ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 03 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसरा अध्याय पुत्र प्राप्त्यर्थ पार्वती को पुण्यक व्रत का उपदेश महादेवजी ने कहा — पार्वति ! मैं उपाय बतलाता हूँ, सुनो। उससे तुम्हारा परम कल्याण होगा; क्योंकि त्रिलोकी में उपाय करने से कार्यसिद्धि होती ही है । मैं तुमसे जिस उपाय का वर्णन… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 02 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दूसरा अध्याय देवताओं को पार्वती का शाप पार्वती की महादेवजी से पुत्रोत्पत्ति के लिये प्रार्थना, शिवजी का उन्हें पुण्यक-व्रत के लिये प्रेरित करना नारायण बोले — महादेव ने सुख त्याग कर सामने देवों को देखते ही पार्वती के भय से कृपापूर्वक कहा —… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 01 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पहला अध्याय नारदजी की नारायण से गणेशचरित के विषय में जिज्ञासा, नारायण द्वारा शिव-पार्वती के विवाह तथा स्कन्द की उत्पत्ति का वर्णन, पार्वती की महादेवजी से पुत्रोत्पत्ति के लिये प्रार्थना, शिवजी का उन्हें पुण्यक-व्रत के लिये प्रेरित करना नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 67 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सडसठवाँ अध्याय प्रकृति-कवच या ब्रह्माण्ड-मोहन-कवच एवं उसका माहात्म्य नारदजी ने कहा — समस्त धर्मों के ज्ञाता तथा सम्पूर्ण ज्ञान में विशारद भगवन् ! ब्रह्माण्ड-मोहन नामक प्रकृति-कवच का वर्णन कीजिये । भगवान् नारायण बोले — वत्स ! सुनो। मैं उस… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 66 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छियासठवाँ अध्याय दुर्गाजी का दुर्गनाशन-स्तोत्र एवं उसका माहात्म्य नारदजी ने कहा — मुनिश्रेष्ठ ! मैंने सब कुछ सुन लिया । अवश्य ही अब कुछ भी सुनना शेष नहीं रहा । केवल प्रकृतिदेवीके स्तोत्र और कवच का मुझसे वर्णन कीजिये… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 65 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पैंसठवाँ अध्याय देवी के बोधन, आवाहन, पूजन और विसर्जन के नक्षत्र, इन सबकी महिमा, राजा को देवी का दर्शन एवं उत्तम ज्ञान का उपदेश देना नारदजी ने पूछा — महाभाग ! आपने जो कुछ कहा है, वह अमृतरस से… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 64 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौंसठवाँ अध्याय देवी की पूजा का विधान, ध्यान, प्रतिमा की स्थापना, परिहार-स्तुति, शङ्ख में तीर्थों का आवाहन तथा देवी के षोडशोपचार पूजन का क्रम भगवान् नारायण कहते हैं — महाभाग नारद! राजा सुरथ ने जिस क्रम से देवी परा… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 63 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तिरेसठवाँ अध्याय सुरथ और समाधि पर देवी की कृपा और वरदान नारदजी ने पूछा — वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ महाभाग नारायण ! अब कृपया यह बताइये कि राजा ने किस प्रकार से पराप्रकृति का सेवन किया था ? समाधि नामक… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 62 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बाँसठवाँ अध्याय सुरथ और समाधि वैश्य का मेधस् के आश्रम पर जाना, मुनि का दुर्गा की महिमा एवं उनकी आराधना-विधि का उपदेश देना तथा दुर्गा की आराधना से उन दोनों के अभीष्ट मनोरथ की पूर्ति नारद बोले — राजा… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 61 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकसठवाँ अध्याय बृहस्पति को तारा की प्राप्ति तथा बुध की उत्पत्ति नारद बोले — हे भगवन् ! उसके पश्चात् दैत्यों और देवों में क्या हुआ? यह रहस्य सुनने का मुझे बड़ा कौतूहल हो रहा है । नारायण बोले —… Read More