspundir | Leave a comment देह बाँधना मन्त्रः- “धार राखै बारका, सीस राखै सोखा बीर । नाड़ी राखै नाहर सिंह, कपाल राखै, जोगनी । आगा राखै इन्द्र सिंह, पाछा राखै भीम सिंह । बारा कोस अगाड़ी राख, बारा कोस पिछाड़ी राख । तू जो कहै गौरा, मेरा प्रण न राखै, तो गौरा पारबती महा-देव की आन ।।”… Read More
अखाड़ा खोलना January 26, 2016 | aspundir | 1 Comment अखाड़ा खोलना मन्त्रः- “उल्टा घोड़ा, उल्टा पीर । उल्टा चले मुहमदा पीर । मैं कहूं अखाड़े को खोल, न खोले तो बीबी फातिमा की आन, सुअर की चर्सा पर नमाज पढ़ै ।।”… Read More
कुश्ती जीतना तथा अखाड़ा बाँधना January 26, 2016 | aspundir | Leave a comment शाबर-मन्त्र-वल्लरी कुश्ती जीतना तथा अखाड़ा बाँधना मन्त्रः- “ॐ महाबीर रणधीर बाँके पहलवान, आकाश बाँध, पाताल बाँध, अखाड़े के चारों कोने बाँध, दुश्मन का सीना बाँध, हाथ बाँध, पांव बाँध, निगाह बाँध, इतने बाँध के जेर न करे, तो माता अञ्जनी का दूध हराम करे, राजा रामचन्द्र जी की दुहाई ।।”… Read More