श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय विदुरजी के प्रश्न श्रीशुकदेवजी कहते हैं — मैत्रेयजी का यह भाषण सुनकर बुद्धिमान् व्यासनन्दन विदुरजी ने उन्हें अपनी वाणी से प्रसन्न करते हुए कहा ॥ १ ॥ विदुरजी ने पूछा — ब्रह्मन् ! भगवान् तो शुद्ध… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय विराट् शरीर की उत्पत्ति श्रीमैत्रेय ऋषि ने कहा — सर्वशक्तिमान् भगवान् ने जब देखा कि आपस में संगठित न होने के कारण ये मेरी महतत्त्व आदि शक्तियां विश्व-रचना के कार्य में असमर्थ हो रही हैं, तब… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय विदुरजी का प्रश्न और मैत्रेयजी का सृष्टिक्रमवर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परमज्ञानी मैत्रेय मुनि (हरिद्वार क्षेत्र में) विराजमान थे । भगवद्भक्ति से शुद्ध हुए हृदयवाले विदुरजी उनके पास जा पहुँचे और उनके साधुस्वभाव से आप्यायित होकर… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय उद्धवजी से विदा होकर विदुरजी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना उद्धवजी ने कहा — फिर ब्राह्मणों की आज्ञा पाकर यादवों ने भोजन किया और वारुणी मदिरा पी । उससे उनका ज्ञान नष्ट हो गया और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय भगवान् के अन्य लीला-चरित्रों का वर्णन उद्धवजी कहते हैं — इसके बाद श्रीकृष्ण अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव को सुख पहुँचाने की इच्छा से बलदेवजी के साथ मथुरा पधारे और उन्होंने शत्रुसमुदाय के स्वामी कंस को ऊँचे सिंहासन… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय उद्धवजी द्वारा भगवान् की बाललीलाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — जब विदुरजी ने परम भक्त उद्धव से इस प्रकार उनके प्रियतम श्रीकृष्ण से सम्बन्ध रखनेवाली बातें पूछी, तब उन्हें अपने स्वामी का स्मरण हो आया और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय उद्धव और विदुर की भेंट श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! जो बात तुमने पूछी है, वही पूर्वकाल में अपने सुख-समृद्धि से पूर्ण घर को छोड़कर वन में गये हुए विदुरजी ने भगवान् मैत्रेयजी से पूछी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय भागवत के दस लक्षण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इस भागवतपुराण में सर्ग, विसर्ग, स्थान, पोषण, ऊति, मन्वन्तर, ईशानुकथा, निरोध, मुक्ति और आश्रय — इन दस विषयों का वर्णन है ॥ १ ॥ इनमें जो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय ब्रह्माजी का भगवद्धामदर्शन और भगवान् के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवत का उपदेश श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! जैसे स्वप्न में देखे जानेवाले पदार्थों के साथ उसे देखनेवाले का कोई सम्बन्ध नहीं होता, वैसे ही देहादि… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय राजा परीक्षित् के विविध प्रश्न राजा परीक्षित् ने कहा — भगवन् ! आप वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ । मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि जब ब्रह्माजी ने निर्गुण भगवान् के गुणों का वर्णन करने के लिये… Read More