सर्व सिद्धिदायक हनुमान मन्त्र सर्व सिद्धिदायक हनुमान मन्त्र श्री हनुमान् जी का यह मंत्र समस्त प्रकार के कार्यों की सिद्धि के लिए प्रयोग किया जाता है । मन्त्र सिद्ध करने के लिए हनुमान जी के मन्दिर में जाकर हनुमान जी की पंचोपचार पूजा करें और शुद्ध घृत का दीपक जलाकर भीगी हुई चने की दाल और गुड़ का प्रसाद… Read More
हनुमान अष्टादशाक्षर मन्त्र-प्रयोग श्री हनुमान अष्टादशाक्षर मन्त्र-प्रयोग मन्त्रः- “ॐ नमो हनुमते आवेशय आवेशय स्वाहा ।” विधिः- सबसे पहले हनुमान जी की एक मूर्त्ति रक्त-चन्दन से बनवाए । किसी शुभ मुहूर्त्त में उस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कर उसे रक्त-वस्त्रों से सु-शोभित करे । फिर रात्रि में स्वयं रक्त-वस्त्र धारण कर, रक्त आसन पर पूर्व की तरफ मुँह करके बैठे… Read More
आञ्जनेयास्त्रम् ।। अथ आञ्जनेयास्त्रम् ।। अधुना गिरिजानन्द आञ्जनेयास्त्रमुत्तमम् । समन्त्रं सप्रयोगं च वद मे परमेश्वर ।।१।। ।।ईश्वर उवाच।। ब्रह्मास्त्रं स्तम्भकाधारि महाबलपराक्रम् । मन्त्रोद्धारमहं वक्ष्ये श्रृणु त्वं परमेश्वरि ।।२।। आदौ प्रणवमुच्चार्य मायामन्मथ वाग्भवम् । शक्तिवाराहबीजं व वायुबीजमनन्तरम् ।।३।। विषयं द्वितीयं पश्चाद्वायु-बीजमनन्तरम् । ग्रसयुग्मं पुनर्वायुबीजं चोच्चार्य पार्वति ।।४।। स्फुर-युग्मं वायु-बीजं प्रस्फुरद्वितीयं पुनः । वायुबीजं ततोच्चार्य हुं फट् स्वाहा… Read More
मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग १॰ भगवती सीता ने गौरी की उपासना निम्न मन्त्र द्वारा की थी, जिसके फलस्वरुप उनका विवाह भगवान् श्रीराम से हुआ। अतः कुमारी कन्याओं को मनोवाञ्छित वर पाने के लिये इसका पाठ करना चाहिए। “ॐ श्रीदुर्गायै सर्व-विघ्न-विनाशिन्यै नमः स्वाहा। सर्व-मङ्गल-मङ्गल्ये, सर्व-काम-प्रदे देवि, देहि मे वाञ्छितं नित्यं, नमस्ते शंकर-प्रिये।। दुर्गे शिवेऽभये माये, नारायणि सनातनि,… Read More
दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र शाण्डिल्य मुनि ने एक दरिद्र पुत्र की माता से कहा- ‘शिवजी की प्रदोषकाल के अन्तर्गत की गयी पूजा का फल श्रेष्ठ होता है। जो प्रदोषकाल में शिव की पूजा करते हैं, वे इसी जन्म में धन-धान्य, कुल-सम्पत्ति से समृद्ध हो जाते हैं। ब्राह्मणी ! तुम्हारा पुत्र पूर्व-जन्म में ब्राह्मण था। इसने… Read More
शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग शत्रु-बाधा निवारक ‘दारूण-सप्तक’ जब हिरण्यकश्यप को भगवान् नृसिंह ने अपनी गोद में रखकर अपने खर-तर नखों से उसके उदर को सर्वथा विदीर्ण कर चीर दिया और प्रह्लाद का दुःख दूर हो गया । तदनन्तर श्री भगवान् नृसिंह का वह क्रोध शान्त न हुआ, तब भगवान् विष्णु के आग्रह पर भगवान् रुद्र… Read More
महाकवि श्रीहर्ष और चिन्तामणि मन्त्र महाकवि श्रीहर्ष और चिन्तामणि मन्त्र बात तो है बारहवीं शताब्दी की, किन्तु लगती है कल की जैसी। वैसा प्रखर पाण्डित्य, उतनी गहराएयों के साथ दार्शनिक अनुशीलन की शक्ति, संस्कृत भाषा पर अद्भुत अधिकार, काव्य-निर्माण की अद्वितीय अप्रतिहत प्रतिज्ञा और कारयित्री तथा भावयित्री प्रतिभाओं का अविछिन्न संगम ‘महाकवि’- “श्रीहर्ष” के रोम-रोम में प्रवाहित हो रहा था।… Read More
अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्र-साधना अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्र-साधना भगवान् अर्द्ध-नारीश्वर के “चिन्ता-मणि” नामक मन्त्र की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियाँ मिलती है । इसकी साधना विधि निम्न प्रकार है – विनियोगः- ॐ अस्य अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, अर्द्ध-नारीश्वर देवता, सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- शिरसि कश्यप ऋषये नमः, मुखे अनुष्टुप छन्दसे नमः, हृदि अर्द्ध-नारीश्वर देवतायै नमः, अञ्जलौ सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय… Read More
रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग ।। श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्र प्रयोग ।। किसी प्राचीन शिवालय में जाकर गणेश जी की “ॐ गं गणपतये नमः” मन्त्र से षोडशोपचार पूजन करे । तदनन्तर “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र से महा-देव जी की पूजा कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्रस्य श्री कहोल ऋषिः, विराट् छन्दः,… Read More
श्रीबटुक-भैरव-मन्त्र-जप-विधि श्रीबटुक-भैरव-मन्त्र-जप-विधि विनियोगः- ॐ अस्य श्रीआपदुद्धारण-बटुकभैरवमन्त्रस्य बृहदारण्यक ऋषिः त्रिष्टुप् छन्दः श्रीबटुकभैरवो देवता ह्रीं बीजं स्वाहा शक्तिः भैरवः कीलकं मम् धर्मार्थ-काम-मोक्षार्थं श्रीबटुकभैरव प्रीत्यर्थं जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- बृहदारण्यक ऋषये नमः शिरसि, त्रिष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीबटुकभैरवो देवतायै नमः हृदये, ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये, स्वाहा शक्तये नमः पादयो, भैरवः कीलकाय नमः नाभौ, मम् धर्मार्थ-काम-मोक्षार्थं श्रीबटुकभैरव प्रीत्यर्थं जपे विनियोगाय… Read More