शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 27 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्ताईसवाँ अध्याय जटाधारी ब्राह्मण द्वारा पार्वती के समक्ष शिवजी के स्वरूप की निन्दा करना पार्वती बोलीं — हे द्विजेन्द्र ! हे जटिल ! मेरा समस्त वृत्तान्त सुनें । इस समय मेरी सखी ने जो कुछ भी कहा है, वह सब सत्य… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 26 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छब्बीसवाँ अध्याय पार्वती की परीक्षा लेने के लिये भगवान् शिव का जटाधारी ब्राह्मण का वेष धारणकर पार्वती के समीप जाना, शिव-पार्वती-संवाद ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! उन मुनियों के अपने-अपने लोक चले जाने पर जगत्स्रष्टा प्रभु शिव ने स्वयं पार्वती… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 25 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पच्चीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर की आज्ञा से सप्तर्षियों द्वारा पार्वती के शिवविषयक अनुराग की परीक्षा करना और वह वृत्तान्त भगवान् शिव को बताकर स्वर्गलोक जाना नारदजी बोले — [हे ब्रह्मन् !] उन ब्रह्मा, विष्णु आदि देवताओं तथा सभी मुनियों के प्रेमपूर्वक… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 24 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौबीसवाँ अध्याय देवताओं का भगवान् शिव से पार्वती के साथ विवाह करने का अनुरोध, भगवान् का विवाह के दोष बताकर अस्वीकार करना तथा उनके पुनः प्रार्थना करने पर स्वीकार कर लेना ॥ देवा ऊचुः ॥ नमो रुद्राय देवाय मदनांतकराय च ।… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय हिमालय आदि का तपस्यानिरत पार्वती के पास जाना, पार्वती का पिता हिमालय आदि को अपने तप के विषय में दृढ़ निश्चय की बात बताना, पार्वती के तप के प्रभाव से त्रैलोक्य का संतप्त होना, सभी देवताओं का भगवान् शंकर… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 22 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बाईसवाँ अध्याय पार्वती की तपस्या एवं उसके प्रभाव का वर्णन ब्रह्माजी बोले — हे देवर्षे ! आपके चले जाने पर प्रसन्नचित्त पार्वती ने शिवजी को तपस्या से ही साध्य माना और तपस्या करने का मन बना लिया । तदनन्तर पार्वती ने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 21 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इक्कीसवाँ अध्याय कामदेव के भस्म हो जाने पर पार्वती का अपने घर आगमन, हिमवान् तथा मेना द्वारा उन्हें धैर्य प्रदान करना, नारद द्वारा पार्वती को पंचाक्षर मन्त्र का उपदेश नारदजी बोले — हे विधे ! हे तात ! हे महाप्राज्ञ !… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय शिव की क्रोधाग्नि का वडवारूप-धारण और ब्रह्मा द्वारा उसे समुद्र को समर्पित करना नारदजी बोले — हे विधे ! भगवान् हर के [तृतीय] नेत्र से निकली हुई वह अग्नि की ज्वाला कहाँ गयी ? आप चन्द्रशेखर के उस चरि… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय भगवान् शिव की नेत्रज्वाला से कामदेव का भस्म होना और रति का विलाप, देवताओं द्वारा रति को सान्त्वना प्रदान करना और भगवान् शिव से काम को जीवित करने की प्रार्थना करना नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय कामदेव द्वारा असमय में वसन्त-ऋतु का प्रभाव प्रकट करना, कुछ क्षण के लिये शिव का मोहित होना, पुनः वैराग्य-भाव धारण करना ब्रह्माजी बोले — शिवजी की माया से मोहित होकर वह महाभिमानी तथा मोह उत्पन्न करनेवाला काम शिवजी के… Read More