पाण्डवकृत कात्यायनी स्तुति ॥ पाण्डवकृत कात्यायनी स्तुति ॥ शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिये नित्य पाठ करें – ततो धर्मसुतो राजा गुरून्युद्धे व्यवस्थितान् । भीष्मद्रोणमुखान्सर्वान्प्रणिपत्य पृथक् पृथक् । युद्धाय तैरनुज्ञात स्वरथ पुनरागमत् ॥ १ ॥ ततस्ते पाण्डवा सर्वे अवप्लुत्य रथोत्तमात् । संग्रामे जयलाभाय तुष्टुवुर्जगदम्विकाम् ॥ २ ॥ ॥ पाण्डवा ऊचु ॥… Read More
श्रीराधिका सहस्रनाम स्तोत्रम् (वासुदेवरहस्ये राधातन्त्रे ) ॥ अथ श्रीराधिका सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥ इस सहस्रनाम स्तोत्र में पूर्णाभिषेक दीक्षा से मन्त्र व कर्म के ज्ञान हेतु कहा गया है । ॥ ईश्वरोवाच ॥ इति ते कथितं देवि किमन्यत् कथयामि ते । श्रोत्री त्वं परमेशानि अहं वक्ता च शाश्वतः ॥ ॥ देव्युवाच ॥ कियदन्यन्महादेव पृच्छामि यदिहोच्यते । हृदये तव देवेश नानातन्त्राणि सन्ति वै… Read More
श्रीराधिकासहस्रनामस्तोत्रम् ॥ श्रीराधिकासहस्रनामस्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ देवदेव जगन्नाथ भक्तानुग्रहकारक । यद्यस्ति मयि कारुण्यं मयि यद्यस्ति ते दया ॥ १ ॥ यद्यत् त्वया निगदितं तत्सर्वं मे श्रुतं प्रभो । गुह्याद् गुह्यतरं यत्तु यत्ते मनसि काशते ॥ २ ॥ त्वया न गदितं यत्तु यस्मै कस्मै कदचन । तस्मात् कथय देवेश सहस्रं नाम चोत्तमम् ॥ ३ ॥ श्रीराधाया… Read More
श्रीराधा अष्टादशशतीनाम स्तोत्र ॥ श्रीराधा अष्टादशशतीनाम स्तोत्र ॥ राधा ने वृन्दा से कहा कि तुम मेरे जन्म एवं समागम के बारे में कुछ नहीं जानती और न ही तुम मेरे नाम प्रभाव को जानती हो । वृन्दा ने जब उनके नाम प्रभाव को जानना चाहा तो राधा ने अपने १८०० नाम बताये । श्रीराधा के ये १८०० नाम… Read More
भुवनेश्वरीकृत राधास्तुतिः ॥ अथ भुवनेश्वरीकृत राधास्तुतिः॥ राधा ने भुवनेश्वरी को स्मरण कर वृन्दावन को गोलोकमय बनाने को कहा तब भुवनेश्वरी ने राधा की महिमा वर्णन करते हुए प्रशंसापूर्वक कहा कि राधा आप त्रिभुवन की स्वयं लक्ष्मी हो । उसका यथा वर्णन — ॥ ब्राह्मणी उवाच ॥ ततः किमभवत् पश्चाद् देवगन्धर्व कथ्यताम् । पुनीहि मे श्रुतिपुटौ नानादोषकुलाकुलौ ॥… Read More
त्रिपुरसुन्दर्यादूती वशिनीकृत राधा स्तुतिः ॥ त्रिपुरसुन्दर्यादूती वशिनीकृत राधा स्तुतिः ॥ राधा ने त्रिपुर सुन्दरी की उपासना की कि हे मां मेरी सहायता करो तथा त्रिपुरसुन्दरी ने अपनी वशिन्यादि दूतियों को सहायता करने को कहा तब वशिन्यादि ने राधा की प्रशंसा व स्तुति की । यथा — जय जय राधे कृतनतराधे जगदभिवन्द्ये सुरवरवन्द्ये । धृतबहुरूपे स्मरमखरूपे सरसिजवक्त्रे सुमदिरनेत्रे ॥ जय… Read More
श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र ॥ अथ श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र ॥ मुनीन्द्र-वृन्द-वन्दिते त्रिलोक-शोकहारिणि, प्रसन्न-वक्त्र-पङ्कजे निकुञ्ज-भूविलासिनि । व्रजेन्द्र-भानुनन्दनि व्रजेन्द्र सूनुसङ्गते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ १ ॥ अशोक-वृक्ष-वल्लरी-वितान-मण्डप-स्थिते, प्रवाल-बाल)-पल्लव-प्रभारुणाङ्घ्रिकोमले । वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ २ ॥… Read More
श्रीराधिका त्रैलोक्यमङ्गल कवचम् ॥ अथ श्रीराधिका त्रैलोक्यमङ्गल कवचम् ॥ इस कवच स्तोत्र में राधा को दशमहाविद्या प्रधान त्रिपुरसुन्दरी की दूती बताया गया है, अत: महाविद्या यह महाविद्या नहीं होकर तन्त्रानुसार उपमहाविद्या है । ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ देवदेव महादेव सृष्टिस्थित्यन्तकारक । राधिकाकवचं देव कथयस्व दयानिधे ॥ १ ॥ ॥ ईश्वरोवाच ॥… Read More
सर्वरक्षाकर श्रीराधाकवचम् ॥ सर्वरक्षाकर श्रीराधाकवचम् ॥ इस कवच को हल्दी, गोरोचन, केसर, हरिचन्दन से भोजपत्र पर लिखकर (श्लोक ९ – २१) धारण करने से अभीष्ट सिद्धि होती है । ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ कैलासवासिन् भगवन् भक्तानुग्रह-कारक । राधिका-कवचं पुण्यं कथयस्व मम प्रभो ॥ १ ॥ यद्यस्ति करुणा-नाथ त्राहि मां दुःखतो भयात् । त्वमेव शरणं नाथ शूल-पाणे पिनाक-धृक् ॥… Read More
श्रीराधा भक्तिज्ञान कवचम् ॥ अथ श्रीराधा भक्तिज्ञान कवचम् ॥ कवच की महिमा तथा राधा अष्टाक्षर व नवाक्षर मंत्र का फल बताते हुए कहा कि ब्रह्मा, धर्मराज, नरनारायण, कामदेव, अग्नि, वायु, शेष कूर्मादि ने अपना अपना यथेष्ट सिद्ध किया । महर्षि दधीचि ने कवच तथा राधा मन्त्र — “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं रां राधिकायै स्वाहा ।” के प्रभाव… Read More