श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय भिन्न-भिन्न सिद्धियों के नाम और लक्षण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! जब साधक इन्द्रिय, प्राण और मन को अपने वश में करके अपना चित्त मुझमें लगाने लगता है, मेरी धारणा करने लगता है,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय भक्तियोग की महिमा तथा ध्यानविधि का वर्णन उद्धवजी ने पूछा — श्रीकृष्ण ! ब्रह्मवादी महात्मा आत्मकल्याण के अनेकों साधन बतलाते हैं । उनमें अपनी-अपनी दृष्टि के अनुसार सभी श्रेष्ठ अथवा किसी एक की प्रधानता है ?… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय हंसरूप से सनकादि को दिये हुए उपदेश का वर्णन भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! सत्त्व, रज और तम — ये तीनों बुद्धि (प्रकृति) के गुण हैं, आत्मा के नहीं । सत्त्व के द्वारा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय सत्सङ्ग की महिमा और कर्म तथा कर्मत्याग की विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! जगत् में जितनी आसक्तियाँ हैं, उन्हें सत्सङ्ग नष्ट कर देता है । यहीं कारण है कि सत्सङ्ग जिस प्रकार… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय बद्ध, मुक्त और भक्तजनों के लक्षण भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — प्यारे उद्धव ! आत्मा बद्ध है या मुक्त है, इस प्रकार की व्याख्या या व्यवहार मेरे अधीन रहनेवाले सत्त्वादि गुणों की उपाधि से ही होता… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय लौकिक तथा पारलौकिक भोगों की असारता का निरूपण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्यारे उद्धव ! साधक को चाहिये कि सब तरह से मेरी शरण में रहकर (गीता, पाञ्चरात्र आदि में) मेरे द्वारा उपदिष्ट अपने धर्मों… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान-कुरर से लेकर शृंगी तक सात गुरुओं की कथा अवधूत दत्तात्रेयजी ने कहा — राजन् ! मनुष्यों को जो वस्तुएँ अत्यन्त प्रिय लगती हैं, उन्हें इकट्ठा करना ही उनके दुःख का कारण है । जो बुद्धिमान्… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान — अजगर से लेकर पिङ्गला तक नौ गुरुओं की कथा अवधूत दत्तात्रेयजी कहते हैं — राजन् ! प्राणियों को जैसे बिना इच्छा के, बिना किसी प्रयत्न के रोकने की चेष्टा करने पर भी पूर्वकर्मानुसार दुःख… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान — पृथ्वी से लेकर कबूतर तक आठ गुरुओं की कथा भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाभाग्यवान् उद्धव ! तुमने मुझसे जो कुछ कहा है मैं वही करना चाहता हूँ । ब्रह्मा, शङ्कर और इन्द्रादि लोकपाल… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय देवताओं की भगवान् से स्वधाम सिधारने के लिये प्रार्थना तथा यादवों को प्रभासक्षेत्र जाने की तैयारी करते देखकर उद्धव का भगवान् के पास आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवर्षि नारद वसुदेवजी को उपदेश… Read More