शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय विभिन्न पुष्पों, अन्नों तथा जलादि की धाराओं से शिवजी की पूजा का माहात्म्य ऋषिगण बोले — हे महाभाग ! हे व्यासशिष्य ! आप सप्रमाण हमें यह बतायें कि किन-किन पुष्पों से पूजन करने पर भगवान् सदाशिव कौन-कौन-सा फल प्रदान… Read More


॥ त्रि-त्रिंशदक्षर त्र्यम्बक मन्त्र प्रयोगः ॥ शारदातिलक मन्त्र:- “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥” ऋचा के पहले ॐ लगायें । आगे व पीछे दोनों ओर ॐ लगाने से ३४ अक्षर का मन्त्र हुआ । विनियोगः – ॐ अस्य त्र्यम्बक मन्त्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, अनुष्टप् छन्दः त्र्यम्बकपार्वतीपतिर्देवता, त्र्यं बीजं, बं शक्तिः, कं कीलकं… Read More


॥ मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद ॥ मृत्युञ्जयस्त्रिधा प्रोक्त आद्यो मृत्युञ्जयः स्मृतः । मृतसञ्जीवनी चैव महामृत्युञ्जयस्तथा ॥ मृत्युञ्जयः केवलः स्यात् पुटितो व्याहृतित्रयैः । तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितो मृतसञ्जीवनी ॥ तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितैस्तैस्त्र्यम्बकः । महामृत्युञ्जयः प्रोक्तः सर्वमन्त्रविशारदैः ॥ उक्त उद्धार मन्त्रों के अनुसार ‘त्र्यम्बक यजामहे..’ ऋचा को आद्य व अन्त में व्याहृति ‘भूर्भुवः स्वः’ से संपुटित… Read More


॥ मृत्युञ्जय मन्त्र – अन्य मन्त्र ॥ Continue :- मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद नवाक्षरी मृत्युञ्जय – ॐ जूं सः पालय पालय । दशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्र – ॐ जूं सः मां पालय पालय । (किसी अन्य के लिये ‘मां’ के स्थान पर रोगी का नाम द्वितीया विभक्ति का एक वचन बनाकर जोड़ देना चाहिये) द्वादशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्रः –… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय शिवपूजन की सर्वोत्तम विधि का वर्णन ब्रह्माजी बोले — अब मैं पूजा की सर्वोत्तम विधि बता रहा हूँ, जो समस्त अभीष्ट सुखों को सुलभ करानेवाली है । हे देवताओ तथा ऋषियो ! आपलोग ध्यान देकर सुनें ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 12 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बारहवाँ अध्याय भगवान् शिव की श्रेष्ठता तथा उनके पूजन की अनिवार्य आवश्यकता का प्रतिपादन नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे प्रजापते ! हे तात ! आप धन्य हैं; क्योंकि आपकी बुद्धि भगवान् शिव में लगी हुई है । हे विधे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 11 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः ग्यारहवाँ अध्याय शिवपूजन की विधि तथा उसका फल ऋषि बोले — हे व्यासशिष्य महाभाग सूतजी ! आपको नमस्कार है, आज आपने भगवान् शिव की अद्भुत एवं परम पवित्र कथा सुनायी है ॥ १ ॥ उसमें अद्भुत, महादिव्य तथा कल्याणकारिणी लिंगोत्पत्ति हमलोगों… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 10 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दसवाँ अध्याय श्रीहरि को सृष्टि की रक्षा का भार एवं भोग-मोक्ष-दान का अधिकार देकर भगवान् शिव का अन्तर्धान होना परमेश्वर शिवजी बोले — उत्तम व्रत का पालन करनेवाले हे हरे ! हे विष्णो ! अब आप मेरी दूसरी आज्ञा सुनें ।… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 09 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः नौवाँ अध्याय उमासहित भगवान् शिव का प्राकट्य, उनके द्वारा अपने स्वरूप का विवेचन तथा ब्रह्मा आदि तीनों देवताओं की एकता का प्रतिपादन ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] भगवान् विष्णु के द्वारा की हुई अपनी स्तुति सुनकर करुणानिधि महेश्वर प्रसन्न हुए और… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 08 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः आठवाँ अध्याय ब्रह्मा और विष्णु को भगवान् शिव के शब्दमय शरीर का दर्शन ब्रह्माजी बोले — मुनिश्रेष्ठ नारद ! इस प्रकार हम दोनों देवता गर्वरहित हो निरन्तर प्रणाम करते रहे । हम दोनों के मन में एक ही अभिलाषा थी कि… Read More