फूल मोहन शाबर मन्त्र मन्त्र (१) —  “ॐ नमो कामरू देश कामाक्षा देवी, तहाँ बसे इस्माइल जोगी । इस्माइल जोगी ने लगाई फुलवारी, फूल बीने लोना चमारी, जो इस पुल की सूँघे बास, तीसका जीव हमारे पास । घर छोड़े आंगन छोड़े, लोक-कुटुम्ब की लज्जा छोड़े । दुहाई लोना चमारों की । दुहाई धनवन्तरी की, छू… Read More


गुड़ मोहन शाबर मन्त्र विधिः- सर्वप्रथम मद्य, गुड़ की लपसी, कलेजी या मांस यह सब सामग्री एकत्र कर ‘पूजा’ के कमरे में रखे । फिर स्वच्छ कमरे में स्नानादि कर आसन पर बैठे । एक लकड़ी के पाटे के ऊपर वस्त्र बिछा कर उसके ऊपर ‘दीपक’ जलाए । लोबान की धूनी रखे । एक पात्र… Read More


लड्डू सम्मोहन शाबर मन्त्र विधिः- गणेश जी की मूर्ति बनाए । बाद में गणेश जी का व्रत करे । मूर्ति की पूजा करे । धूप-दीप-फल-फूल चढ़ाए । फिर यथाशक्ति उक्त मन्त्र का ‘जप’ करे । नैवेद्य में २१ लड्डुओं को अर्पित करे । प्रत्येक लड्डू पर ११-११ बार मन्त्र जप’ कर अभिमन्त्रित करे । इन… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय भागवत के दस लक्षण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इस भागवतपुराण में सर्ग, विसर्ग, स्थान, पोषण, ऊति, मन्वन्तर, ईशानुकथा, निरोध, मुक्ति और आश्रय — इन दस विषयों का वर्णन है ॥ १ ॥ इनमें जो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय ब्रह्माजी का भगवद्धामदर्शन और भगवान् के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवत का उपदेश श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! जैसे स्वप्न में देखे जानेवाले पदार्थों के साथ उसे देखनेवाले का कोई सम्बन्ध नहीं होता, वैसे ही देहादि… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय राजा परीक्षित् के विविध प्रश्न राजा परीक्षित् ने कहा — भगवन् ! आप वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ । मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि जब ब्रह्माजी ने निर्गुण भगवान् के गुणों का वर्णन करने के लिये… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय भगवान् के लीलावतारों की कथा ब्रह्माजी कहते हैं — अनन्त भगवान् ने प्रलय के जल में डूबी हुई पृथ्वी का उद्धार करने के लिये समस्त यज्ञमय वराह-शरीर ग्रहण किया था । आदिदैत्य हिरण्याक्ष जल के अंदर… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय विराट्स्वरूप की विभूतियों का वर्णन ब्रह्माजी कहते हैं — उन्हीं विराट् पुरुष के मुख से वाणी और उसके अधिष्ठातृदेवता अग्नि उत्पन्न हुए हैं । सातों छन्द… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय सृष्टि-वर्णन नारदजी ने पूछा — पिताजी ! आप केवल मेरे ही नहीं, सबके पिता, समस्त देवताओं से श्रेष्ठ एवं सृष्टिकर्ता हैं । आपको मेरा प्रणाम है । आप मुझे यह ज्ञान दीजिये, जिससे आत्मतत्त्व का साक्षात्कार… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय राजा का सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजी का कथारम्भ सूतजी कहते हैं — शुकदेवजी के वचन भगवत्तत्त्व का निश्चय करानेवाले थे । उत्तरानन्दन राजा परीक्षित् ने उन्हें सुनकर अपनी शुद्ध बुद्धि भगवान् श्रीकृष्ण के चरणों में अनन्यभाव… Read More