श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-09 July 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-09 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ नवाँ अध्याय सती का पिता के घर पहुँचना, माता प्रसूति द्वारा सती का सत्कार करना तथा यज्ञ-विध्वंस के भयंकर स्वप्न को सुनाना, दक्ष द्वारा शिव की निन्दा । क्रुद्ध सती द्वारा छाया सती का प्रादुर्भाव और उसे यज्ञ नष्ट करने की आज्ञा देकर अन्तर्धान हो… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-08 July 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-08 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ आठवाँ अध्याय भगवान् शंकर द्वारा सती का दक्ष के घर जाने को अनुचित बताना, देवी सती के विराट रूप को देखकर शंकर का भयभीत होना, सती द्वारा काली, तारा आदि अपने दस स्वरूपों (दस महाविद्याओं) को प्रकट करना, देवी का यज्ञ-भूमि के लिए प्रस्थान अथ… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-07 July 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-07 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सातवाँ अध्याय भगवती सती तथा भगवान् शिव का आनन्द विहार, दक्ष द्वारा यज्ञ करने और उसमें शंकर को न बुलाने का निश्चय करना, महर्षि दधीचि द्वारा दक्ष की निन्दा, नारद जी द्वारा सती को पिता के यज्ञ में जाने के लिए प्रेरित करना अथ सप्तमोऽध्यायः… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-06 July 29, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-06 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छठा अध्याय सती के साथ भगवान् शिव का हिमालय पर्वत पर आना, सभी देवों का हिमालय पर विवाहोत्सव में पहुँचना, नन्दी द्वारा हिमालय पर आकर शिव की स्तुति करना और शंकर द्वारा उनको प्रमथाधिपतिपद प्रदान करना अथ षष्ठोऽध्यायः श्रीशिवनारदसंवादे नन्दिकेश्वरवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — हिमालय… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-05 July 28, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-05 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पाँचवाँ अध्याय दक्षप्रजापति की शिव के प्रति द्वेषबुद्धि, महर्षि दधीचि द्वारा दक्ष को समझाना तथा भगवान् शिव के माहात्म्य को बताना अथ पञ्चमोऽध्यायः श्रीशिवनारदसंवादे दक्षप्रजापतिविषादवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — तदनन्तर भगवान् शंकर और सती की भर्त्सना करते हुए क्षीण पुण्यवाले दक्षप्रजापति दुःख से व्याकुल होकर… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-04 July 28, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-04 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौथा अध्याय दक्ष प्रजापति की तपस्या से प्रसन्न भगवती शिवा का “सती” नाम से उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेना, भगवती सती एवं भगवान् शिव की परस्पर प्रीति अथ चतुर्थोऽध्यायः श्रीशिवनारदसंवादे सतीविवाहवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — एक बार की बात है जगत् की सृष्टि करने… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-03 July 28, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-03 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तीसरा अध्याय देवीमाहात्म्य-वर्णन, देवी द्वारा त्रिदेवों को सृष्ट्यादि के कार्यों में नियुक्त करना, आदिशक्ति का गङ्गा आदि पाँच रूपों में विभक्त होना, ब्रह्माजी के शरीर से मनु तथा शतरूपा का प्रादुर्भाव, दक्ष की कन्याओं से सृष्टि का विस्तार, आदिशक्ति द्वारा भगवान् शंकर को भार्यारूप में… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-02 July 28, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-02 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ दूसरा अध्याय महामुनि जैमिनि द्वारा श्रीवेदव्यास जी से शिव-नारद-संवाद के रूप में वर्णित देवी के माहात्म्य वाले महाभागवत को सुनाने की प्रार्थना करना अथ द्वितीयोऽध्यायः श्रीव्यासजैमिनीसंवादे व्रतोपासनावर्णनं सूतजी बोले — बहुत से पौराणिक आख्यानों का श्रवण (सुनना) कर लेने के बाद मुनिश्रेष्ठ जैमिनि ने भूमि… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-01 July 28, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-01 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पहला अध्याय श्रीसूत-शौनक-संवाद में महाभागवत [ देवीपुराण ]-का प्रारम्भ। महाभागवत की रचना के लिये भगवती दुर्गा की उपासना। भगवती का प्रकट होकर अपने चरणतल में स्थित सहस्रदलकमल में परमाक्षरों में उत्कीर्ण महाभागवत [देवीपुराण]-का व्यासजी को दर्शन कराना और पुनः व्यासजी द्वारा महाभागवत की रचना अथ… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण] – सिंहावलोकन July 28, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमहाभागवत [देवीपुराण] – सिंहावलोकन यामाराध्य विरिञ्चिरस्य जगतः स्रष्टा हरिः पालकः संहर्ता गिरिशः स्वयं समभवद्धयेया च या योगिभिः । यामाद्यां प्रकृतिं वदन्ति मुनयस्तत्त्वार्थविज्ञाः परां तां देवीं प्रणमामि विश्वजननीं स्वर्गापवर्गप्रदाम् ॥ जिनकी आराधना करके स्वयं ब्रह्माजी इस जगत् के सृजनकर्ता हुए, भगवान् विष्णु पालनकर्ता हुए तथा भगवान् शिव संहार करनेवाले हुए, योगिजन जिनका ध्यान करते हैं और… Read More