शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 11 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] ग्यारहवाँ अध्याय वर्णाश्रम धर्म तथा नारी- धर्मका वर्णन; शिवके भजन, चिन्तन एवं ज्ञानकी महत्ताका प्रतिपादन महादेवजी कहते हैं— देवेश्वरि ! अब मैं अधिकारी, विद्वान् एवं श्रेष्ठ ब्राह्मण – भक्तोंके लिये संक्षेपसे वर्ण- धर्मका वर्णन करता हूँ ॥… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 10 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] दसवाँ अध्याय भगवान् शिवके प्रति श्रद्धा-भक्तिकी आवश्यकताका प्रतिपादन, शिवधर्मके चार पादोंका वर्णन एवं ज्ञानयोगके साधनों तथा शिवधर्मके अधिकारियोंका निरूपण, शिवपूजनके अनेक प्रकार एवं अनन्यचित्तसे भजनकी महिमा श्रीकृष्ण बोले- हे भगवन् ! हे सर्वयोगीन्द्र ! हे गणेश्वर !… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] नौवाँ अध्याय शिवके अवतार योगाचार्यों तथा उनके शिष्योंकी नामावली श्रीकृष्ण बोले- भगवन्! समस्त युगावर्तोंमें योगाचार्यके व्याजसे भगवान् शंकरके जो अवतार होते हैं और उन अवतारोंके जो शिष्य होते हैं, उन सबका वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ उपमन्युने… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] आठवाँ अध्याय शिव-ज्ञान, शिवकी उपासनासे देवताओंको उनका दर्शन, सूर्यदेवमें शिवकी पूजा करके अर्घ्यदानकी विधि तथा व्यासावतारोंका वर्णन श्रीकृष्ण बोले – भगवन्! अब मैं उस शिव-ज्ञानको सुनना चाहता हूँ, जो वेदोंका सारतत्त्व है तथा जिसे भगवान् शिवने अपने… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] सातवाँ अध्याय परमेश्वरकी शक्तिका ऋषियोंद्वारा साक्षात्कार, शिवके प्रसादसे प्राणियोंकी मुक्ति, शिवकी सेवा – भक्ति तथा पाँच प्रकारके शिवधर्मका वर्णन उपमन्यु कहते हैं— परमेश्वर शिवकी स्वाभाविक शक्ति विद्या है, जो सबसे विलक्षण है । वह एक होकर भी… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 06 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] छठवाँ अध्याय शिवके शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, सर्वमय, सर्वव्यापक एवं सर्वातीत स्वरूपका तथा उनकी प्रणवरूपताका प्रतिपादन उपमन्यु कहते हैं— यदुनन्दन ! शिवको न तो आणव मलका ही बन्धन प्राप्त है, न कर्मका और न मायाका ही। प्राकृत, बौद्ध,… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] पाँचवाँ अध्याय परमेश्वर शिवके यथार्थ स्वरूपका विवेचन तथा उनकी शरणमें जानेसे जीवके कल्याणका कथन उपमन्यु कहते हैं – यदुनन्दन ! यह चराचर जगत् देवाधिदेव महादेवजीका स्वरूप है। परंतु पशु (जीव) भारी पाशसे बँधे होनेके कारण जगत् को… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] चौथा अध्याय शिव और शिवाकी विभूतियोंका वर्णन श्रीकृष्णने पूछा – भगवन् ! अमित तेजस्वी भगवान् शिवकी मूर्तियोंने इस सम्पूर्ण जगत् को जिस प्रकार व्याप्त कर रखा है, वह सब मैंने सुना । अब मुझे यह जाननेकी इच्छा… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] तीसरा अध्याय भगवान् शिवकी ब्रह्मा आदि पंचमूर्तियों, ईशानादि ब्रह्ममूर्तियों तथा पृथ्वी एवं शर्व आदि अष्टमूर्तियों का परिचय और उनकी सर्वव्यापकताका वर्णन उपमन्यु कहते हैं— श्रीकृष्ण ! महेश्वर परमात्मा शिवकी मूर्तियोंसे यह सम्पूर्ण चराचर जगत् [ किस प्रकार… Read More


शिवमहापुराण — वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] — अध्याय 02 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण वायवीयसंहिता [उत्तरखण्ड] दूसरा अध्याय उपमन्युद्वारा श्रीकृष्णको पाशुपत ज्ञानका उपदेश ऋषियोंने पूछा- पाशुपत ज्ञान क्या है ? भगवान् शिव पशुपति कैसे हैं ? और अनायास ही महान् कर्म करनेवाले भगवान् श्रीकृष्णने उपमन्युसे किस प्रकार प्रश्न किया था? वायुदेव ! आप… Read More