अर्द्धनारीश्वर August 14, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ अर्द्धनारीश्वर ॥ (शिव तन्त्रे) मंत्र – (षडाक्षर) ‘रक्षं मं यं औं ऊं’ (मतांतरे शारद तिलके – ऊः) विनियोग – ॐ अर्द्धनारीश्वर मंत्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टप् छंदः अर्द्धनारीश्वर देवता सर्वाभीष्ट सिद्धये जपे विनियोगः । ऋषिन्यासः – कश्यप ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टप् छंदसे नमः मुखे, अर्द्धनारीश्वर देवतायै नमः हृदि, विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे । अङ्गन्यासः – मंत्र… Read More
मंजुघोष प्रयोगः August 14, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ अथ मंजुघोष प्रयोगः ॥ मंजुघोष का प्रयोग शिव प्रयोगों में विद्या प्राप्ति हेतु विशेष माना जाता है । इस . विषय में शिव कहते है – श्रुणु देवि ! महामंत्रं साधकानां सुखावहम् । यज्ज्ञात्वा जड़धीः प्रायो वाचस्पति समो भवेत् ॥ जपेत् सिद्धिप्रदं सद्यो वैष्णवं सात्विकात्मकम् । शैवसिद्धिप्रदं सद्यस्तामसं समुदाहृतम् ॥ अर्थात् इसकी सात्विक उपासना… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 20 August 12, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का ‘रुद्रशिर’ नाम पड़ने का कारण, सती एवं शिव का विवाहोत्सव, विवाह के अनन्तर शिव और सती का वृषभारूढ़ हो कैलास के लिये प्रस्थान नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाभाग ! हे शिवभक्त… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 19 August 12, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय शिव का सती के साथ विवाह, विवाह के समय शम्भु की माया से ब्रह्मा का मोहित होना और विष्णु द्वारा शिवतत्त्व का निरूपण ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इस प्रकार कन्यादानकर दक्ष ने भगवान् शंकर को अनेक प्रकार के… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 18 August 12, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय देवताओं और मुनियोंसहित भगवान् शिव का दक्ष के घर जाना, दक्ष द्वारा सबका सत्कार एवं सती तथा शिव का विवाह नारदजी बोले — जब आप भगवान् रुद्र के पास गये, तब क्या चरित्र हुआ, हे तात ! कौन-सी बात… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 17 August 12, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय भगवान् शिव द्वारा सती को वर-प्राप्ति और शिव का ब्रह्माजी को दक्ष प्रजापति के पास भेजना ब्रह्माजी बोले — इस प्रकार मैंने सभी देवताओं के द्वारा की गयी शिवजी की उत्तम स्तुति को आपसे कह दिया । हे मुने… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 16 August 12, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय ब्रह्मा और विष्णु द्वारा शिव से विवाह के लिये प्रार्थना करना तथा उनकी इसके लिये स्वीकति ब्रह्माजी बोले — भगवान् विष्णु आदि देवताओं द्वारा की गयी स्तुति को सुनकर सबकी उत्पत्ति करनेवाले भगवान् शंकर बड़े प्रसन्न हुए और जोर… Read More
वीरभद्र मंत्र प्रयोगः August 11, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ वीरभद्र मंत्र प्रयोगः ॥ शत्रुनाश हेतु विशेष प्रयोग विधि भैरव प्रपंचसार तंत्र व आकाशभैरव कल्पादि तंत्रो में देखें। विनियोग:- अस्य श्री वीरभद्र मंत्रस्य ब्रह्माऋषिः, अनुष्टुप्छंदः, वीरभद्रोदेवता सर्वशत्रुक्षयार्थे जपे विनियोगः । मंत्र: – (३२ अक्षरात्मक) “ॐ वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोपं सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा ।” षडङ्गन्यासः – ॐ वीरभद्राय हृदयाय नमः । अतिक्रूराय शिरसे… Read More
श्रीसुब्रह्मण्य (कार्तिकेय)-साधना August 11, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ श्रीसुब्रह्मण्य (कार्तिकेय)-साधना ॥ विनियोगः- ॐ अस्य श्रीसुब्रह्मण्यमंत्रस्य श्रीअग्निः ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्रीसुब्रह्मण्य देवता, ॐ बीजं वं शक्तिः, श्रीसुब्रह्मण्यदेवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः – श्रीअग्निऋषये नमः शिरसि । गायत्री छन्दसे नमः मुखे । श्रीसुब्रह्मण्यदेवतायै नमः हृदि । ॐ बीजाय नमःगुह्ये । वं शक्तये नमः नाभौ । श्रीसुब्रह्मण्यदेवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।… Read More
श्रीमहाशास्त्रनुग्रहकवचम् स्तोत्रम् August 11, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ श्रीमहाशास्त्रनुग्रहकवचम् स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ भगवन् देवदेवेश सर्वज्ञ त्रिपुरान्तक । प्राप्ते कलियुगे घोरे महाभूतैः समावृते ॥ १ ॥ महाव्याधिमहाव्याळघोरराजैः समावृते । दुःस्वर्प्नशोकसन्तापैः दुर्विनीतैः समावृते ॥ २ ॥ स्वधर्मविरते मार्गे प्रवृत्ते हृदि सर्वदा । तेषां सिद्धिञ्च मुक्तिञ्चत्वं मे ब्रूहिवृषद्वज ॥ ३ ॥… Read More