॥ एकाक्षर गणपति कवचम् अथवा त्रैलोक्यमोहन कवचम् ॥ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ नमस्तस्मै गणेशाय सर्वविघ्नविनाशिने । कार्यारम्भेषु सर्वेषु पूजितो यः सुरैरपि ॥ १॥ ॥ पार्वत्युवाच॥ भगवन् देवदेवेश लोकानुग्रहकारकः । इदानी श्रोतृमिच्छामि कवचं यत्प्रकाशितम् ॥ २॥ एकाक्षरस्य मन्त्रस्य त्वया प्रीतेन चेतसा । वदैतद्विधिवद्देव यदि ते वल्लभास्म्यहम् ॥ ३॥… Read More


॥ शत्रुसंहारकमेकदन्तस्तोत्रम् ॥ ॥ सनत्कुमार उवाच ॥ श‍ृणु शम्भ्वादयो देवा मदासुरविनाशने । उपायं कथयिष्यामि तत्कुरुध्वं मुनीश्वराः ॥ १ ॥ गणेशं पूजयध्वं वै यूयं सर्वे समावृताः । स बाह्यान्तरसंस्थो वै हनिष्यति मदासुरम् ॥ २ ॥ सनत्कुमारवाक्यं तच्छ्रुत्वा देवर्षिसत्तमाः । ऊचुस्तं प्रणिपत्यादौ भक्तिनम्रात्मकन्धराः ॥ ३ ॥… Read More


॥ विघ्न-निवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् ॥ विघ्नेश विघ्नचयखण्डननामधेय श्रीशङ्करात्मज सुराधिपवन्द्यपाद । दुर्गामहाव्रतफलाखिलमङ्गलात्मन् विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥ १ ॥… Read More


॥ उच्छिष्ट गणेशस्तवराजः ॥ ॥ देव्युवाच ॥ पूजान्ते ह्यनया स्तुत्या स्तुवीत गणनायकम् । नमामि देवं सकलार्थदं तं सुवर्णवर्णं भुजगोपवीतम् । गजाननं भास्करमेकदन्तं लम्बोदरं वारिभवासनं च ॥ १ ॥… Read More


॥ श्रीउच्छिष्ट गणपति सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीभैरव उवाच ॥ श‍ृणु देवि रहस्यं मे यत्पुरा सूचितं मया । तव भक्त्या गणेशस्य वक्ष्ये नामसहस्रकम् ॥ १॥ ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ ॐ भगवन्गणनाथस्य उच्छिष्टस्य महात्मनः । श्रोतुं नाम सहस्रं मे हृदयं प्रोत्सुकायते ॥ २॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय मेना की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी का उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन देकर वरदान देना, मेना से मैनाक का जन्म नारदजी बोले —  हे तात ! जब देवी दुर्गा अन्तर्धान हो गयीं और देवगण अपने-अपने धाम को चले गये, उसके… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय उमादेवी का दिव्यरूप में देवताओं को दर्शन देना और अवतार ग्रहण करने का आश्वासन देना ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इस प्रकार देवताओं के द्वारा स्तुति किये जाने पर दुर्ग नामक राक्षस के द्वारा उत्पन्न संकट का नाश करनेवाली… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय विष्णु आदि देवताओं का हिमालय के पास जाना, उन्हें उमाराधन की विधि बता स्वयं भी देवी जगदम्बा की स्तुति करना नारदजी बोले — हे विधे ! हे प्राज्ञ ! हे महाबुद्धिमान् ! हे वक्ताओं में श्रेष्ठ ! इसके बाद… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय पितरों की तीन मानसी कन्याओं – मेना, धन्या और कलावती के पूर्वजन्म का वृत्तान्त तथा सनकादि द्वारा प्राप्त शाप एवं वरदान का वर्णन नारदजी बोले — हे महाप्राज्ञ ! हे विधे ! अब आदरपूर्वक मेना की उत्पत्ति का वर्णन… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय पितरों की कन्या मेना के साथ हिमालय के विवाह का वर्णन नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! अपने पिता के यज्ञ में शरीर का त्यागकर दक्षकन्या सती देवी जगदम्बा किस प्रकार हिमालय की पुत्री बनीं और किस तरह अत्यन्त… Read More