शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 37 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] सैंतीसवाँ अध्याय योगके अनेक भेद, उसके आठ और छः अंगोंका विवेचन – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, दशविध प्राणोंको जीतनेकी महिमा, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधिका निरूपण श्रीकृष्णने कहा— भगवन् ! आपने ज्ञान, क्रिया और चर्याका संक्षिप्त सार… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 36 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] छत्तीसवाँ अध्याय शिवलिंग एवं शिवमूर्तिकी प्रतिष्ठाविधिका वर्णन श्रीकृष्ण बोले – [ हे भगवन् ! ] मैं लिंग तथा मूर्तिकी उत्तम प्रतिष्ठाविधिको सुनना चाहता हूँ, जिसे शिवजीने कहा था ॥ १ ॥ उपमन्यु बोले— [हे कृष्ण ! ]… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 35 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] पैंतीसवाँ अध्याय लिंगमें शिवका प्राकट्य तथा उनके द्वारा ब्रह्मा-विष्णुको दिये गये ज्ञानोपदेशका वर्णन उपमन्यु बोले – [ हे कृष्ण ! ] तदुपरान्त वहाँपर ब्रह्मतत्त्वका प्रतिपादक, नादमय, एकाक्षरात्मक शब्द- ब्रह्म ओंकार प्रकट हुआ ॥ १ ॥ उस समय… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 34 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] चौंतीसवाँ अध्याय मोहवश ब्रह्मा तथा विष्णुके द्वारा लिंगके आदि और अन्तको जाननेके लिये किये गये प्रयत्नका वर्णन उपमन्यु बोले – [हे कृष्ण !] नित्य नैमित्तिक तथा काम्यव्रतसे जो सिद्धि यहाँ कही गयी है, वह सब लिंग अथवा… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 33 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] तैंतीसवाँ अध्याय पारलौकिक फल देनेवाले कर्म- शिवलिंग- महाव्रतकी विधि और महिमाका वर्णन उपमन्यु कहते हैं – यदुनन्दन ! अब मैं केवल परलोकमें फल देनेवाले कर्मकी विधि बतलाऊँगा। तीनों लोकोंमें इसके समान दूसरा कोई कर्म नहीं है ॥… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 32 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] बत्तीसवाँ अध्याय ऐहिक फल देनेवाले कर्मों और उनकी विधिका वर्णन, शिव – पूजनकी विधि, शान्ति-पुष्टि आदि विविध काम्य कर्मोंमें विभिन्न हवनीय पदार्थोंके उपयोगका विधान उपमन्यु कहते हैं — हे श्रीकृष्ण ! यह मैंने तुमसे इहलोक और परलोकमें… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 31 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] इकतीसवाँ अध्याय शिवके पाँच आवरणोंमें स्थित सभी देवताओंकी स्तुति तथा उनसे अभीष्टपूर्ति एवं मंगलकी कामना उपमन्युरुवाच स्तोत्रं वक्ष्यामि ते कृष्ण पञ्चावरणमार्गतः । योगेश्वरमिदं पुण्यं कर्म येन समाप्यते ॥ उपमन्यु कहते हैं – हे श्रीकृष्ण ! अब मैं… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 30 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] तीसवाँ अध्याय आवरणपूजाकी विस्तृत विधि तथा उक्त विधिसे पूजनकी महिमाका वर्णन उपमन्यु कहते हैं— [ यदुनन्दन !] पहले शिवा और शिवके दायें और बायें भागमें क्रमशः गणेश और कार्तिकेयका गन्ध आदि पाँच [उपचारों ] – द्वारा पूजन… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 29 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] उनतीसवाँ अध्याय काम्यकर्मका वर्णन श्रीकृष्ण बोले – हे भगवन् ! मैंने आपके मुखसे शिवभक्तोंके लिये शिवद्वारा कही गयी वेदतुल्य प्रामाणिक नित्यनैमित्तिक विधिका श्रवण किया, अब मैं शिवधर्मके अधिकारियोंका जो भी काम्य कर्म है, उसे सुनना चाहता हूँ,… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 28 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] अट्ठाईसवाँ अध्याय शिवाश्रमसेवियोंके लिये नित्य – नैमित्तिक कर्मकी विधिका वर्णन उपमन्यु बोले – [ हे कृष्ण ! ] अब मैं शिवाश्रमका सेवन करनेवालोंके लिये शिवशास्त्रमें कथित मार्गसे नैमित्तिकविधिक्रमका वर्णन करूँगा ॥ १ ॥ सभी मासोंमें दोनों ही… Read More