शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 05 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय चंचुला के प्रयत्न से पार्वतीजी की आज्ञा पाकर तुम्बुरु का विन्ध्यपर्वत पर शिवपुराण की कथा सुनाकर बिन्दुग का पिशाचयोनि से उद्धार करना तथा उन दोनों दम्पती का शिवधाम में सुखी होना बिन्दुगसद्गतिः ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाभाग धन्यस्त्वं शिवसक्तधीः ।… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 04 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय चंचुला की प्रार्थना से ब्राह्मण का उसे पूरा शिवपुराण सुनाना और समयानुसार शरीर छोड़कर शिवलोक में जा चंचुला का पार्वतीजी की सखी होना चंचुलायाः सद्गतिः ॥ ब्राह्मण उवाच ॥… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 03 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय चंचुला का पाप से भय एवं संसार से वैराग्य चंचुलावैराग्यवर्णनम् ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाभाग सर्वज्ञोऽसि महामते । त्वत्प्रसादात्कृतार्थोऽहं कृतार्थोऽहं पुनः पुनः ॥ १ ॥ इतिहासमिमं श्रुत्वा मनो मेऽतीव मोदते । अन्यामपि कथां शम्भोर्वद प्रेमविवर्द्धिनीम् ॥ २ ॥ नामृतम्पिबतां लोके… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 02 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय शिवपुराण के श्रवण से देवराज को शिवलोक की प्राप्ति ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाभाग धन्यस्त्वं परमार्थवित् । अद्भुतेयं कथा दिव्या श्राविता कृपया हि नः ॥ १ ॥ अघौघविध्वंसकरी मनःशुद्धिविधायिनी । शिवसन्तोषजननी कथेय नः श्रुताऽद्भुता ॥ २ ॥ एतत्कथासमानं न भुवि… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 01 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय शौनकजी के साधनविषयक प्रश्न करने पर सूतजी का उन्हें शिवमहापुराण की महिमा सुनाना ॥ श्रीशौनक उवाच ॥ हे हे सूत महाप्राज्ञ सर्वसिद्धान्तवित्प्रभो । आख्याहि मे कथासारं पुराणानां विशेषतः ॥ १ ॥ सदाचारश्च सद्भक्तिर्विवेको वर्द्धते कथम् । स्वविकारनिरासश्च सज्जनैः क्रियते कथम् ॥ २… Read More
श्रीमद्भागवतकी आरती ॥ श्रीहरिः ॥ ॥ श्रीमद्भागवतकी आरती ॥ आरति अतिपावन पुरान की । धर्म-भक्ति-विज्ञान-खान की ॥ आरति अतिपावन पुरान की ॥ महापुरान भागवत निरमल । शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल । परमानन्द-सुधा-रसमय कल । लीला-रति-रस रस-निधान की ॥ आरति अतिपावन पुरान की ॥ कलि-मल-मथनि त्रिताप-निवारिनि । जन्म-मृत्युमय भव-भय-हारिनि । सेवत सतत सकल सुखकारिनि । सुमहौषधि हरि-चरित-गान की ॥ आरति… Read More
श्रीमद्भागवत-पाठके विभिन्न प्रयोग श्रीमद्भागवत-पाठके विभिन्न प्रयोग भागवत-महिमा श्लोकार्द्धं श्लोकपादं वा नित्यं भागवतं पठेत् । यः पुमान् सोऽपि संसारान्मुच्यते किमुताखिलात् ॥ आधा श्लोक या चौथाई श्लोक का भी नित्य जो मनुष्य पाठ करता है, उसकी भी संसार से मुक्ति हो जाती है; फिर सम्पूर्ण पाठ करनेवाले की तो बात ही क्या है । एषा बुद्धिमतां बुद्धिर्यद् भागवतमादरात् । नित्यं… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ४ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय श्रीमद्भागवत का स्वरूप, प्रमाण, श्रोता-वक्ता के लक्षण, श्रवणविधि और माहात्म्य शौनकादि ऋषियों ने कहा — सूतजी ! आपने हमलोगों को बहुत अच्छी बात बतायी । आपकी आयु बढे, आप चिरजीवी हों और चिरकाल तक हमें इसी प्रकार उपदेश करते रहें । आज… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय ३ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय श्रीमद्भागवत की परम्परा और उसका माहात्म्य, भागवत-श्रवण से श्रोताओं को भगवद्धाम की प्राप्ति सूतजी कहते हैं — उद्धवजी ने वहाँ एकत्र हुए सब लोगों को श्रीकृष्ण-कीर्तन में लगा देखकर सभी का सत्कार किया और राजा परीक्षित् को हृदय से लगाकर कहा ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय २ श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् – अध्याय २ ॐ गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय यमुना और श्रीकृष्णपत्नियों का संवाद, कीर्तनोत्सव में उद्धवजी का प्रकट होना ऋषियों ने पूछा — सूतजी ! अब यह बतलाइये कि परीक्षित् और वज्रनाभ को इस प्रकार आदेश देकर जब शाण्डिल्य मुनि अपने आश्रम को लौट गये, तब उन दोनों राजाओं ने… Read More