श्रीदुर्गा-सप्तशती श्रीदुर्गा-सप्तशती (क) दुर्गा-सप्तशती श्रीमार्कण्डेय पुराणान्तर्गत सात सौ पद्यों का इसमें समावेश होने से इसे “सप्तशती” का नाम दिया गया है। वैसे इसमें सात सतियों की प्रधानता होने से इसे “सप्तसती” भी कहते हैं। दुर्गा सप्तशती में ७०० मन्त्र हैं, किन्तु वे उवाचमन्त्र, अर्ध-श्लोक एवं त्रिपाद-श्लोकों के संग्रह से पूर्ण होते हैं। हजारों वर्षों से लाखों… Read More
त्रयोदश-श्लोकी चण्डी त्रयोदश-श्लोकी चण्डी (त्रयोदश-श्लोकी दुर्गा) पूर्व-पीठिका ।। श्रीशिव उवाच ।। देवि ! त्वं भक्ति-सुलभे ! सर्व-कार्य-विधायिनी । कलौ हि कार्य-सिद्धयर्थमुपायं ब्रुहि यत्नतः ।। ।।श्रीदेवी उवाच ।। श्रृणु देव ! प्रवक्ष्यामि, कलौ सर्वेष्ट-साधनम् । मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बा-स्तुतिः प्रकाश्यते ।।… Read More
दुर्गा-सप्तशती श्री मार्कण्डेय-प्रोक्त लघु-दुर्गा-सप्तशती ॐ वींवींवीं वेणुहस्ते स्तुतिविधवटुके हां तथा तानमाता, स्वानंदेमंदरुपे अविहतनिरुते भक्तिदे मुक्तिदे त्वम् । हंसः सोहं विशाले वलयगतिहसे सिद्धिदे वाममार्गे, ह्रीं ह्रीं ह्रीं सिद्धलोके कष कष विपुले वीरभद्रे नमस्ते ।। १ ।।… Read More